वैश्विक तनाव से सहमा शेयर बाजार : सेंसेक्स 600 अंक टूटा, निफ्टी 24,200 के करीब फिसला
नई दिल्ली: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत होते ही बाजार में चौतरफा बिकवाली हावी रही। सुबह करीब 9:35 बजे बीएसई (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 591.29 अंक यानी 0.76 फीसदी की गिरावट के साथ 77,589.43 पर कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 180 अंक यानी 0.74 फीसदी टूटकर 24,218.70 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में आई इस कमजोरी के पीछे तीन प्रमुख वजहें हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ा सैन्य तनाव, वैश्विक बाजारों पर दबाव
बाजार की गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास तेल टैंकरों पर कथित मिसाइल हमलों के बाद जवाबी सैन्य कार्रवाई की। वहीं, ईरान की ओर से बहरीन और कुवैत पर भी हमलों की खबरों ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को और गहरा कर दिया है। इस बढ़ते भू-राजनीतिक संकट ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार समेत दुनिया के कई बाजारों पर देखने को मिल रहा है।
कच्चे तेल में तेज उछाल, भारत पर बढ़ा आर्थिक दबाव
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 2.6 फीसदी की तेजी के साथ 76 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी इसमें लगभग 3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से आयात लागत, महंगाई और कॉरपोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ता है।
इंडिया VIX में 7% से ज्यादा उछाल, बढ़ी बाजार की अस्थिरता
बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत देने वाला इंडिया VIX भी बुधवार को 7 फीसदी से अधिक उछलकर 12.47 के स्तर पर पहुंच गया। इसे बाजार का “फियर गेज” भी कहा जाता है। इंडिया VIX में तेजी इस बात का संकेत मानी जाती है कि निवेशकों के बीच जोखिम को लेकर चिंता बढ़ रही है और आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक रह सकता है।
निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम पर
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व की स्थिति स्पष्ट नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी।