डेस्क। सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक डिजिटल समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की ज़बरदस्त लोकप्रियता ने इसके संस्थापक अभिजीत दिपके के माता-पिता को गहरी चिंता में डाल दिया है। उन्हें डर है कि अभिजीत किसी मुसीबत में फँस सकते हैं या उन्हें गिरफ़्तार भी किया जा सकता है। यह समूह, जिसे अब CJP के नाम से जाना जाता है, की स्थापना बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र दिपके ने महज़ एक हफ़्ता पहले की थी। दिपके पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे थे। अपनी स्थापना के बाद से ही इस समूह ने 19 मिलियन (1.9 करोड़) से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स बना लिए हैं।
बेटे को राजनीति में भेजने के पक्ष में नहीं
अभिजीत के माता-पिता, भगवान और अनीता दिपके, जो महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में रहते हैं, ने गुरुवार को एक मराठी न्यूज़ चैनल को बताया कि वे अपने बेटे को राजनीति में भेजने के पक्ष में नहीं थे। माता-पिता ने कहा कि अभिजीत के इस कदम के बारे में जानने के बाद से उनकी रातों की नींद उड़ गई है।
दिपके के अनुसार, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का जन्म तब हुआ जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक वकील की वरिष्ठ पदनाम (सीनियर डेज़िग्नेशन) की याचिका पर सुनवाई के दौरान उसे फटकारते हुए परजीवी (parasites) और कॉकरोच (cockroaches) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
CJI ने सफ़ाई दी कि उनके बयान को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया
हालांकि CJI ने बाद में सफ़ाई दी कि उनके बयान को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया था और उनकी टिप्पणियां विशेष रूप से उन लोगों पर लक्षित थीं जो “फ़र्ज़ी और जाली डिग्रियों” के सहारे क़ानूनी पेशे में घुस आए हैं, लेकिन CJP ने-जिसका प्रतीक एक कीड़ा है-सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त धूम मचा दी। भगवान दिपके ने कहा, “अगर हम आज के दौर की राजनीति को देखें, तो डर लगना स्वाभाविक है, चाहे उसके कितने भी फ़ॉलोअर्स क्यों न हों। अपने एक इंटरव्यू में उसने ख़ुद इस बात का डर ज़ाहिर किया था कि भारत लौटने पर उसे गिरफ़्तार किया जा सकता है। हम अख़बारों में ऐसी घटनाओं के बारे में पढ़ते रहते हैं।” अभिजीत की मां अनीता ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनका बेटा राजनीति से दूर रहे और इसके बजाय नौकरी पाने पर ध्यान दे।
उन्होंने कहा, “हम तो बस यही चाहते हैं कि वह सुरक्षित घर लौट आए। वह राजनीति में बना रहेगा या नहीं, यह उसका अपना फ़ैसला होगा, लेकिन हम नहीं चाहते कि वह इस राह पर आगे बढ़े। मुझे नहीं पता कि वह हमारी बात मानेगा या नहीं। मैं इस मामले में उसका साथ नहीं दूँगी। मुझे उसकी बहुत चिंता हो रही है।”
अभिजीत ने विदेश में की है जर्नलिज़्म की पढ़ाई
माँ ने बताया कि अभिजीत ने अपनी शुरुआती पढ़ाई छत्रपति संभाजीनगर में की थी और बाद में आगे की पढ़ाई के लिए पुणे चला गया था। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई उसे मुश्किल लग रही थी, इसलिए उसने मास मीडिया (जनसंचार) के क्षेत्र में जाने का फ़ैसला किया। भगवान ने बताया कि अभिजीत ने विदेश में जर्नलिज़्म की पढ़ाई करने का फ़ैसला इसलिए किया, क्योंकि उसकी बहन पहले से ही वहाँ थी। पिता ने कहा कि वह चाहते थे कि उनका बेटा पुणे या दिल्ली में नौकरी करे।