डेस्क। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को पांच कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के चलते निवेशकों का भरोसा लौटा, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। अमेरिका और ईरान की ओर से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों ने भी बाजार की धारणा को मजबूती दी।
सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार बढ़त
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 569 अंक की बढ़त के साथ मजबूत स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 23,950 के करीब पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 580 अंक चढ़कर 76,640 के स्तर तक पहुंचा, वहीं निफ्टी भी 23,920 के ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया।
रुपये में भी आई मजबूती
शेयर बाजार में तेजी के साथ-साथ भारतीय मुद्रा में भी मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे मजबूत होकर 96.25 पर पहुंच गया। विदेशी निवेशकों की धारणा में सुधार और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों का असर रुपये पर भी दिखाई दिया।
तेजी की बड़ी वजह क्या रही?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत रहे। इससे वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ा और भारतीय बाजारों को भी इसका फायदा मिला।
निफ्टी के लिए अहम स्तर कौन से हैं?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में निफ्टी का रुझान तब तक पूरी तरह सकारात्मक नहीं माना जाएगा, जब तक वह 24,000 के स्तर के ऊपर टिक नहीं जाता। यदि बाजार में फिर से दबाव बनता है तो 23,600 से 23,500 का दायरा मजबूत सपोर्ट ज़ोन माना जा रहा है। यह स्तर अप्रैल और जून 2026 के निचले स्तरों की ट्रेंडलाइन, 15 जून 2026 के गैप और हालिया तेजी के 61.8 फीसदी फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आसपास स्थित है।
वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत
एशियाई और वैश्विक बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। जापान का टॉपिक्स इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200, हांगकांग का हैंग सेंग और शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। वहीं यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स और अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में भी तेजी दर्ज की गई, जिससे भारतीय बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला।
आगे बाजार पर रहेगी इन कारकों की नजर
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक संकेतकों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी। यदि वैश्विक माहौल अनुकूल बना रहता है, तो भारतीय बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।