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हार का ‘शतक’ लगाने के करीब राहुल गांधी! उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने झेली 99 चुनावी हार, देखें लिस्ट

नई दिल्ली। करीब दो दशकों से राहुल गांधी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता के तौर पर लगातार सक्रिय रहे हैं। मार्च 2004 में राजनीति में प्रवेश के बाद से उन्होंने. . .

नई दिल्ली। करीब दो दशकों से राहुल गांधी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता के तौर पर लगातार सक्रिय रहे हैं। मार्च 2004 में राजनीति में प्रवेश के बाद से उन्होंने कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी के अभियान की कमान संभाली, लेकिन चुनावी नतीजों को लेकर उनके नेतृत्व पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्हें देशभर में 99 बार हार का सामना करना पड़ा है। जनता लगातार उनके नेतृत्व को नकारती रही है।

लोकसभा चुनावों में हार

2014, 2019 और 2024 में कांग्रेस को मिली हार।

विधानसभा चुनाव

जम्मू-कश्मीर
2014

पंजाब
2007
2012
2022

हरियाणा
2014
2019
2024

दिल्ली
2013
2015
2020
2025

गुजरात
2007
2012
2017
2022

राजस्थान
2013
2023

महाराष्ट्र
2014
2019
2024

गोवा
2012
2017
2022

कर्नाटक
2004
2008
2018

केरल
2006
2016
2021

मध्य प्रदेश
2008
2013
2018
2023

तेलंगाना
2014
2018

आंध्र प्रदेश
2014
2019
2024

पुडुचेरी
2011
2021
2026

तमिलनाडु
2011
2016
2026

हिमाचल प्रदेश
2007
2017

उत्तराखंड
2007
2017
2022

सिक्किम
200
2009
2014
2019
2024

उत्तर प्रदेश
2007
2012
2017
2022

बिहार
2005
2010
2020
2025

पश्चिम बंगाल
2006
2016
2021
2026

अरुणाचल प्रदेश
2019
2024

असम
2016
2021
2026

नगालैंड
2008
2013
2018
2023

मणिपुर
2017
2022

मिजोरम
2018
2023

त्रिपुरा
2008
2013
2018
2023

मेघालय
2018
2023

झारखंड
2005
2009
2014

ओडिशा
2004
2009
2014
2019
2024

छत्तीसगढ़
2008
2013
2023

2026 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति

केरल, पुदुचेरी, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव में केरल को छोड़कर बाकी राज्यों में कांग्रेस के हाथ निराशा लगी। कांग्रेस को केरल में 63, पश्चिम बंगाल में केवल दो, असम में 19, पुदुचेरी में एक सीटें और तमिलनाडु में पांच सीटें मिली।

क्या कहते हैं राजनीतिक विशेषज्ञ?

राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई के अनुसार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम कांग्रेस के लिए किसी बड़े राजनीतिक सदमे से कम नहीं हैं। केरल को छोड़कर, जहां वाम मोर्चे के खिलाफ दस साल की एंटी-इनकंबेंसी के चलते कांग्रेसनीत यूडीएफ की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी, शेष चार राज्यों के नतीजों ने पार्टी की सांगठनिक कमजोरियों की पोल खोलकर रख दी है। इन नतीजों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस न तो अपनी पुरानी गलतियों से सबक ले रही है और न ही जोखिम उठाकर नई रणनीति बनाने का साहस दिखा पा रही है। यह न केवल कांग्रेस, बल्कि पूरे इंडिया ब्लॉक के लिए करारा झटका है, जिससे उबरना उसके लिए काफी मुश्किल होगा।
किदवई ने कहा कि पश्चिम बंगाल और असम में कांग्रेस ने जैसा प्रदर्शन किया, वह काफी हद तक अपेक्षित भी था, लेकिन तमिलनाडु के नतीजों ने कांग्रेस नेतृत्व की भारी रणनीतिक खामियों को उजागर कर दिया है। अचरज तो इस बात को लेकर है कि पार्टी नेतृत्व राज्य में द्रमुक के खिलाफ पनप रहे सत्ता विरोधी रुझान को भांपने में हर स्तर पर विफल रहा। कांग्रेस के आंतरिक सर्वे भी राज्य में अभिनेता विजय की नई पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (टीवीके) के एक मजबूत ताकत के रूप में उभरने के संकेत दे रहे थे। कांग्रेस के पास टीवीके के साथ गठबंधन करने का तब एक सुनहरा अवसर भी था, जब खुद विजय के पिता एसए चंद्रशेखर ने साल की शुरुआत में स्वयं गठबंधन करने का प्रस्ताव दिया था।

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