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पीएम मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट वाले एलान पर CJP का हमला, बोली- ‘मरहम नहीं, पेपर लीक रोकने वाली व्यवस्था चाहिए’; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि केवल सख्त सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है,. . .

नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि केवल सख्त सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी जिससे भविष्य में पेपर लीक की घटनाएं ही न हों। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की।

‘सिर्फ सजा नहीं, व्यवस्था में सुधार जरूरी’

आशुतोष रांका ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं इसलिए हो रही हैं क्योंकि पूरी व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। उनके मुताबिक, जिम्मेदारी तय किए बिना और सिस्टम को जवाबदेह बनाए बिना ऐसी घटनाओं पर स्थायी रोक नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने कहा कि दोषियों के मन में कानून का भय पैदा करना जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में पेपर लीक की कोई गुंजाइश ही न बचे।

‘पेपर लीक संगठित गिरोह के जरिए होता है’

CJP प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पेपर लीक कोई अकेले व्यक्ति का अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए अंजाम दिया जाता है। उनके अनुसार इसमें निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक कई लोग शामिल होते हैं और आर्थिक लाभ उठाते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में समस्या खत्म करना चाहती है तो केवल दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे तंत्र की खामियों को दूर करना होगा। प्रधानमंत्री के एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रांका ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा ऐसी है जैसे चोट लगने के बाद मरहम लगाया जाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई उस कारण को खत्म करने की है, जिसकी वजह से बार के एलान को बताया ‘चोट के बाद मरहम’ प्रधानमंत्री के एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रांका ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा ऐसी है जैसे चोट लगने के बाद मरहम लगाया जाए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई उस कारण को खत्म करने की है, जिसकी वजह से बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं।

‘फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थायी समाधान नहीं’

रांका ने कहा कि देश में पहले भी कई बड़े मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए, लेकिन इससे मूल समस्याएं समाप्त नहीं हुईं। उनके अनुसार सरकार को शिक्षा व्यवस्था में मौजूद अक्षमता और भ्रष्टाचार जैसी जड़ समस्याओं पर काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कमियों की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय तक जाती है और कहा कि उनकी पार्टी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने भी उठाए सवाल

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं ने भी प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार को सबसे पहले छात्रों की बात सुननी चाहिए और उनकी चिंताओं का समाधान करना चाहिए। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि संसद मार्च के दौरान उनके साथ लाठीचार्ज और दुर्व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं और सरकार को संवाद के जरिए समाधान निकालना चाहिए।

छात्रों की मांग- केवल बयान नहीं, जमीनी कार्रवाई हो

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पेपर लीक मामलों का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। उनका कहना था कि केवल सोशल मीडिया पर घोषणाएं करने से समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की मांग दोहराई।

पीएम मोदी ने क्या किया एलान?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द और कठोर दंड दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है और फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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