कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की वैधता को लेकर एक बार फिर सियासी विवाद गहरा गया है। एक ओर ऋतब्रत बनर्जी गुट ने अलीपुर अदालत के एक आदेश का हवाला देते हुए खुद को “असली तृणमूल” बताया, वहीं ममता बनर्जी समर्थक ‘कालीघाट तृणमूल’ ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। पार्टी की वैधता का मामला फिलहाल राष्ट्रीय चुनाव आयोग के समक्ष भी विचाराधीन है।
ऋतब्रत बनर्जी ने अदालत के आदेश का दिया हवाला
रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि अलीपुर अदालत ने अरूप राय की अध्यक्षता में गठित उनकी समिति को तृणमूल कांग्रेस की एकमात्र वैध समिति माना है। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश से उनके गुट की वैधता स्पष्ट हो गई है।
ममता समर्थक गुट ने दावे को बताया भ्रामक
ऋतब्रत बनर्जी के दावे के तुरंत बाद ममता समर्थक ‘कालीघाट तृणमूल’ की ओर से अधिवक्ता अर्ककुमार नाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि यह मामला स्वयं ऋतब्रत बनर्जी ने नहीं, बल्कि जुई विश्वास और कुछ अन्य लोगों ने दायर किया था। उन्होंने बताया कि ऋतब्रत गुट ने राष्ट्रीय चुनाव आयोग से खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता देने की मांग की है, लेकिन आयोग ने अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने भी अपना पक्ष चुनाव आयोग के समक्ष रख दिया है।
‘यह अंतिम फैसला नहीं, केवल अंतरिम आदेश’
अर्ककुमार नाग ने स्पष्ट किया कि अलीपुर अदालत ने केवल एक एक्स-पार्टी अंतरिम आदेश (एक पक्ष की दलील सुनकर दिया गया आदेश) पारित किया है। इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इस आदेश के खिलाफ आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
‘कार्यकर्ताओं को भ्रमित करने की कोशिश’
ममता समर्थक गुट के वकील ने आरोप लगाया कि अदालत के अंतरिम आदेश को अंतिम निर्णय बताकर तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ऋतब्रत बनर्जी का गुट कभी चुनाव आयोग तो कभी अदालत का सहारा लेकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहा है।
‘ममता बनर्जी ही हैं तृणमूल की अध्यक्ष’
अर्ककुमार नाग ने दोहराया कि अभी तक तृणमूल कांग्रेस की वैध अध्यक्ष ममता बनर्जी ही हैं और पार्टी के सभी कार्यक्रम उनके नेतृत्व में ही संचालित होंगे। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को किसी तरह की अफवाह या भ्रम में आने की जरूरत नहीं है।
चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी नजर
तृणमूल कांग्रेस की वैधता और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला अब राष्ट्रीय चुनाव आयोग के निर्णय पर निर्भर करेगा। आयोग के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस विवाद का आधिकारिक निष्कर्ष क्या होगा।