समुद्री सुरक्षा से ग्लोबल साउथ की भूमिका तक, UNSC सुधार और BRICS के कामकाज में बदलाव पर पीएम मोदी ने रखे प्रस्ताव
नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान पर सहमति बन गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का विजन सभी देशों को साथ लेकर चलना है। उन्होंने BRICS की भूमिका को वैश्विक व्यवस्था में और प्रभावी बनाने तथा ग्लोबल साउथ की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि यदि भविष्य साझा है तो उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए। उन्होंने BRICS को आवाज से असर, विशेषाधिकार से साझेदारी और सीमित निर्णय प्रक्रिया से व्यापक भागीदारी की ओर ले जाने की जरूरत बताई।
‘BRICS किसी देश के खिलाफ नहीं’
दो दिवसीय BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि BRICS ने पिछले दो दशकों में वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समूह किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि सहयोग और साझेदारी को मजबूत करने के लिए काम करता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उसकी स्थिति पीछे है। उन्होंने कहा कि मौजूदा विशेषाधिकार आधारित व्यवस्था को साझेदारी के मंच में बदलने की जरूरत है, जहां हर देश की आवाज और भागीदारी सुनिश्चित हो।
ग्लोबल साउथ को ‘रूल फॉलोअर’ नहीं, ‘रूल मेकर’ बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ की भूमिका केवल नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उसे नियम तय करने की प्रक्रिया में भी भागीदार बनना होगा।उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थानों में लोगों का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और जवाबदेह होगी।
अगले 20 वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी एजेंडा
पीएम मोदी ने कहा कि BRICS ने 20 वर्षों में अपनी अलग पहचान बनाई है और अब संगठन को अगले दो दशकों के लिए एक महत्वाकांक्षी एजेंडे के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत BRICS के आंतरिक कामकाज में सुधार से होनी चाहिए। BRICS की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है, लेकिन इससे संगठन की संस्थागत निरंतरता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
‘ट्रोइका’ व्यवस्था से फैसलों पर होगी लगातार निगरानी
प्रधानमंत्री ने BRICS में निरंतरता बनाए रखने के लिए ट्रोइका व्यवस्था को और प्रभावी बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए विभिन्न पहलों और फैसलों पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें प्रत्येक फैसले से जुड़े नोडल पॉइंट, समय-सीमा और उसे लागू करने की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जा सके।
ग्लोबल गवर्नेंस के मौजूदा ढांचे में बदलाव जरूरी
पीएम मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए मौजूदा ढांचे को पिरामिड जैसा बताया। उनके मुताबिक, सत्ता और निर्णय लेने की ताकत अभी कुछ देशों और संस्थाओं के शीर्ष स्तर पर केंद्रित है, जबकि उन फैसलों से प्रभावित होने वाले कई देशों की भागीदारी सीमित है। उन्होंने कहा कि BRICS को ऐसी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में काम करना चाहिए, जिसमें सभी देशों को उचित प्रतिनिधित्व और निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी मिले।
ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के लिए 10 प्रस्तावों का सुझाव
प्रधानमंत्री ने BRICS देशों के सामने ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों को अगली BRICS समिट तक एक ‘BRICS Reform Roadmap’ का रूप दिया जा सकता है।
उन्होंने इस रोडमैप के लिए तीन प्रमुख आधार बताए—
- Representation (प्रतिनिधित्व)
- Responsiveness (जवाबदेही और त्वरित प्रतिक्रिया)
- Rule Making (नियम बनाने में भागीदारी)
पीएम मोदी ने कहा कि प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर UNSC में सुधार अब और नहीं टाला जा सकता। उन्होंने वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर और आर्थिक नीतियों को वर्तमान वैश्विक आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
‘जो देश वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देते हैं, उन्हें मिले उचित भूमिका’
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में उनकी भूमिका के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने वैश्विक आर्थिक निर्णय प्रक्रिया को अधिक संतुलित और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता बताई। पीएम मोदी ने कहा कि BRICS की ताकत उसकी विविधता, आपसी सम्मान और सहमति से आगे बढ़ने की क्षमता में है। अब इस एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलने का समय आ गया है।
‘अगर भविष्य साझा है तो उसे आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए’
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने BRICS की भूमिका को व्यापक साझेदारी से जोड़ते हुए कहा कि संगठन का संदेश स्पष्ट होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि वैश्विक व्यवस्था में जिन देशों और समाजों का भविष्य दांव पर है, उन्हें उस भविष्य से जुड़े फैसलों में भी बराबर की आवाज मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि BRICS को आने वाले वर्षों में मानवता-केंद्रित विकास, वैश्विक सहयोग और अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए प्रभावी मंच के रूप में आगे बढ़ना होगा।