कोलकाता/सुंदरबन। पश्चिम बंगाल में वर्ष 2020 के विनाशकारी चक्रवात अम्फान के राहत कार्यों और नदी तटबंधों के पुनर्निर्माण को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट सामने आने के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट में तत्कालीन राज्य सरकार पर राहत और पुनर्निर्माण के लिए केंद्र से मांगी गई राशि में लगभग ₹32,000 करोड़ की अतिरिक्त मांग दिखाने का दावा किया गया है। इसके अलावा राहत राशि के वितरण, आवास अनुदान, तटबंध निर्माण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर भी कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। 25 जुलाई को जारी CAG रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए इसकी निष्पक्षता पर संदेह जताया है।
CAG का दावा- केंद्र से मांगी गई राशि में ₹32,000 करोड़ का अतिरिक्त आकलन
रिपोर्ट के अनुसार, अम्फान के बाद सुंदरबन और तटीय क्षेत्रों में हुए नुकसान का आकलन करते समय बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से नदी तटबंधों और मकानों की क्षति को वास्तविकता से कहीं अधिक दर्शाया गया। CAG का दावा है कि केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मांगने के दौरान लगभग ₹32,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि का दावा किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के वित्तीय आकलन में पारदर्शिता और वास्तविक क्षति के बीच बड़ा अंतर पाया गया।
₹125.07 करोड़ के लेन-देन पर उठे सवाल
CAG रिपोर्ट में राहत राशि के वितरण को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 1,44,175 बैंक खातों में कुल ₹125.07 करोड़ के लेन-देन में विसंगतियां पाई गईं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राहत और मुआवजे की राशि कई मामलों में वास्तविक प्रभावित लोगों तक पहुंचने के बजाय प्रभावशाली व्यक्तियों, उनके परिजनों और कथित रूप से राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के खातों में चली गई।
डुप्लिकेट लाभार्थियों को ₹18.07 करोड़ का आवास अनुदान
रिपोर्ट के अनुसार, मकान निर्माण और तटबंध पुनर्वास के लिए दिए जाने वाले अनुदान में भी गड़बड़ियां सामने आईं। CAG का कहना है कि 9,226 डुप्लिकेट या फर्जी लाभार्थियों के खातों में एक से अधिक बार भुगतान किया गया, जिससे ₹18.07 करोड़ की अनियमितता हुई। रिपोर्ट में लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया को भी अपर्याप्त बताया गया है।
बुलबुल चक्रवात की पुरानी सूची से बांटी गई राहत राशि
CAG ने यह भी दावा किया है कि अम्फान प्रभावितों के लिए स्वीकृत राहत राशि का एक हिस्सा वर्ष 2019 के बुलबुल चक्रवात की पुरानी लाभार्थी सूची के आधार पर वितरित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार 5,627 लोगों को पुरानी सूची के आधार पर भुगतान किया गया, जिससे ₹2.82 करोड़ की अनियमितता हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे वास्तविक प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
तटबंध निर्माण की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल
रिपोर्ट में सुंदरबन क्षेत्र में बनाए गए नदी तटबंधों की गुणवत्ता को लेकर भी कई तकनीकी खामियों का उल्लेख किया गया है। CAG के अनुसार कई स्थानों पर कंक्रीट और मिट्टी के तटबंधों की ऊंचाई तथा चौड़ाई स्वीकृत परियोजना (DPR) के मानकों से कम पाई गई। इससे भविष्य में बाढ़ और ज्वार के दौरान तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ सकता है।
निर्माण सामग्री में कथित लापरवाही
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई संवेदनशील नदी किनारों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप बोल्डर पिचिंग नहीं की गई। आरोप है कि निर्माण सामग्री की बचत के लिए पत्थरों की अत्यंत पतली परत बिछाई गई, जिससे तटबंधों की मजबूती प्रभावित हुई और उनके टूटने का जोखिम बढ़ गया।
धन खर्च होने के बाद भी अधूरे रहे कई परियोजनाएं
CAG के मुताबिक सुंदरबन के गोसाबा, सागर, बसंती, कुलतली और कैनिंग जैसे सबसे संवेदनशील इलाकों में नदी तटबंधों के पुनर्निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण वित्तीय आवंटन खर्च होने के बाद भी अधूरे रहे। रिपोर्ट में परियोजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन प्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली पर भी टिप्पणी
रिपोर्ट में कहा गया है कि राहत राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजने की प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त सत्यापन और निगरानी व्यवस्था नहीं थी। CAG का मानना है कि मजबूत जांच तंत्र के अभाव में अनियमितताओं की संभावना बढ़ गई।
पर्यावरणीय नुकसान का भी उल्लेख
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर तटबंध और सड़क निर्माण के दौरान आवश्यक अनुमति के बिना मैंग्रोव वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया गया। इससे सुंदरबन के प्राकृतिक तटीय सुरक्षा तंत्र और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
प्रभावित लोगों ने सुनाई अपनी पीड़ा
रिपोर्ट सामने आने के बाद सुंदरबन के कई प्रभावित परिवारों ने राहत वितरण को लेकर नाराजगी जताई। एक महिला ने कहा कि अम्फान में उनका घर क्षतिग्रस्त हो गया था, लेकिन उन्हें एक तिरपाल तक नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि कठिन परिस्थितियों में परिवार के साथ जीवन बिताना पड़ा, जबकि राहत की पर्याप्त मदद नहीं मिली।
प्रभावित लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया
CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि वह इस रिपोर्ट पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि उस समय संबंधित विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री इस विषय पर बेहतर जानकारी दे सकते हैं। वहीं तृणमूल नेता कुणाल घोष ने कहा कि यह भी देखा जाना चाहिए कि रिपोर्ट में तथ्यों का चयन किस आधार पर किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कहीं रिपोर्ट में कुछ विभागों को चुनकर शामिल या बाहर तो नहीं रखा गया।
भाजपा ने की कार्रवाई की मांग
राज्य भाजपा ने CAG रिपोर्ट को गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता देवजीत सरकार ने आरोप लगाया कि केंद्र से भेजी गई राहत राशि का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
रिपोर्ट से तेज हुई राजनीतिक बहस
CAG की रिपोर्ट सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल में अम्फान राहत कार्यों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस रिपोर्ट की विश्वसनीयता और चयनित तथ्यों पर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।