कोलकाता। राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद, राजारहाट-न्यूटाउन इलाके के पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्षद देवराज चक्रवर्ती अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रडार पर आ गए हैं। ED ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति, भारी मात्रा में धन के स्रोत और संभावित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में FIR दर्ज की है।
जांच के दायरे में देवराज: चुनावी हलफनामे में गड़बड़ी का शक
ED सूत्रों के मुताबिक, देवराज चक्रवर्ती की अकूत संपत्ति और उसके स्रोतों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी। केंद्रीय जांच एजेंसी के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- घोषित आय में अंतर: जांचकर्ताओं को संदेह है कि एक पार्षद के रूप में उनकी घोषित आय और वास्तविक संपत्ति के बीच एक बड़ा अंतर (बेमेल) है।
- चुनावी हलफनामा: शुरुआती जांच में सामने आया है कि देवराज ने चुनाव के दौरान जमा किए गए हलफनामे में अपनी वास्तविक संपत्ति की तुलना में बहुत कम संपत्ति दिखाई थी।
- कस्टडी की तैयारी: ED इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है और जरूरत पड़ने पर राज्य पुलिस से देवराज को अपनी हिरासत में लेने के लिए अदालत में अपील कर सकती है।
प्रभाव का दायरा: प्रभावशाली नेताओं से कनेक्शन?
ED की शुरुआती जांच में देवराज चक्रवर्ती के राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख को लेकर कई अहम जानकारियां मिली हैं:
- करीबी घेरा: जांचकर्ताओं का दावा है कि साल 2011 के बाद देवराज, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी हलकों में महत्व पाने लगे थे और उन्हें कई संगठनात्मक व प्रशासनिक जिम्मेदारियां दी गई थीं।
- क्षेत्रीय प्रभाव: उनका प्रभाव सिर्फ राजारहाट-न्यूटाउन तक सीमित नहीं था, बल्कि उत्तर 24 परगना के कई इलाकों और बशीरहाट उपखंड की विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के समन्वय (Coordination) में भी उनकी सक्रिय भूमिका थी।
इन 3 मुख्य सवालों के जवाब तलाश रही है ED
ED की जांच अब केवल आय से अधिक संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इलाके में जबरन वसूली (तोलाबाजी) जैसे आरोपों की भी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। जांच एजेंसी मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब ढूंढ रही है:
- देवराज चक्रवर्ती के जरिए किन-किन लोगों के बैंक खातों में पैसा भेजा जाता था?
- क्या इस पूरे खेल के पीछे उनके सिर पर किसी बड़े और प्रभावशाली व्यक्ति का हाथ था?
- अलग-अलग स्तरों पर बांटे जाने वाले इस बेहिसाब धन का असली स्रोत (Source) क्या है?
आगे की कार्रवाई: ED सूत्रों के अनुसार, इस FIR के बाद जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा। आने वाले दिनों में देवराज से जुड़े बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों और उनके संपर्क में रहे व्यक्तियों व कंपनियों को भी जांच के दायरे में लाया जा सकता है।
उपर्युक्त रिपोर्ट में लगाए गए आरोप फिलहाल जांच के अधीन हैं। इन आरोपों पर अभी तक अदालत का कोई अंतिम फैसला नहीं आया है और न ही आरोप सिद्ध हुए हैं।