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इलीश पकड़ने निकले थे, बाघ ने किया हमला; मौत के बाद भी पांच लोगों को दे गए नई जिंदगी

परिवार का पेट पालने के लिए मछली पकड़ने निकले सुंदरबन के एक युवक की जिंदगी बाघ के हमले के बाद भले ही खत्म हो गई, लेकिन उनके परिवार ने ऐसा फैसला लिया जिसने उनकी मौत को कई लोगों के लिए. . .

सात दिन तक मौत से जूझने के बाद ब्रेन डेड घोषित हुए कुलतली के आजिद मोल्ला, परिवार ने किया अंगदान का फैसला

कुलतली, दक्षिण 24 परगना। परिवार का पेट पालने के लिए मछली पकड़ने निकले सुंदरबन के एक युवक की जिंदगी बाघ के हमले के बाद भले ही खत्म हो गई, लेकिन उनके परिवार ने ऐसा फैसला लिया जिसने उनकी मौत को कई लोगों के लिए जीवन की नई उम्मीद में बदल दिया। कुलतली के मैपीठ इलाके के नगनेबाद निवासी आजिद मोल्ला (33) को बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सात दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

मछली पकड़ते समय पीछे से झपटा बाघ

बताया गया कि आजिद अपने जेठतुल्य भाई और भतीजे के साथ इलीश पकड़ने के लिए विद्याधरी नदी में गए थे। विद्याधरी के कालीबेड़ा चर के पास वह मछली पकड़ने वाले जाल को ठीक कर रहे थे। इसी दौरान पीछे से एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमले के बाद साथ मौजूद लोगों ने किसी तरह आजिद को बचाया और तत्काल इलाज के लिए जामतला अस्पताल पहुंचाया। उनकी हालत गंभीर होने के कारण बाद में उन्हें कोलकाता के पीजी अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में रेफर किया गया।

सात दिनों तक अस्पताल में चली जिंदगी की जंग

कोलकाता के अस्पताल में चिकित्सकों ने आजिद को बचाने की पूरी कोशिश की। करीब सात दिनों तक उनका इलाज चलता रहा, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। अंततः चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद अस्पताल की ओर से परिवार को अंगदान की संभावना के बारे में बताया गया। बेहद कठिन परिस्थिति के बावजूद आजिद के परिजनों ने मानवीय पहल करते हुए अंगदान के लिए अपनी सहमति दे दी।

पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गए आजिद

आजिद अपने पीछे पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गए हैं। परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। रोजी-रोटी के लिए मछली पकड़ने पर निर्भर इस परिवार के लिए आजिद की मौत किसी बड़े सदमे से कम नहीं है इसके बावजूद परिजनों ने जिस तरह अंगदान का फैसला लिया, उसकी इलाके में सराहना हो रही है। परिवार के इस फैसले ने आजिद की जिंदगी को एक अलग अर्थ दे दिया है।

मौत के बाद भी पांच लोगों के लिए उम्मीद

परिवार की सहमति के बाद आजिद के अंगों को जरूरतमंद मरीजों के लिए दान करने की प्रक्रिया शुरू की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके अंगों से पांच लोगों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है। सुंदरबन के एक बेहद साधारण परिवार से आने वाले आजिद की कहानी अब केवल बाघ के हमले की त्रासदी नहीं रह गई है। उनके परिवार के इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि गहरे दुख के बीच भी इंसानियत और दूसरों की जिंदगी बचाने का जज्बा कायम रह सकता है।

परिवार के फैसले को मिल रही सराहना

आजिद के परिजनों के इस निर्णय की स्थानीय स्तर पर जमकर प्रशंसा हो रही है। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद परिवार ने अंगदान की अनुमति देकर एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिससे कई जरूरतमंद मरीजों के जीवन में उम्मीद की किरण जग सकती है।

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