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अमेरिका-ईरान शांति समझौता भारत के लिए भी खुशखबरी : युद्ध ख़त्म होने से होंगे 7 तात्कालिक और दूरगामी फायदे

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब साढ़े तीन महीने तक दुनिया को युद्ध की विभीषिका झेलने को मजबूर करने के बाद रविवार को अपने 80वें जन्मदिन पर ईरान के साथ शांति समझौते का ऐलान किया। ईरान और अमेरिका-इजरायल. . .

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब साढ़े तीन महीने तक दुनिया को युद्ध की विभीषिका झेलने को मजबूर करने के बाद रविवार को अपने 80वें जन्मदिन पर ईरान के साथ शांति समझौते का ऐलान किया। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच इस पीस डील से सबसे ज्यादा राहत की सांस लेने वाले देशों में भारत भी शामिल है।
अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया संकट दूर करने को लेकर जो करार किया है, उससे भारत को कम से कम सात तरह के फायदे होंगे। इनमें से कुछ का असर तो तत्काल दिखने की संभावना है और कुछ का असर लंबे समय तक रहने वाला है।
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो चुकी है।..मैं अब होर्मुज स्ट्रेट को बिना टॉल के खोलने की पूर्ण अनुमति देता हूं और साथ के साथ नाकेबंदी को तत्काल हटाने के लिए अमेरिकी नेवी को अधिकृत करता हूं। दुनिया के जहाजों अपनी इंजनों को चालू करो। तेल को बहने दो!
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति

तेल और गैस संकट से छुटकारा

ईरान-अमेरिका के बीच पीस डील को मूर्त रूप दिए जाने से पहले इसकी घोषणा मात्र से कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें घटनी शुरू हो गई हैं।
कच्चे तेलों की कीमतों में चार प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है और यह सोमवार (15 जून, 2026) सुबह को 84 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे आ चुका है।
भारत को इसका तात्कालिक फायदा मिलेगा और तेल का आयात का बिल घटना शुरू होगा, जिससे महंगाई में भी गिरावट देखने को मिलेगी।
भारत का ईरान से भी तेल और प्राकृतिक गैस का आयात फिर से शुरू हो जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी ने इसकी सप्लाई बुरी तरह से बाधित की है।

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा

पश्चिम एशिया या खाड़ी देशों में 9 से 10 लाख भारतीय रहते हैं। जिस तरह से अमेरिका-इजरायल और उनके सहयोगियों और ईरान और उसके सहयोगियों के बीच साढ़े तीन महीनों से लड़ाई चल रही थी, मिसाइलें दागी जा रही थीं, इससे यहां रहने वाले भारतीयों के जान-माल पर भी खतरा मंडरा रहा था।
दुर्भाग्य से कुछ भारतीय इसकी चपेट में आ भी चुके हैं। शांति और स्थिरता कायम होने से यहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

लागत घटेगी और सप्लाई चेन मजबूत

पश्चिम एशिया संकट की वजह से भारत को मजबूरन कच्चा तेल और एलएनजी-एलपीजी की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक उपाय ढूंढ़ने पड़ गए थे। भारत बड़ी मात्रा में रूस और वेनेजुएला से तेल मंगवाने लगा है। हालांकि ये तेल सस्ते तो हैं, लेकिन खाड़ी देशों के मुकाबले इनकी ढुलाई की लागत बहुत ज्यादा हो रही है। इसकी वजह से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक की लागत भी बढ़नी शुरू हो गई थी। साढ़े तीन महीने में पूरी सप्लाई चेन बिगड़ चुकी है, जो धीरे-धीरे फिर से पटरी पर आने की संभावना है।

समुद्री व्यापार में जोखिम से राहत

होर्मुज जलडमरुमध्य में एक तरफ अमेरिकी नाकेबंदी और दूसरी तरफ ईरान की सख्ती ने बीते महीनों में यहां से गुजरना बहुत ही जोखिम भरा बना दिया था।
भारतीय क्रू वाले कई जहाज निशाना बन चुके हैं, जिसमें कई भारतीयों की जान तक चली गई है। ओमान की खाड़ी में हाल ही में पलाऊ के झंडे वाले एक टैंकर पर अमेरिका ने हमला किया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। इस शांति समझौते से मर्चेंट नेवी में काम करने वाले भारतीयों की जान पर मंडरा रहा खतरा टलने की उम्मीद बढ़ी है।

खाड़ी देशों तक भारतीय चीजों का निर्यात

साढ़े तीन महीने से एक ओर भारत तेल और गैस संकट से जूझ रहा है, वहीं खाड़ी देशों में सामान भेजने वाले भारतीय निर्यातक भी परेशान हो चुके हैं। खाड़ी के कई देश खाने-पीने की चीजें, हरी-सब्जियां और अन्य जरूरत के सामानों के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर हैं, लेकिन उनकी भी सप्लाई चेन टूट चुकी है।
ओमान के रास्ते भारतीय सामान भेजने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन यह काम बहुत ही चुनौतीपूर्ण और खर्चीला साबित हो रहा है। खुद ईरान भी भारतीय कृषि उत्पादों, दवा, कपड़े और भारी मशीनों का बहुत बड़ा आयातक है। इस शांति समझौते से भारत के निर्यातकों और खाड़ी देशों के आयातकों को भी बड़ा फायदा होने जा रहा है।

चाबहार पोर्ट और INSTC के लिए अच्छी खबर

ईरान के चाबहार पोर्ट में भारत का बहुत बड़ा आर्थिक और रणनीतिक निवेश है। इसपर पहले से ही अमेरिकी पाबंदियों की वजह से मुश्किलों से काम चलता रहा है। ईरान-अमेरिका के बीच लड़ाई से अन्य पाबंदियों का भी संकट मंडरा रहा था, जो अब टलने की उम्मीद है और तेजी से काम आगे बढ़ने की संभावना है। इसी तरह से इंटरनेशनल नॉर्थ-साऊथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) पर युद्ध के चलते संकट मंडराने लगा था। लेकिन, अब इसपर भी तेजी से काम आगे बढ़ने की संभावना है। यह भारत से अफगानिस्तान, रूस और मध्य एशिया तक सीधा व्यापार का रास्ता सुलभ कराएगा।

जियोपॉलिटिक्स में बड़ी राहत

इस युद्ध ने भारत और अमेरिका के बीच राजनयिक तनाव पैदा किए हैं। हाल में जिस तरह से अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविक मारे गए हैं,उससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव पैदा हुआ है। इसके अलावा भारत को सभी खाड़ी देशों से अपने कूटनीतिक संबंधों को भी सामान्य बनाए रखने के लिए बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है और कई बार मुश्किल परीक्षा की घड़ी का भी मुकाबला किया है। एक बार शांति समझौते पर मुहर लग जाने के बाद इस अप्रत्याशित संकट से भारत को छुटकारा मिल सकता है, जो बेवजह ही हमारे सामने खड़ा हो गया था।

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