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बंगाल के स्कूली छात्रों को मिलेगी डिजिटल पहचान, APAAR ID से एक जगह जुड़ेगा पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड

कोलकाता, 4 सितंबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के स्कूली विद्यार्थियों के लिए शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को. . .

कोलकाता, 4 सितंबर (हि. स.)। पश्चिम बंगाल के स्कूली विद्यार्थियों के लिए शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को एक डिजिटल पहचान से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों के लिए APAAR ID (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) तैयार की जाएगी। इसके जरिए विद्यार्थी के शैक्षणिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और दस्तावेज एक डिजिटल पहचान के तहत सुरक्षित रखे जा सकेंगे।

हर विद्यार्थी को मिलेगी 12 अंकों की विशिष्ट पहचान

प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद प्रत्येक विद्यार्थी के लिए 12 अंकों वाली एक विशिष्ट APAAR ID तैयार की जाएगी। इसे विद्यार्थी की स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इस पहचान के माध्यम से विद्यार्थी की पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित तरीके से डिजिटल रूप में रखने की व्यवस्था की जाएगी।इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों को अलग-अलग जगहों पर रखने के बजाय एक डिजिटल व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराना है। इससे भविष्य में विद्यार्थियों को अपने रिकॉर्ड का प्रबंधन करने में सुविधा मिल सकती है।

अंकपत्र से लेकर डिग्री-डिप्लोमा तक रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था

APAAR ID के माध्यम से विद्यार्थियों के अंकपत्र, प्रमाणपत्र, डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों से जुड़े दस्तावेज डिजिटल रूप में जोड़े जा सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को बार-बार अपने मूल दस्तावेज या उनकी प्रतियां लेकर विभिन्न संस्थानों में जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।

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डिजिटल रिकॉर्ड के व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहने से दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर प्रस्तुत करने की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है।

DigiLocker और Academic Bank of Credits से जोड़ने की योजना

APAAR ID को DigiLocker और Academic Bank of Credits (ABC) जैसी डिजिटल शिक्षा प्रणालियों से जोड़ने की योजना है। इससे विद्यार्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को विभिन्न स्तरों पर इस्तेमाल करने की सुविधा मिल सकती है। उच्च शिक्षा में दाखिले, संस्थान बदलने या शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान यह डिजिटल व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है। विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड की जानकारी एक व्यवस्थित डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

स्कूल से उच्च शिक्षा तक काम आएगी डिजिटल पहचान

APAAR ID को केवल स्कूली शिक्षा तक सीमित रखने की योजना नहीं है। विद्यार्थी की आगे की पढ़ाई से जुड़े रिकॉर्ड भी इसी डिजिटल पहचान के साथ जोड़े जा सकते हैं। भविष्य में उच्च शिक्षा में प्रवेश, अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों के बीच रिकॉर्ड साझा करने और दस्तावेजों के सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं में इसका इस्तेमाल होने की संभावना है। रोजगार के दौरान शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत पड़ने पर भी यह डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी हो सकता है।

दस्तावेजों की प्रतियां लेकर घूमने की परेशानी होगी कम

वर्तमान में विद्यार्थियों को अलग-अलग शैक्षणिक और अन्य संस्थानों में प्रवेश या आवेदन के दौरान अंकपत्र, प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों की प्रतियां जमा करनी पड़ती हैं। डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था होने के बाद ऐसी प्रक्रियाओं को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।एक ही डिजिटल पहचान से रिकॉर्ड जुड़े होने के कारण विद्यार्थियों को अपने दस्तावेजों को बार-बार व्यवस्थित करने और उनकी प्रतियां तैयार कराने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही संस्थानों के लिए भी रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

नाबालिग छात्रों के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी

नाबालिग विद्यार्थियों के लिए APAAR ID तैयार करने में माता-पिता या अभिभावक की सहमति को महत्वपूर्ण माना गया है। यानी नाबालिग छात्र की डिजिटल शैक्षणिक पहचान तैयार करने से पहले अभिभावक की अनुमति आवश्यक होगी। इसके साथ ही विद्यार्थियों के व्यक्तिगत और शैक्षणिक आंकड़ों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण पहलू होगी। डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ी व्यवस्था में डेटा की सुरक्षा और उसके उचित इस्तेमाल को लेकर विशेष सावधानी की आवश्यकता होगी।

डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी गति

पश्चिम बंगाल में डिजिटल शिक्षा व्यवस्था के विस्तार के बीच APAAR ID को विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान के रूप में देखा जा रहा है। इसके जरिए स्कूल स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित तरीके से रखने की दिशा में काम किया जा सकता है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है, तो विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक दस्तावेजों का प्रबंधन आसान हो सकता है और प्रवेश तथा सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं में भी समय की बचत हो सकती है।

क्या है APAAR ID?

APAAR का पूरा नाम Automated Permanent Academic Account Registry है। इसे विद्यार्थियों की एक स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थी की शैक्षणिक उपलब्धियों और रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करना है, ताकि शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जा सके।

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