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ईवी और सीएनजी कारों की बढ़ी सेल, पेट्रोल-डीजल गाड़ियों का घट रहा क्रेज, प्रधानमंत्री मोदी की अपील का दिखने लगा है असर

नई दिल्ली। हालिया तेल संकट के मद्देनजर भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ग्राहकों की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों, यानी पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारों. . .

नई दिल्ली। हालिया तेल संकट के मद्देनजर भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में ग्राहकों की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों, यानी पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारों के मार्केट शेयर में गिरावट आई है, जबकि सीएनजी (CNG/LPG) और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। यह डेटा साफ संकेत दे रहा है कि भारतीय खरीदार अब बजट और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की ओर तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं। वहीं, बीते महीने पीएम नरेंद्र मोदी ने ईवी खरीदने और फ्यूल बचाने की जो अपील की थी, उसका भी असर दिखने लगा है।

पेट्रोल और डीजल की बादशाहत खतरे में

मई 2026 की FADA कार सेल्स रिपोर्ट पर नजर डालें तो पेट्रोल/इथेनॉल बेस्ड वाहनों की बाजार हिस्सेदारी पिछले साल के 48.15 पर्सेंट से घटकर 45.76 फीसदी पर आ गई है। इसी तरह डीजल कार मार्केट भी सिकुड़कर 16.23 फीसदी पर सिमट गया है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण लोग अब पारंपरिक ईंधन के विकल्पों से दूर हो रहे हैं।

सीएनजी का बढ़ता जादू

सीएनजी और एलपीजी वाहनों की मांग में सबसे तेज उछाल देखने को मिला है। मई 2025 में जहां इनका मार्केट शेयर महज 19.93 फीसदी था, वहीं मई 2026 में बढ़कर 23.34% हो गया है। कम ऑपरेटिंग कॉस्ट और पेट्रोल के बढ़ते विकल्पों के बीच सीएनजी वाहन अब मिडिल क्लास फैमिली की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री की रफ्तार तेज

इलेक्ट्रिक कारों ने भी अपने प्रदर्शन से सबको चौंकाया है। मई 2025 में ईवी का मार्केट शेयर महज 4.51 फीसदी था, जो अब बढ़कर 6.63 फीसदी हो गया है। सरकार द्वारा चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार और सब्सिडी का लाभ मिलने के बाद शहरी इलाकों में ईवी की स्वीकार्यता बढ़ी है।

हाइब्रिड टेक्नॉलजी की भी स्थिर डिमांड

हाइब्रिड कारों ने बाजार में अपनी स्थिति को काफी हद तक स्थिर रखा है। पिछले साल के 8.09 पर्सेंट की तुलना में मई 2026 में यह 8.05 फीसदी पर है। इससे पता चलता है कि हाइब्रिड टेक्नॉलजी उन ग्राहकों के लिए एक अच्छा विकल्प बनी हुई है, जो अभी भी पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने में झिझक रहे हैं।

ग्रीन फ्यूल पर जोर

आपको बता दें कि मौजूदा समय में तेल संकट ने लोगों की पसंद और जरूरतों को प्रभावित तो जरूर किया है। ऐसे में पीएम मोदी के साथ ही केंद्रीय मंत्रियों ने भी ग्रीन फ्यूल या ईवी पर जोर दिया है। मई 2026 के ये आंकड़े ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत हैं। कुल 100 फीसदी मार्केट शेयर में ईवी और सीएनजी का बढ़ता ग्राफ यह बताता है कि आने वाले समय में ग्रीन फ्यूल ही भारतीय सड़कों का भविष्य होगा। वाहन निर्माता कंपनियां भी अब इन आंकड़ों को देखकर अपनी भविष्य की रणनीतियां तैयार कर रही हैं।

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