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127 कट, 4 साल का इंतज़ार, 48 घंटे में OTT से गायब हुई दिलजीत दोसांझ की, आखिर क्यों मचा इतना बड़ा बवाल?

डेस्क। दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पहले सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के चलते फिल्म का नाम ‘पंजाब 95’ से बदलकर ‘सतलुज’ किया गया, फिर 127 कट लगाने के बाद. . .

डेस्क। दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पहले सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के चलते फिल्म का नाम ‘पंजाब 95’ से बदलकर ‘सतलुज’ किया गया, फिर 127 कट लगाने के बाद इसे 3 जुलाई 2026 को चुपचाप ZEE5 पर रिलीज किया गया। लेकिन रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर ही फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। अब भारत में इस फिल्म की स्ट्रीमिंग अगले आदेश तक रोक दी गई है।

देखते-देखते रुक गई फिल्म

रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही थी। हालांकि, कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि फिल्म देखते-देखते अचानक बंद हो गई। कुछ ही देर बाद पता चला कि ‘सतलुज’ अब ZEE5 इंडिया पर उपलब्ध नहीं है।

ZEE5 ने क्या कहा?

ZEE5 इंडिया ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि फिल्म को दर्शकों का शानदार प्यार मिला है और प्लेटफॉर्म इसके रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ मजबूती से खड़ा है। हालांकि, “मौजूदा परिस्थितियों” के कारण फिल्म को अस्थायी रूप से हटाया गया है। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए फिल्म को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश जारी रहेगी।

क्या है फिल्म की कहानी?

‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित बायोपिक है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओल्यान अहम भूमिकाओं में हैं।

कहानी एक बैंक कर्मचारी जसवंत सिंह खालड़ा से शुरू होती है, जो अपने लापता रिश्तेदार की तलाश में निकलते हैं। इसी दौरान उन्हें ऐसे कथित मामलों का पता चलता है, जिनमें आतंकवाद विरोधी अभियानों की आड़ में कई निर्दोष लोगों को गैर-कानूनी हिरासत में लेकर फर्जी मुठभेड़ों में मार दिया गया। फिल्म में दावा किया गया है कि हजारों लोगों के शवों को लावारिस घोषित कर सतलुज नदी में बहा दिया गया था।

सच्चाई सामने लाने की इस लड़ाई में जसवंत सिंह खालड़ा एक मानवाधिकार कार्यकर्ता बनकर व्यवस्था को चुनौती देते हैं। वहीं, अर्जुन रामपाल द्वारा निभाया गया CBI अधिकारी का किरदार कहानी में जांच और सस्पेंस का नया मोड़ जोड़ता है।

127 कट, वर्षों की देरी, नाम बदलने की मजबूरी और रिलीज के सिर्फ 48 घंटे बाद OTT से हटाए जाने की घटना ने ‘सतलुज’ को साल 2026 की सबसे चर्चित और विवादित फिल्मों में शामिल कर दिया है। अब सभी की नजर इस पर है कि फिल्म दोबारा कब और किन शर्तों के साथ दर्शकों के सामने लौटेगी।

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