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लद्दाख से दिल्ली तक संघर्ष की मिसाल : कौन हैं अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ? जानिए ‘रियल लाइफ रैंचो’ की पूरी कहानी, उपलब्धियां, संघर्ष और प्रसिद्धि का सफर

नई दिल्ली: शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के अधिकारों की आवाज़ बुलंद करने वाले सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। इस समय वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके आंदोलन को देशभर. . .

नई दिल्ली: शिक्षा सुधार, पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के अधिकारों की आवाज़ बुलंद करने वाले सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं। इस समय वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके आंदोलन को देशभर के छात्रों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन मिल रहा है। हाल के दिनों में उनकी सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ी है और इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने भी केंद्र एवं दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।

आखिर कौन हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक भारत के प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक, पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनका जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के अलची गांव में हुआ था। बचपन में उनके गांव में स्कूल नहीं था, इसलिए शुरुआती शिक्षा उनकी मां ने घर पर ही मातृभाषा में दी। जब उन्हें श्रीनगर के स्कूल भेजा गया तो भाषा की समस्या के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव ने उनके मन में शिक्षा व्यवस्था बदलने का संकल्प पैदा किया। बाद में उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

संघर्ष से शुरू हुआ बदलाव का सफर

इंजीनियर बनने के बाद उन्होंने बड़ी नौकरी करने के बजाय लद्दाख लौटकर वहां की शिक्षा व्यवस्था सुधारने का निर्णय लिया। उन्होंने 1988 में SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की। इसका उद्देश्य ऐसी शिक्षा देना था जो बच्चों को केवल डिग्री नहीं बल्कि जीवन जीने की वास्तविक कला भी सिखाए। SECMOL आज दुनिया भर में वैकल्पिक शिक्षा मॉडल के रूप में जाना जाता है। यहां सौर ऊर्जा, स्थानीय संसाधनों और व्यावहारिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाता है।

‘3 Idiots’ के असली प्रेरणास्रोत

सोनम वांगचुक को देशभर में सबसे ज्यादा पहचान फिल्म ‘3 Idiots’ के बाद मिली। फिल्म के लोकप्रिय किरदार ‘फुंसुख वांगड़ू’ को तैयार करने में उनकी जिंदगी से प्रेरणा ली गई थी। हालांकि फिल्म पूरी तरह उनकी जीवनी नहीं थी, लेकिन नवाचार, शिक्षा सुधार और वैज्ञानिक सोच वाले कई पहलू उनके जीवन से प्रभावित बताए जाते हैं।

दुनिया को दिया ‘आइस स्तूप’ जैसा अनोखा आविष्कार

सोनम वांगचुक का सबसे बड़ा वैज्ञानिक योगदान आइस स्तूप (Ice Stupa) है।

इसकी खासियत

  • सर्दियों में अतिरिक्त पानी को बर्फ के विशाल शंकु के रूप में जमा किया जाता है।
  • गर्मियों में यही बर्फ धीरे-धीरे पिघलती है।
  • इससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलता है।
  • जल संकट से जूझ रहे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए यह बेहद उपयोगी तकनीक साबित हुई।

इस नवाचार की दुनिया भर में सराहना हुई।

शिक्षा सुधार में ऐतिहासिक योगदान

1994 में उन्होंने ऑपरेशन न्यू होप (Operation New Hope) शुरू किया।

इस अभियान का उद्देश्य था—

  • सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाना
  • स्थानीय भाषा में शिक्षा को बढ़ावा देना
  • बच्चों की रचनात्मक क्षमता विकसित करना
  • परीक्षा आधारित शिक्षा के बजाय व्यावहारिक शिक्षा पर जोर देना

इस अभियान से लद्दाख के हजारों छात्रों को फायदा मिला।

सोनम वांगचुक की प्रमुख उपलब्धियां

प्रमुख सम्मान

  • रमन मैग्सेसे पुरस्कार (2018)
  • Rolex Awards for Enterprise (2016)
  • Global Award for Sustainable Architecture (2017)
  • Ashoka Fellowship
  • Real Heroes Award

इन पुरस्कारों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

पर्यावरण बचाने की मुहिम

सोनम वांगचुक लगातार हिमालय और लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण की आवाज उठाते रहे हैं।

उनका कहना है कि—

  • अंधाधुंध विकास हिमालय को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • स्थानीय लोगों को प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार मिलना चाहिए।
  • जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर हिमालयी क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

इसी वजह से वे वर्षों से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों का नेतृत्व कर रहे हैं।

पहले भी कर चुके हैं लंबे आंदोलन

यह पहली बार नहीं है जब सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने इससे पहले भी लद्दाख के अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर लंबी भूख हड़ताल की थी। 2024 में उन्होंने 21 दिन का “क्लाइमेट फास्ट” भी किया था। बाद के वर्षों में लद्दाख से जुड़े आंदोलनों के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया और वे लंबे समय तक हिरासत में रहे।

इस बार क्यों बैठे हैं अनशन पर?

वर्तमान में सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। मौजूदा आंदोलन में वे मुख्य रूप से परीक्षा प्रणाली में सुधार और हालिया परीक्षा अनियमितताओं के मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं। उनके आंदोलन के दौरान उनकी सेहत लगातार गिरने की खबरें सामने आई हैं। डॉक्टरों के अनुसार उनका वजन काफी कम हो चुका है और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहा है, जबकि उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है।

क्यों हैं इतने प्रसिद्ध?

सोनम वांगचुक केवल एक वैज्ञानिक या शिक्षक नहीं हैं।

उनकी लोकप्रियता की वजहें हैं—

  • शिक्षा सुधार के लिए समर्पण
  • पर्यावरण संरक्षण की मुहिम
  • आइस स्तूप जैसी वैश्विक नवाचार तकनीक
  • लद्दाख के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष
  • युवाओं को विज्ञान और नवाचार के लिए प्रेरित करना
  • सादगीपूर्ण जीवन और जमीनी नेतृत्व

सोनम वांगचुक का जीवन एक उदाहरण

सोनम वांगचुक का जीवन इस बात का उदाहरण है कि एक व्यक्ति अपने विचार, विज्ञान और सामाजिक प्रतिबद्धता के दम पर पूरे समाज में बदलाव ला सकता है। गांव के एक बच्चे से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित नवाचारक बनने तक का उनका सफर संघर्ष, प्रयोग और समाज सेवा से भरा रहा है। आज वे केवल लद्दाख की आवाज नहीं, बल्कि शिक्षा, पर्यावरण और जनहित के मुद्दों पर देश की प्रमुख आवाजों में गिने जाते हैं। वर्तमान भूख हड़ताल ने एक बार फिर उन्हें राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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