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तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के NCPI में शामिल होने से एनडीए को होगा बड़ा फायदा, जाने एनसीपीआई पार्टी का क्या है इतिहास

नई दिल्ली। हाल में पश्चिम बंगाल की सियासत में उथल-पुथल मची है। इसकी वजह ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद बने हैं। इन 20 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर अपना गुट बनाने और अपने. . .

नई दिल्ली। हाल में पश्चिम बंगाल की सियासत में उथल-पुथल मची है। इसकी वजह ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद बने हैं। इन 20 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर अपना गुट बनाने और अपने इस नए समूह का विलय NCPI के साथ करने का ऐलान कर दिया है। इस ऐलान के साथ ही NCPI पार्टी पूरे देश में सुर्खियों में आ गई है। लोग अब इस पार्टी का इतिहास जानना चाह रहे हैं। क्योंकि, कई लोगों ने तो पहले इस पार्टी का नाम भी नहीं सुना था।
वहीं, विलय के बाद एनसीपीआई पार्टी अब एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है, क्योंकि बीजेपी के बाद सबसे ज्यादा 20 सांसद इनके पास होंगे। इन सांसदों के बागी होने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का अस्तित्व भी खतरे में आ सकता है। तो चलिए जानते हैं एनसीपीआई पार्टी का इतिहास क्या है और यह कब-कब चुनाव के मैदान में उतरी। इसका हेडक्वार्टर कहां है…

एनसीपीआई पार्टी का इतिहास क्या है?

पूर्वोत्तर भारत, मुख्य रूप से त्रिपुरा में स्थित एक पंजीकृत (रजिस्टर्ड) लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त छोटी क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है। इसका मुख्य राजनीतिक केंद्र और वोटर बेस बंगाली समुदाय माना जाता है। यह पार्टी हाल ही में उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई, जब तृणमूल कांग्रेस ( TMC ) के लगभग 20 बागी सांसदों ने इस पार्टी में खुद को विलय करने का ऐलान कर दिया। इस पार्टी के पास न कोई सांसद है न कोई विधायक है। लेकिन, TMC के बागी गुट के विलय के बाद यह सीधे तौर पर संसद में एक महत्वपूर्ण ताकत बन जाएगी।

2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारे थे

इसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में भी कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और लेकिन एक भी उम्मीदवार जीत नहीं सका था। इसका पंजीकरण पश्चिम बंगाल के हावड़ा (संकराइल) में भी दर्ज है NCPI ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मिलकर काम करने और एनडीए सरकार का समर्थन करने का फैसला किया है।

एनसीपीआई एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन जाएगी

बता दें कि एनडीए को समर्थन करने के ऐलान के बाद एनसीपीआई एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है। फिलहाल टीडीपी 16 सांसदों के साथ दूसरी सहयोगी पार्टी बनी हुई है। टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार सहित तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अलग बैठने की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि यह उनके कुल सांसदों (28) का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा है। इसके बाद, सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) के साथ विलय की पुष्टि की है।

एनसीपीआई पार्टी का चुनाव चिह्न क्या है?

नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का चुनाव चिह्न ‘सात किरणों वाली पेन की निब’है।चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, NCPI एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। इस वजह से इसके पास कोई परमानेंट या आरक्षित चुनाव चिह्न नहीं है। वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने इस पार्टी को ‘सात स्ट्रोक वाला इंक पेन का निब’ चुनाव चिह्न आवंटित किया था।

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