सिलीगुड़ी। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी शुक्रवार को दो महीने के भीतर तीसरी बार उत्तर बंगाल के दौरे पर पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब लगातार बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के कारण उत्तर बंगाल के कई जिलों में हालात चिंता का विषय बने हुए हैं। मुख्यमंत्री सिलीगुड़ी स्थित उत्तरकन्या में राज्य के आठ जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक करेंगे और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करेंगे। बैठक दोपहर 2 बजे शुरू होने की संभावना है। बैठक समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री उसी दिन कोलकाता लौट जाएंगे।
तीन जिलों के अधिकारी रहेंगे मौजूद, बाकी जिले जुड़ेंगे वर्चुअली
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और जलपाईगुड़ी के जिला अधिकारी उत्तरकन्या में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि उत्तर बंगाल के अन्य जिलों के प्रशासनिक अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होंगे। बैठक में मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल सहित राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
बारिश और भूस्खलन से बिगड़े हालात पर होगी विस्तृत चर्चा
हाल के दिनों में उत्तर बंगाल के कई जिलों में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री आपदा प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। ‘बालासन नदी’ में तेज बहाव के कारण ‘ दूधिया क्षेत्र में बना अस्थायी ह्यूम पाइप पुल बह गया, जिससे सिलीगुड़ी और मिरिक के बीच सीधा संपर्क टूट गया।
- पहाड़ी क्षेत्रों में कई स्थानों पर भूस्खलन होने से सड़क यातायात प्रभावित हुआ है।
- राष्ट्रीय राजमार्ग-10 पर लगातार भूस्खलन के चलते ‘सिलीगुड़ी, कालिम्पोंग और सिक्किम’ के बीच संपर्क बार-बार बाधित हो रहा है।
- मैदान क्षेत्रों के कई जिलों में जलभराव की स्थिति बनी और नदियों के बढ़ते जलस्तर से कई तटबंध क्षतिग्रस्त हुए हैं।
- तीस्ता, तोर्षा और जलढाका जैसी नदियों में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है।
अगले सप्ताह फिर सक्रिय हो सकता है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल उत्तर बंगाल में भारी बारिश से कुछ राहत मिली है और अगले कुछ दिनों तक रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी नहीं किया गया है। हालांकि, अगले सप्ताह के अंत तक चक्रवाती परिसंचरण और निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून फिर सक्रिय हो सकता है। ऐसे में प्रशासन पहले से तैयारियां मजबूत करने में जुटा है।
जिला प्रशासन से मांगी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बैठक के दौरान सभी जिलों से आपदा प्रबंधन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगेंगे।
बैठक में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर चर्चा होगी—
- प्रत्येक जिले की वर्तमान स्थिति।
- बाढ़ और भूस्खलन से निपटने की तैयारियां।
- राहत एवं बचाव कार्यों की उपलब्धता।
- कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली।
- किन क्षेत्रों में राज्य सरकार से अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।
- संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और राहत व्यवस्था।
पहले भी जारी किए गए थे विशेष निर्देश
उत्तर बंगाल में मानसून के शुरुआती दौर में आई प्राकृतिक आपदा के समय मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के प्रशासन से लगातार संपर्क बनाए रखा था। उनके निर्देश पर प्रत्येक जिले में कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर सक्रिय किए गए थे।
शुक्रवार की बैठक में मुख्यमंत्री यह भी समीक्षा करेंगे कि पहले जारी किए गए निर्देशों का पालन किस स्तर तक हुआ है और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए किन अतिरिक्त कदमों की जरूरत है।
राज्य सरकार ने बताया उत्तर बंगाल को प्राथमिकता
राज्य के वित्त राज्य मंत्री आनंदमय बर्मन ने कहा कि मुख्यमंत्री का लगातार उत्तर बंगाल दौरा इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार इस क्षेत्र के विकास और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल अब किसी भी स्तर पर उपेक्षित नहीं रहेगा और सरकार हर चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
दो महीने में तीसरा उत्तर बंगाल दौरा
मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी पहली बार 20 मई को उत्तर बंगाल पहुंचे थे, जहां उन्होंने उत्तरकन्या में जिला प्रशासन के साथ बैठक कर प्राकृतिक आपदाओं की तैयारियों की समीक्षा की थी। इसके बाद 16 जून को उन्होंने कर्सियांग में आयोजित जनकल्याण शिविर में हिस्सा लिया। अब 4 जुलाई को होने वाला यह दौरा दो महीने के भीतर उनका तीसरा उत्तर बंगाल दौरा होगा, जिसे प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आपदा प्रबंधन को लेकर रहेगा विशेष फोकस
राज्य सरकार का उद्देश्य संभावित भारी बारिश और बाढ़ से पहले सभी जिलों की तैयारियों को मजबूत करना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से संचालित किए जा सकें। मुख्यमंत्री की यह समीक्षा बैठक आगामी मानसूनी चुनौतियों से निपटने की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।