नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट और सुरक्षा गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब गृह मंत्रालय (MHA) के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने एक पॉडकास्ट में पाकिस्तानी क्रिकेटरों को लेकर होश उड़ाने वाला खुलासा किया। मणि ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ जैसे हाई-प्रोफाइल पाकिस्तानी क्रिकेटर जब भी भारत आते थे, तो वे अपने साथ ड्रग्स की बड़ी खेप लेकर आते थे। मणि के मुताबिक, यह कोई व्यक्तिगत शौक नहीं था, बल्कि इसके पीछे सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हाथ था, जो भारत में ड्रग्स की तस्करी करवा रही थी।
पाकिस्तानी हाई कमिश्नर के सामने कबूला जुर्म!
आरवीएस मणि ने एएनआई (ANI) के पॉडकास्ट में दावा किया कि यह महज़ एक आशंका नहीं बल्कि ऑन-रिकॉर्ड सच है। उन्होंने कहा, “शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ ने खुद पाकिस्तानी हाई कमिश्नर के सामने यह बात स्वीकार की थी कि वे भारत में ड्रग्स लेकर आए थे, जिसके बाद उन्हें तुरंत वापस भेज दिया गया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान इतने बड़े सेलिब्रिटीज का इस्तेमाल ड्रग्स के लिए कर सकता है? तो पूर्व अधिकारी ने साफ कहा कि सिर्फ ये दोनों नहीं, बल्कि भारत आने वाले लगभग सभी पाकिस्तानी डेलिगेशन और पूरी की पूरी क्रिकेट टीम इस ड्रग ट्रैफिकिंग के रैकेट में शामिल थी।
बॉब वूल्मर की ‘मर्डर मिस्ट्री’ से जुड़े तार!
इस सनसनीखेज खुलासे में आरवीएस मणि ने एक और बड़ा बम फोड़ा। उन्होंने 2007 वर्ल्ड कप के दौरान पाकिस्तान क्रिकेट टीम के तत्कालीन इंग्लिश कोच बॉब वूल्मर की संदिग्ध मौत के तारों को भी इसी ड्रग रैकेट से जोड़ दिया। मणि ने डॉट्स कनेक्ट करते हुए कहा कि क्रिकेटर्स द्वारा की जा रही इस ड्रग्स तस्करी का बॉब वूल्मर लगातार विरोध कर रहे थे। इस घटना के करीब 6 महीने बाद ही, 18 मार्च 2007 को, जमैका के एक होटल में वूल्मर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे। मणि का इशारा साफ था कि वूल्मर की मौत के पीछे इस बड़े राज़ का पर्दाफाश होने का डर था।
लालाबाद में अच्छी फसल यानी भारत में बड़ा आतंकी हमला!
गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा डिवीजन में 2006 से 2010 तक कार्यरत रहे आरवीएस मणि ने बताया कि भारत में होने वाले 30% आतंकी हमलों की फंडिंग सीधे तौर पर इसी ड्रग्स तस्करी से होती थी। उन्होंने मंत्रालय के भीतर होने वाली गंभीर चर्चाओं को याद करते हुए कहा:
- सरकारी नीति: भारत में ड्रग्स की खेप भेजना पाकिस्तान की एक सोची-समझी सरकारी नीति (State Policy) है।
- अफीम से आतंकी हमला: “हम गृह मंत्रालय में बैठकर यह आकलन करते थे कि अगर इस बार अफगानिस्तान के जलालाबाद में अफीम की फसल अच्छी हुई है, तो भारत में आतंकी हमले बढ़ने वाले हैं। हमारे लिए वह फसल सीधे तौर पर सिरदर्दी का संकेत होती थी।”
“पीपुल टू पीपुल कॉन्टैक्ट एक बहुत बड़ा धोखा” – फाइलों में दबे पड़े हैं सबूत
आरवीएस मणि ने पाकिस्तान के साथ सांस्कृतिक और खेल संबंधों (People to People Contact) को भारत के साथ हुआ सबसे बड़ा धोखा करार दिया। उन्होंने कहा कि इसके नाम पर सिर्फ झूठे नैरेटिव गढ़े गए और पीठ में छुरा घोंपा गया। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत की खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को इसकी भनक नहीं थी? तो उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि IB ने अपना काम बखूबी किया था। ऐसे कई मूवमेंट और अलर्ट्स की सैकड़ों रिपोर्ट आज भी गृह मंत्रालय की फाइलों में दबी पड़ी हैं, क्योंकि IB का काम सिर्फ अलर्ट करना था, एक्शन लेना आगे के नीति-निर्माताओं का काम था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि देश के खिलाफ यह सब अपनी आँखों से देखना बेहद दर्दनाक था।