कोलकाता: शिक्षक दिवस के अवसर पर न्यूटाउन के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘विद्यासागर शिक्षक सम्मान’ समारोह में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया। कार्यक्रम में उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, ईश्वरचंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के बौद्धिक, शारीरिक और मानसिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने, शिक्षकों की गरिमा बहाल करने, नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने और खेलों को बढ़ावा देने समेत कई अहम सुधारों की घोषणा की।
‘सिर्फ किताबी शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए’
मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद के शिक्षा संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों की बुद्धि और प्रतिभा का विकास हो। उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यपुस्तकों तक बच्चों को सीमित रखना उचित नहीं है। उन्होंने ईश्वरचंद्र विद्यासागर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, विशेषकर महिला शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
स्कूलों में खेल और शारीरिक शिक्षा पर होगा जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में कई ऐसी परंपराएं थीं, जिन्हें समय के साथ नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने स्कूलों में खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों को दोबारा मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पर्याप्त खेल मैदान, स्वच्छ और शांत वातावरण तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की सुविधाएं होनी चाहिए। खो-खो, कबड्डी, फुटबॉल सहित पारंपरिक खेलों को विद्यालयों में फिर से बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
छात्रों के मोबाइल इस्तेमाल पर जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने स्कूल विद्यार्थियों में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल को गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों पर मोबाइल के नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए इस दिशा में कड़े कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक विद्यार्थियों को स्कूलों में मोबाइल फोन से दूर रखने की व्यवस्था है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए राज्य में भी ऐसे कठोर फैसलों पर विचार किया जा सकता है।
हर स्कूल में गैस, सोलर पैनल और स्वच्छ पानी की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी विद्यालयों में मिड-डे मील की रसोई गैस से संचालित होनी चाहिए और बिजली के साथ सौर ऊर्जा का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने स्कूलों में पंखे, पेयजल के लिए एक्वागार्ड, साफ-सुथरे शौचालय और छात्राओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था करने की बात कही। इसके अलावा स्कूलों में पुस्तकालय, संगीत वाद्ययंत्र और बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
‘शिक्षक शब्द की गरिमा वापस लानी होगी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ शिक्षक हैं और शिक्षक शब्द की प्रतिष्ठा बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा ऐसे कई प्रशासनिक कामों में लगा दिया जाता है, जिससे उनके मूल कार्य पर असर पड़ता है। उन्होंने स्कूलों में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति की आवश्यकता बताई, ताकि शिक्षकों को मिड-डे मील या अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों में अपना समय न लगाना पड़े। प्रयोगशालाओं और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए भी कर्मचारियों की नियुक्ति की बात कही।
शिक्षक भर्ती में मेरिट और परीक्षा होगी मुख्य आधार
शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में मेरिट और परीक्षा को ही मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में किसी भी तरह की अनियमितता नहीं होनी चाहिए और आरक्षण नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। उन्होंने शिक्षक भर्ती में इंटरव्यू के अंकों को सीमित रखने की जरूरत भी बताई और कहा कि मौखिक परीक्षा के लिए बहुत ज्यादा अंक रखना उचित नहीं है।
शिक्षकों की वित्तीय सुरक्षा पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों के वेतन, डीए और एरियर से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वित्तीय सुरक्षा भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों को संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।
सिलेबस में भी होगा बदलाव
मुख्यमंत्री ने पाठ्यक्रम में बदलाव की बात करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को देश और समाज के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों तथा ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी, मातंगिनी हाजरा, स्वामी विवेकानंद और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के योगदान को पाठ्यक्रम में उचित स्थान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को देश के इतिहास और विरासत की व्यापक जानकारी मिल सके।
हर जिले में बनेंगे दो ‘सीएमश्री इंस्टीट्यूट’
मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में दो बड़ी योजनाओं की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि हर जिले में दो ‘सीएमश्री इंस्टीट्यूट’ स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों में छठी कक्षा से मेधावी विद्यार्थियों को परीक्षा के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा। इन संस्थानों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां बेहतर शिक्षकों के साथ आधुनिक डिजिटल लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
उत्तर बंगाल और पश्चिमांचल में बनेंगे स्पोर्ट्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर बंगाल और पश्चिमांचल में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्पोर्ट्स’ स्थापित करने की भी घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन संस्थानों के जरिए विद्यार्थियों को बेहतर खेल प्रशिक्षण और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। खेल शिक्षकों की नियुक्ति के जरिए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के अवसर देने की योजना है।
खो-खो, कबड्डी और फुटबॉल को स्कूलों में फिर मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की पारंपरिक खेल संस्कृति को विद्यालयों में वापस लाने की जरूरत है। उन्होंने खो-खो, कबड्डी और फुटबॉल जैसे खेलों को स्कूल स्तर पर बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना होना चाहिए जो बौद्धिक रूप से सक्षम, शारीरिक रूप से स्वस्थ और सामाजिक रूप से जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
शिक्षा व्यवस्था को व्यापक रूप से बदलने का दावा
शिक्षक दिवस के मंच से मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में आने वाले समय में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं से लेकर शिक्षक नियुक्ति, पाठ्यक्रम, खेल और विद्यार्थियों के मोबाइल इस्तेमाल तक कई मुद्दों पर सुधार की रूपरेखा सामने रखी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुधारों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा।