नई दिल्ली: नई दिल्ली में आज (शनिवार) से 18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 का भव्य आगाज हो रहा है। इस वैश्विक महाकुंभ में शामिल होने के लिए दुनियाभर के दिग्गज नेता राजधानी पहुंच चुके हैं। इस बीच, सबसे बड़ा कूटनीतिक आकर्षण बने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज दोपहर करीब 12 बजे विशेष विमान से दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरे। पालम एयरपोर्ट पर लैंडिंग के बाद उनका जोरदार स्वागत किया गया, जहां केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। लगभग 7 साल के लंबे अंतराल के बाद शी जिनपिंग का यह भारत दौरा दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने और रिश्तों को नई पटरी पर लाने के लिहाज से बेहद ऐतिहासिक माना जा रहा है।
पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच आज होगी महा-बैठक
BRICS समिट से इतर आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक होनी है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं।
- लगातार तीसरा मौका: काज़ान और तियानजिन की मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा वर्ष होगा जब दोनों शीर्ष नेता आमने-सामने बैठकर चर्चा करेंगे।
- तनाव के बादल हटाने की कोशिश: दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तल्खी के बीच इस बैठक को द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
‘संबंधों को सुधारने का संकेत’: चीन के राजदूत का बड़ा बयान
शी जिनपिंग के भारत आने से कुछ घंटे पहले, भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग ने सोशल मीडिया पर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि बीजिंग और नई दिल्ली आपसी सहयोग और मतभेदों को सही तरीके से सुलझाने के लिए मिलकर काम करेंगे। राजदूत ने पोस्ट में लिखा, “चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन पर अमल करने, द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक स्तर पर संभालने और एक-दूसरे की सफलता में मददगार साझेदार बनने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा।”
इतिहास के पन्ने: अक्टूबर 2019 के बाद पहली बार भारत भूमि पर जिनपिंग
- पिछली यात्रा: शी जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत का दौरा किया था, जब वह तमिलनाडु के मामल्लापुरम में दूसरे भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे।
- गलवान घाटी का काला साया: उस दौरे के महज छह महीने बाद, साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने भारत-चीन संबंधों को दशकों के सबसे निचले स्तर पर ला दिया था। इसके बाद से दोनों देशों के व्यापारिक, राजनीतिक और रणनीतिक रिश्तों में भारी तनाव आ गया था।
शी-मोदी वार्ता का मुख्य एजेंडा: सीमा विवाद और कड़े मुद्दे
आज होने वाली बहुप्रतीक्षित बैठक में कई संवेदनशील और जटिल मुद्दों पर चर्चा होने की पूरी संभावना है:
- सीमा विवाद और गश्त: लद्दाख गतिरोध के बाद संबंधों को सामान्य बनाने और सीमा पर शांति बहाल करने के अगले कदमों पर मुख्य फोकस रहेगा।
- व्यापारिक अड़चनें: भारत को भारतीय व्यापारियों पर चीन द्वारा लगाए गए वीजा प्रतिबंधों और तकनीक-उपकरणों के निर्यात पर रोक की गहरी चिंता है।
- ब्रह्मपुत्र नदी पर विशाल बांध: तिब्बती पठार पर चीन द्वारा प्रस्तावित 137 अरब डॉलर की पनबिजली परियोजना (डैम) और उससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं पर भारत पारदर्शिता की मांग कर रहा है।
- रणनीतिक रुख: भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि “सीमा पर स्थिति ही द्विपक्षीय संबंधों की समग्र दिशा तय करेगी,” जबकि चीन सीमा मुद्दे को व्यापार से अलग रखने की बात कहता आया है।
अरुणाचल प्रदेश के तकसिंग में हालिया तनाव की खबरों के बीच हो रहा यह दौरा भारत के लिए कूटनीतिक मोर्चे पर बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।