काठमांडू। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने तबाही की ऐसी तस्वीर सामने ला दी है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। मृतकों की संख्या 962 तक पहुंच गई है, जबकि 4 हजार से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान के बीच नुवाकोट जिले से सामने आया एक दृश्य इस त्रासदी की भयावहता को बयां कर रहा है। बाढ़ और मलबे में दबे एक घर से कुल 23 शव बरामद किए गए हैं। इनमें 21 शव घर के एक कमरे से मिले, जबकि दो शव बाहर से बरामद हुए।
यह घटना नुवाकोट के विदुर नगरपालिका क्षेत्र के बेत्रावती गांव की है, जहां भोटेकोशी नदी की बाढ़ का मलबा एक तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले गया था। पुलिस को आशंका है कि मृतकों में तीर्थयात्री शामिल हो सकते हैं।
मलबे के बीच अपनों की तलाश, कमरे में मिले 21 शव
राहत और बचाव दल जब मलबे में दबे मकान की तलाशी ले रहा था, तब एक कमरे से 21 शव बरामद हुए। घर के बाहर से भी दो शव मिले। बरामद लोगों की अभी पहचान नहीं हो सकी है।
पुलिस के मुताबिक, 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी का पानी बढ़ने के बाद बाढ़ त्रिशूली नदी तक पहुंच गई थी। तेज बहाव और मलबे ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई। आशंका है कि बाढ़ से बचने के लिए कई लोग मकान की ऊपरी मंजिल की ओर भागे होंगे, लेकिन पानी और मलबे की चपेट में आने से उनकी जान चली गई।
मां की गोद में मिली मासूम, बचाने की आखिरी कोशिश भी नाकाम
इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर तब सामने आई, जब बचावकर्मियों को एक महिला का शव छोटी बच्ची को अपनी गोद में कसकर पकड़े हुए मिला। शुरुआती आशंका है कि महिला और बच्ची मां-बेटी हो सकती हैं।
यह दृश्य उस भयावह पल की कल्पना करने को मजबूर करता है, जब बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा होगा और एक मां ने अपनी बच्ची को आखिरी क्षण तक बचाने की कोशिश की होगी। मलबे में मिले बैग और सामान से भी संकेत मिलता है कि मृतकों में यात्रा पर निकले लोग हो सकते हैं।
तीर्थयात्रियों के होने की आशंका, पहचान का इंतजार
नुवाकोट के पुलिस अधीक्षक विपिन रेग्मी के अनुसार, एक शव विदेशी नागरिक का प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि शवों के साथ बैग भी मिले हैं और संभावना है कि इनमें गोसाईंकुंड की ओर जाने वाले तीर्थयात्री शामिल हों।
पुलिस और प्रशासन अब बरामद शवों की पहचान करने में जुटे हैं। परिवारों के लिए यह इंतजार बेहद मुश्किल है, क्योंकि अब भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं।
23 शव बरामद, अस्पताल भेजे गए 8 शव
बचाव दल ने मकान से बरामद 23 शवों में से आठ को त्रिशूली अस्पताल भेज दिया है। बाकी शवों को फिलहाल घर की छत पर रखा गया है और बाद में अस्पताल ले जाने की तैयारी है।
राहतकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे के बीच जीवित लोगों की तलाश के साथ-साथ मृतकों को सुरक्षित बाहर निकालने और उनकी पहचान सुनिश्चित करने की है।
350 छात्रों समेत हजारों लोगों की तलाश जारी
नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में अब भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। रसुवा जिले के उत्तरगया गांव में करीब 350 छात्रों के लापता होने की खबर है। उनके लिए परिजन लगातार उम्मीद लगाए हुए हैं और बचाव दल उनकी तलाश में जुटे हैं। वहीं, त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में भी छठे दिन रेस्क्यू अभियान आगे नहीं बढ़ सका। यहां करीब 40-42 इंजीनियरों के काम करने की जानकारी है, जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इसके अलावा त्रिशूली-3B हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 118 कर्मचारियों से भी संपर्क नहीं हो सका है।
राहत से ज्यादा जरूरी अब हर जिंदगी की तलाश
नेपाल की इस त्रासदी में आंकड़ों के पीछे हजारों परिवारों का दर्द छिपा है। किसी का बच्चा लापता है, किसी का माता-पिता से संपर्क नहीं हो रहा, तो कोई अपनों की पहचान के लिए अस्पतालों के चक्कर लगा रहा है।
ऐसे में राहत और बचाव दलों के लिए हर गुजरता घंटा बेहद महत्वपूर्ण है। मलबे के नीचे जिंदगी की एक छोटी-सी उम्मीद भी किसी परिवार के लिए पूरी दुनिया हो सकती है।