जकार्ता।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर की यात्रा केवल एक धार्मिक दौरा नहीं है, बल्कि यह भारत की साझा सभ्यतागत विरासत और मजबूत सांस्कृतिक जुड़ाव का एक बड़ा वैश्विक संदेश है। साल 2014 के बाद से, भारत सरकार ने ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ को अपनी विदेश नीति का एक अहम हिस्सा बनाया है। इसके तहत दुनिया भर में फैले सदियों पुराने ऐतिहासिक और आध्यात्मिक प्रतीकों को नया जीवन दिया जा रहा है।
प्रम्बानन मंदिर में गूंजा ‘ॐ नमः शिवाय’
योग्याकार्ता (इंडोनेशिया): इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन शिव मंदिर में ‘ॐ नमः शिवाय’ और महामृत्युंजय मंत्रों के दिव्य उच्चारण के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दर्शन-पूजन किया। इस अलौकिक और आध्यात्मिक वातावरण से अभिभूत होकर प्रधानमंत्री ने कहा: “कैलाश मानसरोवर से लेकर प्रम्बानन तक शिव भक्ति की गूँज एक समान है। यहाँ की ऊर्जा अद्भुत है, मैं यहाँ फिर आऊँगा।”
वर्ष 2029 तक जीर्णोद्धार का लक्ष्य
भारत और इंडोनेशिया ने अपने सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। दोनों देशों ने वर्ष 2029 से पहले इस 9वीं शताब्दी के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) का जीर्णोद्धार (Restoration) कार्य पूरा करने पर सहमति व्यक्त की है।
3. वैश्विक मानचित्र पर भारतीय धरोहरों का पुनरुद्धार (देशवार विवरण)
पीएम मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद से विदेशों में स्थित प्राचीन मंदिरों और धरोहरों के संरक्षण के लिए किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
इंडोनेशिया: प्रम्बानन मंदिर परिसर
- साझा विरासत: 1000 साल पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर परिसर के संरक्षण में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार की भूमिका निभा रहा है, जो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने समुद्री और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है।
बांग्लादेश: रमना काली और जॉय काली माता मंदिर
- ऐतिहासिक न्याय: साल 1971 के युद्ध के दौरान नष्ट कर दिए गए ऐतिहासिक रमना काली मंदिर और लगभग 300 साल पुराने जॉय काली माता मंदिर के पुनर्निर्माण में भारत सरकार ने आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान की।
नेपाल: भूकंप के बाद 28 सांस्कृतिक धरोहरों का पुनर्निर्माण
- संकट में सहयोग: साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने बड़े स्तर पर मदद का हाथ बढ़ाया। भारत के सहयोग से नेपाल के 28 प्रमुख सांस्कृतिक धरोहर स्थलों का पूरी तरह से पुनर्निर्माण कराया गया।
कंबोडिया और लाओस: अंगकोर वाट और वाट फू मंदिर
- विशेषज्ञों की मदद: कंबोडिया के विश्व प्रसिद्ध अंगकोर वाट ता प्रोम और प्रेह विहार मंदिरों के वैज्ञानिक संरक्षण में भारतीय पुरातत्व विशेषज्ञों ने अद्वितीय काम किया है।
- वहीं, लाओस के प्राचीन और ऐतिहासिक ‘वाट फू’ शिव मंदिर को सहेजने में भी भारत ने बड़ा योगदान दिया है।
म्यांमार: बागान हेरिटेज ज़ोन और आनंदा मंदिर
- भूकंप से क्षति का सुधार: म्यांमार में आए भूकंप से प्रभावित हुए प्रसिद्ध बागान हेरिटेज ज़ोन और वहां के ऐतिहासिक आनंदा मंदिर का पुनरुद्धार भारतीय आर्थिक और तकनीकी सहयोग से किया गया।
बहरीन: 200 साल पुराना श्रीनाथजी मंदिर
- खाड़ी देशों में सांस्कृतिक गूंज: बहरीन की राजधानी मनामा में स्थित 200 साल पुराने ऐतिहासिक श्रीनाथजी मंदिर के भव्य पुनर्विकास प्रोजेक्ट में भारत सरकार ने सक्रिय सहयोग दिया, जो खाड़ी देशों के साथ भारत के बदलते रिश्तों का प्रतीक है।
वियतनाम और श्रीलंका: माई सोन और तिरुकेतीश्वरम मंदिर
- वियतनाम: यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल वियतनाम के ‘माई सोन’ (Mỹ Sơn) शिव मंदिर परिसर का भारत की मदद से संरक्षण किया गया।
- श्रीलंका: श्रीलंका के प्राचीन तिरुकेतीश्वरम शिव मंदिर के पुनरुद्धार के लिए भारत सरकार ने विशेष अनुदान सहायता प्रदान की।
मजबूत होते द्विपक्षीय रिश्ते
विदेशों में भारतीय सभ्यता और संस्कृति से जुड़े इन प्रतीकों के संरक्षण का यह प्रयास न केवल दुनिया में भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और सांस्कृतिक साख को बढ़ा रहा है, बल्कि भू-राजनीतिक रूप से मित्र देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय और कूटनीतिक रिश्तों को भी एक नई व अटूट मजबूती दे रहा है।