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आईपीएल 2026 में कप्तानों पर गिरेगी गाज? पंत, रहाणे और अक्षर पर लटक रही तलवार, टीम मालिक बेहद नाराज!

डेस्क। आईपीएल 2026 में खराब प्रदर्शन के बाद ऋषभ पंत, अजिंक्य रहाणे और अक्षर पटेल की कप्तानी पर खतरा मंडरा रहा है। लखनऊ सुपर जायंट्स प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है, जबकि KKR और दिल्ली कैपिटल्स की हालत. . .

डेस्क। आईपीएल 2026 में खराब प्रदर्शन के बाद ऋषभ पंत, अजिंक्य रहाणे और अक्षर पटेल की कप्तानी पर खतरा मंडरा रहा है। लखनऊ सुपर जायंट्स प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है, जबकि KKR और दिल्ली कैपिटल्स की हालत भी बेहद खराब है।

तीनों कप्तानों सवालों के घेरे में

रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रेंचाइजी मालिक और मैनेजमेंट इन कप्तानों के भविष्य पर बड़ा फैसला ले सकते हैं। बल्लेबाजी, रणनीति और टीम चयन में लगातार हुई गलतियों ने इन तीनों कप्तानों को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
IPL सिर्फ चौके-छक्कों और ग्लैमर का टूर्नामेंट नहीं है।यहां एक खराब सीजन सिर्फ टीम को नहीं डुबोता, बल्कि कप्तानों का करियर भी हिला देता है। IPL 2026 अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है और इसी के साथ तीन बड़े कप्तानों की कुर्सी बुरी तरह हिलती दिखाई दे रही है – ऋषभ पंत, अजिंक्य रहाणे और अक्षर पटेल। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन तीनों कप्तानों का भविष्य अब उनकी फ्रेंचाइजी के हाथ में नहीं, बल्कि आने वाले ‘रिव्यू मीटिंग्स’ में तय होगा. वजह साफ है- टीमों का खराब प्रदर्शन, कमजोर रणनीति और कप्तानी में वो धार नहीं दिखी जिसकी उम्मीद थी।

लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान ऋषभ पंत

अगर किसी कप्तान पर सबसे ज्यादा दबाव है तो वो हैं लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान ऋषभ पंत। LSG प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है और लगातार दूसरे सीजन टीम का फ्लॉप होना फ्रेंचाइजी को बेहद परेशान कर रहा है। पंत पर टीम ने करोड़ों रुपये खर्च किए थे। लेकिन मैदान पर उनका प्रदर्शन उस भरोसे के आसपास भी नहीं दिखा। 11 मैचों में सिर्फ 251 रन और स्ट्राइक रेट 138.67… आधुनिक T20 क्रिकेट में ये आंकड़े किसी स्टार बल्लेबाज के नहीं लगते।
सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि पंत पूरे सीजन दबाव में दिखे. कभी ओपनिंग ऑर्डर बदला, कभी खुद नीचे उतरे, कभी बल्लेबाजी टेम्पो पकड़ ही नहीं पाए। उनकी बॉडी लैंग्वेज तक कई बार परेशान नजर आई। टीम चयन पर भी सवाल उठे। अर्शिन कुलकर्णी जैसे युवा बल्लेबाज को ओपनिंग में भेजना, हिम्मत सिंह को लगातार मौके देना और बल्लेबाजी क्रम में बार-बार प्रयोग करना LSG फैन्स को समझ नहीं आया। सवाल ये भी है कि फैसले पंत ले रहे थे या कोचिंग स्टाफ?
फ्रेंचाइजी मालिक संजीव गोयनका का स्वभाव क्रिकेट जगत में किसी से छिपा नहीं है। वो बड़े खिलाड़ियों पर बड़ा पैसा खर्च करते हैं, लेकिन बदले में नतीजे भी चाहते हैं। ऐसे में लगातार दूसरी असफलता के बाद पंत की कप्तानी बचाना आसान नहीं होगा।

अक्षर पटेल असर नहीं छोड़ पाए

अक्षर पटेल: कप्तान कम, सपोर्टिंग रोल ज्यादा? दिल्ली कैपिटल्स ने इस सीजन अक्षर पटेल पर भरोसा जताया था, लेकिन कप्तानी के मोर्चे पर वो असर नहीं छोड़ पाए। बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी- दोनों में अक्षर का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा। 9 पारियों में सिर्फ 100 रन, वो भी एक पारी में 56 रन आने के बाद बाकी आठ पारियों में कुल 44 रन. स्ट्राइक रेट भी सिर्फ 112। T20 क्रिकेट में ये आंकड़े किसी टॉप-5 बल्लेबाज के लिए बेहद कमजोर माने जाते हैं।
गेंदबाजी में भी अक्षर ने खुद का पूरा इस्तेमाल नहीं किया। 12 मैचों में सिर्फ 36 ओवर फेंकना (10 विकेट) इस बात का संकेत है कि या तो कप्तान के तौर पर वो खुद को लेकर आश्वस्त नहीं थे या टीम रणनीति में स्पष्टता नहीं थी। दिल्ली की टीम मैनेजमेंट पर भी सवाल उठ रहे हैं। अभिषेक पोरेल जैसे आक्रामक बल्लेबाज का सही इस्तेमाल नहीं हुआ। युवा खिलाड़ियों को बिना तैयारी बड़े मंच पर उतार दिया गया। कई फैसले ऐसे लगे जैसे टीम खुद नहीं समझ पा रही कि उसे करना क्या है। रिपोर्ट्स कहती हैं कि अगले सीजन दिल्ली की क्रिकेट ऑपरेशंस की कमान JSW ग्रुप के हाथ में होगी। ऐसे में अक्षर की कप्तानी पर दोबारा विचार होना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि खिलाड़ी के तौर पर उनकी वैल्यू अभी भी काफी है, लेकिन कप्तान के रूप में उन्होंने कोई मजबूत छाप नहीं छोड़ी।

रहाणे का अनुभव भी नहीं आया काम

कोलकाता नाइट राइडर्स ने अजिंक्य रहाणे को कप्तान बनाकर अनुभव पर दांव खेला था। लेकिन ये दांव शायद टीम पर भारी पड़ गया. रहाणे का अनुभव भी नहीं आया काम।
कोलकाता नाइट राइडर्स ने अजिंक्य रहाणे को कप्तान बनाकर अनुभव पर दांव खेला था. लेकिन ये दांव शायद टीम पर भारी पड़ गया।
सबसे बड़ी समस्या ये रही कि रहाणे और अंगकृष रघुवंशी दोनों साथ खेलने पर टीम का टॉप ऑर्डर धीमा पड़ गया। दोनों ने मिलकर 11 मैचों में सिर्फ 25 छक्के लगाए यानी हर मैच में औसतन दो छक्के भी नहीं। KKR की बल्लेबाजी कई बार शुरुआत में ही ‘फंस’ जाती थी और मिडिल ऑर्डर पर जरूरत से ज्यादा दबाव आ जाता था। टीम मैनेजमेंट ने लगातार इस कॉम्बिनेशन को जारी रखा, जिसका नुकसान पूरी टीम ने भुगता।
37 साल के रहाणे के लिए अब सवाल सिर्फ कप्तानी का नहीं, बल्कि IPL भविष्य का भी बन गया है। मिनी ऑक्शन में शायद ही कोई टीम उन्हें कप्तान या मुख्य बल्लेबाज के तौर पर देखे।

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