Home » देश » अरुणाचल में चीन की घुसपैठ : चीन के विश्वासघात की अरुणाचल की जनजाति ने खोली पोल, कहा-पुश्तैनी जमीन पर किया कब्जा

अरुणाचल में चीन की घुसपैठ : चीन के विश्वासघात की अरुणाचल की जनजाति ने खोली पोल, कहा-पुश्तैनी जमीन पर किया कब्जा

ईटानगर: चीन अपनी विस्तारवादी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) ने अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा (LAC) का उल्लंघन करते हुए भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की. . .

ईटानगर: चीन अपनी विस्तारवादी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (PLA) ने अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा (LAC) का उल्लंघन करते हुए भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है। इतना ही नहीं, चीनी सेना ने भारतीय इलाके के भीतर सड़कें और सैन्य कैंप भी बना लिए हैं। दावा किया जा रहा है कि पिछले 6 से 15 वर्षों के दौरान ड्रैगन ने ‘सलामी स्लाइसिंग’ (धीरे-धीरे कब्जा करने की नीति) के तहत तुक्सिंग बॉर्डर इलाके में काफी अंदर तक प्रवेश कर लिया है और स्थानीय लोगों की चराई, शिकार और खेती की जमीन के एक बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा जमा लिया है।

नाह समुदाय ने उठाई आवाज: “पुश्तैनी जमीन पर अब चीन का कब्जा”

चीन की इस आक्रामक गतिविधि के खिलाफ स्थानीय नाह आदिवासी समुदाय ने मोर्चा खोल दिया है। नाह वेलफेयर सोसाइटी (NWS) के अध्यक्ष केरू चादर ने अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर (DC) को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा है।

“कुछ साल पहले तक जिन पुश्तैनी जमीनों पर हम आजादी से घूमते थे, शिकार करते थे, वन उपज इकट्ठा करते थे और जहां हमारे मवेशी चरते थे, वे इलाके अब चीनी PLA के नियंत्रण में हैं। हम हर दिन इंच-इंच करके अपनी जमीन खो रहे हैं।” — केरू चादर, अध्यक्ष (NWS)

इन रणनीतिक और पवित्र स्थलों पर किया कब्जा

आदिवासी संगठन के अनुसार, चीनी सेना ने उन क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में ले लिया है जो 2020 तक पूरी तरह से स्थानीय आदिवासियों के पारंपरिक अधिकार क्षेत्र में थे। इनमें शामिल हैं:

  • असाफिला क्षेत्र के ओयिंग, पनियार (चुजार्टा इलाका), मारपान (मारनाफे), पोट्रांग (लेक) और टिडिंगटैंग
  • टाक्सिंग हेडक्वार्टर के पास स्थित कुछ पवित्र बौद्ध/स्थानीय तीर्थ स्थल, जिन्हें अब चीन ने अपने कब्जे में ले लिया है।

संगठन का आरोप है कि चीनी सरकार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बना रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अपनी स्थिति को तेजी से मजबूत कर सके।

“भारतीय सेना पर पूरा भरोसा, लेकिन चीनी बुनियादी ढांचा बड़ी चिंता”

नाह वेलफेयर सोसाइटी ने स्पष्ट किया कि उन्हें भारतीय सेना के शौर्य और उनकी नीयत पर कोई संदेह नहीं है। सेना सालों से देश की सीमाओं की रक्षा कर रही है। हालांकि, सीमा के उस पार चीनी सेना द्वारा जिस रफ्तार से इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़कें और कैंप) तैयार किया जा रहा है, उसकी गति भारतीय तैयारियों के मुकाबले चिंताजनक है। यही वजह है कि चीनी गतिविधियों को रोकने में मुश्किलें आ रही हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला: विधायक ने की आधिकारिक पुष्टि की मांग

इस संवेदनशील मुद्दे पर नाचो (Nacho) क्षेत्र के विधायक नाकाप नालो ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मामला सीधे तौर पर देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए स्थानीय लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने जिला प्रशासन और केंद्र सरकार से मांग की है कि इन आरोपों की जमीनी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि की जाए।

मौजूदा स्थिति: इस पूरे मामले पर अभी तक अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर गैंबो टैसो, राज्य सरकार या भारतीय सेना की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय प्रशासन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में जुटा है।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम