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मणिपाल हॉस्पिटल्स के डॉ. रोहित तिवारी ने महिलाओं को किया सचेत, कहा- सर्वाइकल कैंसर ही नहीं, इन स्त्री रोग संबंधी कैंसर के प्रति भी रहें जागरूक

महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर को लेकर जागरूकता अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि महिला प्रजनन तंत्र के अन्य हिस्सों में होने वाले कैंसर के प्रति भी जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है. . .

ओवेरियन, गर्भाशय, योनि और वल्वा कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज न करने की दी सलाह

सिलीगुड़ी। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर को लेकर जागरूकता अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि महिला प्रजनन तंत्र के अन्य हिस्सों में होने वाले कैंसर के प्रति भी जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। ओवरी (अंडाशय), गर्भाशय, योनि और वल्वा में होने वाले कैंसर कई बार शुरुआती दौर में ऐसे लक्षण पैदा कर सकते हैं, जिन्हें महिलाएं सामान्य मासिक धर्म, हार्मोनल बदलाव या पाचन संबंधी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में होने वाले नए या लगातार बने रहने वाले बदलावों पर ध्यान देना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बीमारी की पहचान और उचित उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

लगातार बने रहने वाले लक्षणों को न करें नजरअंदाज

मणिपाल हॉस्पिटल्स सिलीगुड़ी के कंसल्टेंट–सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, डॉ. रोहित तेवारी ने कहा कि स्त्री रोग संबंधी कैंसर महिलाओं को अलग-अलग उम्र में प्रभावित कर सकते हैं और इनके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैंसर शरीर के किस हिस्से में विकसित हुआ है।
उन्होंने कहा, “स्त्री रोग संबंधी कैंसर महिलाओं को जीवन के अलग-अलग चरणों में प्रभावित कर सकते हैं और इनके लक्षण कैंसर के स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। महिलाओं को असामान्य रक्तस्राव, पेल्विक दर्द, पेट फूलना, असामान्य स्राव या वल्वा के क्षेत्र में होने वाले बदलाव जैसे नए या लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, लेकिन समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से कारण की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।”

ओवरी कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं बेहद सामान्य

ओवरी या अंडाशय का कैंसर शुरुआती चरण में पहचानना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसके लक्षण कई बार सामान्य और हल्के दिखाई देते हैं। इन लक्षणों में लगातार पेट फूलना, पेट या पेल्विक क्षेत्र में दर्द, थोड़ी मात्रा में खाना खाने के बाद ही पेट भरा हुआ महसूस होना, आंतों या पेशाब की आदतों में बदलाव तथा बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन में बदलाव शामिल हो सकते हैं।
यदि ऐसे लक्षण नए हैं और कई सप्ताह तक बने रहते हैं, तो महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

गर्भाशय के कैंसर में असामान्य रक्तस्राव महत्वपूर्ण संकेत

गर्भाशय की अंदरूनी परत में विकसित होने वाले एंडोमेट्रियल या गर्भाशय कैंसर का एक प्रमुख संकेत असामान्य योनि से रक्तस्राव हो सकता है। बहुत अधिक या लंबे समय तक मासिक धर्म होना, पीरियड्स के बीच रक्तस्राव तथा मेनोपॉज के बाद योनि से रक्तस्राव इसके संभावित संकेत हो सकते हैं।
मेनोपॉज के बाद होने वाले किसी भी अस्पष्ट रक्तस्राव की चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। हालांकि ऐसे रक्तस्राव के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, लेकिन इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

योनि और वल्वा कैंसर के लक्षणों पर भी दें ध्यान

योनि और वल्वा के कैंसर अपेक्षाकृत कम पाए जाते हैं, लेकिन इनके संभावित लक्षणों के बारे में महिलाओं को जानकारी होना जरूरी है।असामान्य योनि से रक्तस्राव या स्राव, लगातार पेल्विक असहजता, खुजली, जलन, घाव या गांठ तथा वल्वा की त्वचा के रंग, बनावट या स्वरूप में बदलाव ऐसे लक्षण हैं, जिनकी जांच कराना आवश्यक हो सकता है। यदि कोई लक्षण सामान्य उपचार के बावजूद ठीक नहीं होता या लगातार बना रहता है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

HPV संक्रमण भी है महत्वपूर्ण जोखिम कारक

विशेषज्ञों के अनुसार, हाई-रिस्क ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के लगातार बने रहने वाले संक्रमण का संबंध सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ कुछ योनि और वल्वा कैंसर से भी है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीनेशन और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण प्रिवेंटिव मैसर्स हैं।
हालांकि, महिलाओं की कैंसर संबंधी जागरूकता केवल सर्वाइकल कैंसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। परिवार में कैंसर का इतिहास और व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के बारे में डॉक्टर से चर्चा करना भी जरूरी है।

किन महिलाओं में जोखिम अधिक हो सकता है?

स्त्री रोग संबंधी कैंसर के जोखिम को कई कारक प्रभावित कर सकते हैं। इनमें बढ़ती उम्र, कुछ प्रकार के कैंसर का पारिवारिक इतिहास, मोटापा तथा कुछ हार्मोनल या मेटाबॉलिक स्थितियां शामिल हो सकती हैं।
हालांकि, किसी जोखिम कारक की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि महिला को निश्चित रूप से कैंसर होगा। वहीं, बिना स्पष्ट जोखिम कारक के भी कैंसर हो सकता है। इसलिए शरीर में होने वाले असामान्य और लगातार बदलावों को लेकर सतर्क रहना जरूरी है।

समय पर जांच से मिल सकती है सही दिशा

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले सामान्य बदलावों को समझने के साथ-साथ असामान्य बदलावों पर भी ध्यान देना चाहिए।
असामान्य रक्तस्राव, लगातार पेट या पेल्विक दर्द, लंबे समय तक पेट फूलना, असामान्य स्राव या वल्वा के क्षेत्र में बदलाव को केवल पीरियड्स या हार्मोनल समस्या मानकर छोड़ देना उचित नहीं है।
इन लक्षणों के पीछे कैंसर के अलावा कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। चिकित्सकीय जांच से इनके वास्तविक कारण का पता लगाने में मदद मिल सकती है और जरूरत पड़ने पर आगे की जांच एवं उपचार की योजना बनाई जा सकती है।

सिलीगुड़ी में व्यापक कैंसर देखभाल की सुविधा

मणिपाल हॉस्पिटल्स सिलीगुड़ी में स्त्री रोग एवं ऑन्कोलॉजी से जुड़ी सेवाओं के साथ उन्नत जांच सुविधाएं और मल्टीडिसिप्लिनरी कैंसर केयर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। अस्पताल महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर के अलावा अन्य स्त्री रोग संबंधी कैंसर के लक्षणों और जोखिमों के बारे में जागरूक करने की दिशा में भी प्रयासरत है।

महिलाओं के लिए जरूरी संदेश

सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है, लेकिन महिलाओं को यह भी समझना चाहिए कि कैंसर प्रजनन तंत्र के अन्य हिस्सों में भी विकसित हो सकता है। ओवरी, गर्भाशय, योनि और वल्वा कैंसर के संभावित लक्षणों की जानकारी और समय पर चिकित्सकीय परामर्श महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि शरीर में कोई बदलाव असामान्य, लगातार या बिना किसी स्पष्ट कारण के दिखाई दे रहा है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

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