नई दिल्ली। भारत ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में एक ऐसी तकनीक विकसित करने का दावा किया है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग की दिशा बदल सकती है। बेंगलुरु स्थित डीप-टेक स्टार्टअप VIMAG Labs ने एक ऐसी Virtual Magnet Motor विकसित करने का दावा किया है, जिसमें पारंपरिक रेयर-अर्थ मैग्नेट्स की आवश्यकता नहीं होती। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल साबित होती है, तो भारत न केवल चीन पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है, बल्कि दुनिया के EV बाजार में भी एक महत्वपूर्ण तकनीकी आपूर्तिकर्ता बन सकता है।
कंपनी का कहना है कि यह मोटर इलेक्ट्रॉनिक रूप से उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र (Electronic Magnetic Field) के आधार पर काम करती है और इसका नियंत्रण पूरी तरह सॉफ्टवेयर से किया जा सकता है। यही वजह है कि इसे EV उद्योग के लिए संभावित “गेम चेंजर” माना जा रहा है।
क्या है Virtual Magnet Motor?
आज दुनिया के अधिकांश इलेक्ट्रिक वाहनों में Permanent Magnet Synchronous Motor (PMSM) का उपयोग किया जाता है। इस मोटर में नियोडिमियम, आयरन और बोरोन जैसे रेयर-अर्थ मैग्नेट लगाए जाते हैं, जो मोटर को उच्च क्षमता और बेहतर दक्षता प्रदान करते हैं। आमतौर पर एक इलेक्ट्रिक वाहन में 1 से 3 किलोग्राम तक रेयर-अर्थ मैग्नेट का उपयोग होता है। लेकिन VIMAG Labs की नई तकनीक इस पूरी अवधारणा को बदलने का दावा करती ह। कंपनी के अनुसार, उनकी Virtual Magnet Motor में किसी भी प्रकार के फिजिकल रेयर-अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसकी जगह इलेक्ट्रॉनिक तकनीक के जरिए ऐसा चुंबकीय क्षेत्र तैयार किया जाता है, जो पारंपरिक मैग्नेट जैसा ही कार्य करता है। इसी कारण इसे “Virtual Magnet” नाम दिया गया है।
सॉफ्टवेयर से नियंत्रित होगी मोटर की ताकत
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसका Software-Controlled Magnetic Field है। जहां पारंपरिक मोटरों में मैग्नेट की शक्ति स्थायी होती है, वहीं Virtual Magnet Motor में आवश्यकता के अनुसार चुंबकीय क्षेत्र को सॉफ्टवेयर के जरिए बढ़ाया या घटाया जा सकता है। इससे केवल मोटर चलाना ही नहीं बल्कि उसकी स्पीड, टॉर्क, ऊर्जा खपत और प्रदर्शन को भी अधिक सटीक तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?
दुनिया भर में EV उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती रेयर-अर्थ मैग्नेट्स की उपलब्धता है। ये मैग्नेट अत्यधिक शक्तिशाली होते हैं और छोटे आकार में अधिक क्षमता देने के कारण इलेक्ट्रिक मोटरों के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। लेकिन इनकी सप्लाई का अधिकांश हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। यदि किसी कारण से चीन इनकी आपूर्ति सीमित कर देता है या निर्यात लाइसेंस रोक देता है, तो पूरी वैश्विक EV इंडस्ट्री प्रभावित हो सकती है। ऐसे में यदि Virtual Magnet Motor सफल होती है तो यह इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।
रेयर-अर्थ मैग्नेट्स पर चीन का दबदबा
वर्तमान समय में दुनिया के लगभग 90 से 95 प्रतिशत रेयर-अर्थ मिनरल्स की प्रोसेसिंग और उत्पादन चीन के पास है। हालांकि कई देशों में इन खनिजों के भंडार मौजूद हैं, लेकिन उनकी रिफाइनिंग प्रक्रिया अत्यंत महंगी और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक मानी जाती है। इसी कारण अधिकांश देशों ने इस क्षेत्र में सीमित निवेश किया, जबकि चीन ने लगातार निवेश कर इस पूरे बाजार पर लगभग एकाधिकार स्थापित कर लिया। भारत भी अपनी जरूरत के लगभग 90 प्रतिशत रेयर-अर्थ मैग्नेट चीन से आयात करता है, जिसकी मात्रा करीब 53 हजार मीट्रिक टन बताई जाती है।
भारत की आत्मनिर्भरता को मिलेगा बड़ा सहारा
यदि Virtual Magnet Motor बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से सफल होती है तो भारत की EV इंडस्ट्री को चीन से आने वाले रेयर-अर्थ मैग्नेट्स पर काफी कम निर्भर रहना पड़ेगा। इसका सीधा असर उत्पादन लागत, सप्लाई चेन की स्थिरता और घरेलू निर्माण क्षमता पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण क्षमता अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सकती है।
EV बाजार के लिए क्यों है गेम चेंजर?
भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार आने वाले वर्षों में तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान है कि अगले छह वर्षों में भारतीय EV बाजार लगभग 12 गुना तक विस्तार कर सकता है और 2032 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या करीब 3 करोड़ तक पहुंच सकती है। यदि इस दौरान देश को घरेलू स्तर पर ऐसी मोटर तकनीक उपलब्ध हो जाती है, तो इससे वाहन निर्माताओं की लागत नियंत्रित रहेगी और विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी।
सिर्फ EV ही नहीं, कई उद्योगों को मिलेगा फायदा
Virtual Magnet Motor का उपयोग केवल इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। यह तकनीक भविष्य में कई अन्य क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित हो सकती है, जिनमें इंडस्ट्रियल मशीनरी , रोबोटिक्स, डिफेंस टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी सिस्टम्स, हाई-एफिशिएंसी इंडस्ट्रियल मोटर्स शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भी रेयर-अर्थ मैग्नेट्स पर निर्भरता कम होने की संभावना है।
कितनी आगे पहुंची है यह तकनीक?
VIMAG Labs के अनुसार इस तकनीक को विकसित करने में 87 हजार से अधिक इंजीनियरिंग घंटे लगे हैं। फिलहाल मोटर का परीक्षण टेस्ट वाहनों में किया जा रहा है और नियामकीय मंजूरी (Regulatory Approval) तथा आवश्यक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया जारी है। कंपनी का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक 1,000 से 10,000 यूनिट्स का पायलट बैच लॉन्च करना है। इसके बाद अगले वर्ष बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने की योजना है। शुरुआत में इस मोटर का उपयोग टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर इलेक्ट्रिक वाहनों में किया जाएगा।
कोरोना संकट से निकला करोड़ों का आइडिया
इस तकनीक के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। कोविड-19 महामारी के दौरान वर्ष 2020 में कंपनी के प्रोटोटाइप मोटरों के लिए मंगाए गए परमानेंट मैग्नेट्स की एक बड़ी खेप शंघाई पोर्ट पर लॉकडाउन के कारण फंस गई थी। इस घटना से कंपनी की उत्पादन प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई और भारी आर्थिक नुकसान हुआ। यहीं से कंपनी को यह एहसास हुआ कि किसी एक देश पर पूरी सप्लाई चेन की निर्भरता भविष्य के लिए बड़ा जोखिम है। इसके बाद कंपनी ने ऐसा विकल्प विकसित करने का निर्णय लिया जो पूरी तरह रेयर-अर्थ मैग्नेट्स पर निर्भरता समाप्त कर सके। लगभग छह वर्षों की रिसर्च और लगातार इंजीनियरिंग प्रयासों के बाद Virtual Magnet Motor तकनीक विकसित करने का दावा किया गया।
क्या सचमुच बदल जाएगी EV इंडस्ट्री?
हालांकि कंपनी ने इस तकनीक को क्रांतिकारी बताया है, लेकिन अभी इसका बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग शुरू नहीं हुआ है। मोटर परीक्षण, नियामकीय मंजूरी और वास्तविक प्रदर्शन के परिणाम आने बाकी हैं। यदि यह तकनीक अपने दावों के अनुरूप सफल रहती है, तो भारत न केवल चीन पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा, बल्कि वैश्विक EV उद्योग को एक नया विकल्प भी उपलब्ध करा सकता है।
तकनीक नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन
Virtual Magnet Motor केवल एक नई मोटर तकनीक नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक संभावित बड़ा कदम मानी जा रही है। यदि इसके परीक्षण और व्यावसायिक उत्पादन सफल रहते हैं, तो भारत इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में केवल एक बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि दुनिया को नई तकनीक देने वाला देश भी बन सकता है।