नई दिल्ली। नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने आज सुबह जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया. पुलिस की इस कार्रवाई के तुरंत बाद वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने अस्पताल के डॉक्टरों को बेहद सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उनके परिवार, डॉक्टरों और स्वयं उनकी लिखित अनुमति के बिना सोनम वांगचुक को मुंह के जरिए या नसों के जरिए कोई भी दवा या ड्रिप न दी जाए. गीतांजलि आंग्मो ने डॉक्टरों से बात करते हुए संविधान के बुनियादी अधिकारों का हवाला दिया. मेडिकल एथिक्स के तहत, यदि कोई मरीज सचेत है तो उसकी सहमति के बिना उसके शरीर में कोई भी बाहरी तत्व या दवा प्रविष्ट कराना तकनीकी रूप से उसके व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है.
कोर्ट का ‘लाइफ इज प्रीशियस’ स्टैंड और पुलिसिया कार्रवाई पर उठते सवाल
दूसरी तरफ, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा था कि “हर नागरिक का जीवन अनमोल है और इसे बचाने के लिए सरकारी अधिकारियों को हर संभव प्रयास करने चाहिए.” कोर्ट के इसी रुख का उपयोग कर पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया है. अब डॉक्टरों के सामने कानूनी और एथिकल असमंजस है कि वे वांगचुक की इच्छा के विरुद्ध उन्हें ग्लूकोज या न्यूट्रिएंट्स कैसे दें. दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट के उस निर्देश और मेडिकल बोर्ड की सलाह के अनुपालन में उठाया गया है, जिसमें अनशनकारी के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए ‘आवश्यक चिकित्सा देखभाल’ सुनिश्चित करने की बात कही गई थी. वहीं, वांगचुक के समर्थकों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने की पुलिसिया कार्रवाई करार दिया है.
डॉक्टरों ने दी ‘रिफीडिंग सिंड्रोम’ की चेतावनी
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के डॉक्टरों के अनुसार, 20 दिनों तक केवल पानी पर रहने के कारण वांगचुक का ब्लड शुगर लेवल 70 mg/dL तक गिर चुका है. ऐसी स्थिति में अचानक अनियंत्रित तरीके से आईवी फ्लूइड (IV Fluid) देने से ‘रिफीडिंग सिंड्रोम’ का खतरा हो सकता है, जो मरीज के दिल और किडनी के लिए जानलेवा साबित होता है. इसलिए उनकी पत्नी का यह कहना सही है कि उनके पुराने डॉक्टरों की सलाह के बिना कोई नया ट्रीटमेंट शुरू न किया जाए.
वांगचुक के समर्थन में उतरा पूरा विपक्ष
शनिवार सुबह जैसे ही वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया, पुलिस ने जंतर-मंतर पर भारी बैरिकेडिंग कर दी और वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों को तुरंत हटने को कहा. पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने शुरुआती रुकावट पैदा करने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने ‘अधिकतम संयम’ बरतते हुए स्थिति को संभाल लिया. इससे पहले, शुक्रवार रात को ही आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले सहित कई विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर जाकर वांगचुक से मुलाकात की थी और उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया था. विपक्ष ने केंद्र सरकार पर युवाओं की आवाज और नीट परीक्षा धांधली के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील होने का आरोप लगाया है.