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तृणमूल कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी कलह, ऋतब्रत बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग से पार्टी और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर जताया दावा

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संगठनात्मक विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग का रुख करते हुए खुद को तृणमूल कांग्रेस. . .

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संगठनात्मक विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग का रुख करते हुए खुद को तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक संगठन बताया है। साथ ही पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ और संगठनात्मक अधिकारों पर भी अपना दावा पेश किया है।

चुनाव आयोग के सामने पेश किया पक्ष

दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय में अधिकारियों से मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके गुट को पार्टी के भीतर व्यापक समर्थन प्राप्त है। उनके अनुसार, कई विधायक, पार्षद और जिला स्तर के नेता उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि आयोग को संगठनात्मक समर्थन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी सौंपे गए हैं और उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद है।

नई राष्ट्रीय कार्यसमिति से शुरू हुआ विवाद

तृणमूल कांग्रेस के भीतर यह विवाद तब और गहरा गया, जब ऋतब्रत बनर्जी गुट ने हाल ही में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की अनुपस्थिति में नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया। इसके बाद इस नई कार्यसमिति की सूची और संबंधित प्रस्ताव राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा चुनाव आयोग को भेजे गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आयोग ने इस गुट को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया।

चुनाव चिह्न और संगठन पर भी दावा

सूत्रों के मुताबिक, ऋतब्रत गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न और संगठन के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर भी दावा प्रस्तुत किया है। हालांकि आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

नेतृत्व पर साधा निशाना

चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने बिना किसी का नाम लिए पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक समय जनाधार पर खड़ी पार्टी धीरे-धीरे परिवारवाद की ओर बढ़ गई, जिससे संगठन के मूल सिद्धांत प्रभावित हुए। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संगठन का संचालन पारदर्शी और सामूहिक नेतृत्व के आधार पर होना चाहिए।

अब आयोग की अगली कार्रवाई पर नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दे सकता है। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद पर आयोग की आगामी कार्रवाई और निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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