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यूएन के नए नक्शे के प्रस्ताव पर भारत का समर्थन, कश्मीर पर संप्रभुता से समझौता नहीं

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे में विभिन्न महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को अधिक संतुलित तरीके से प्रदर्शित करने वाली मानचित्र प्रणालियों को बढ़ावा देने से संबंधित प्रस्ताव पारित किया है। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष. . .

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे में विभिन्न महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को अधिक संतुलित तरीके से प्रदर्शित करने वाली मानचित्र प्रणालियों को बढ़ावा देने से संबंधित प्रस्ताव पारित किया है। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रस्ताव के समर्थन का मतलब किसी विशेष विश्व मानचित्र, मानचित्र प्रक्षेप या भारत की राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण को मंजूरी देना नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर भारत का रुख स्पष्ट और गैर-परक्राम्य है।

4 सितंबर को यूएन महासभा ने अपनाया प्रस्ताव

रणधीर जायसवाल ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर 2026 को ‘करेक्ट द मैप: ग्लोबल कार्टोग्राफिक रिप्रेजेंटेशन को रीबैलेंस करना और दुनिया के रीजन्स के बराबर रिप्रेजेंटेशन को बढ़ावा देना’ शीर्षक वाला प्रस्ताव अपनाया। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे विश्व मानचित्र प्रक्षेपों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है, जिनमें अलग-अलग महाद्वीपों और क्षेत्रों के क्षेत्रफल का आपसी अनुपात अधिक वास्तविक रूप में दिखाई दे।

किसी खास नक्शे को मान्यता नहीं

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र का यह प्रस्ताव किसी एक विशेष विश्व मानचित्र को आधिकारिक तौर पर मान्यता या प्रमाणित नहीं करता। प्रस्ताव का संबंध मुख्य रूप से मानचित्रों में क्षेत्रफल के संतुलित और अधिक सटीक प्रतिनिधित्व से है। जायसवाल ने कहा कि यह प्रस्ताव राजनीतिक मानचित्रण से भी संबंधित नहीं है। इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या किसी स्थान के नाम को लेकर कोई निर्णय नहीं किया गया है।

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भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में दिया वोट

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। वोट की व्याख्या करते हुए भारत ने कहा कि वह ऐसे मानचित्र प्रणालियों के मूल सिद्धांत का समर्थन करता है, जिनमें दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल को अधिक समानुपातिक तरीके से प्रदर्शित किया जाता है। हालांकि, भारत ने साथ ही यह भी साफ कर दिया कि प्रस्ताव के समर्थन को किसी विशेष मानचित्र प्रक्षेप या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी खास चित्रण की स्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

कश्मीर और लद्दाख पर भारत का रुख स्पष्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना स्पष्ट रुख दोहराया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत का संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि भारत के क्षेत्र का कोई भी गलत, भ्रामक या तथ्यात्मक रूप से अनुचित चित्रण स्वीकार्य नहीं है। भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।

क्या है ‘इक्वल-एरिया’ मानचित्र प्रणाली?

‘इक्वल-एरिया’ मानचित्र प्रक्षेप का उद्देश्य दुनिया के विभिन्न हिस्सों के वास्तविक क्षेत्रफल के अनुपात को मानचित्र पर अपेक्षाकृत सही तरीके से दिखाना है। पारंपरिक विश्व मानचित्रों में पृथ्वी की गोलाकार सतह को सपाट कागज पर दिखाने के कारण कुछ क्षेत्रों का आकार वास्तविकता की तुलना में बड़ा या छोटा दिखाई दे सकता है।नए प्रस्ताव में ऐसे मानचित्र प्रक्षेपों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है, जिनसे अलग-अलग महाद्वीपों और क्षेत्रों के क्षेत्रफल को अधिक संतुलित तरीके से प्रदर्शित किया जा सके। खास तौर पर अफ्रीका समेत दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाने पर जोर दिया गया है।

मानचित्र बदलने का नहीं, प्रतिनिधित्व सुधारने का मुद्दा

भारत ने इस पूरे मुद्दे में एक महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया है। संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव दुनिया के भौगोलिक क्षेत्रफल को मानचित्र पर अधिक संतुलित तरीके से दिखाने से संबंधित है, न कि किसी देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बदलने या विवादित क्षेत्रों पर कोई राजनीतिक फैसला करने से। भारत ने प्रस्ताव के मूल उद्देश्य का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की आधिकारिक सीमाओं और संप्रभु क्षेत्र का चित्रण भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही होना चाहिए।

संप्रभुता पर भारत का रुख गैर-परक्राम्य

विदेश मंत्रालय के बयान से यह स्पष्ट है कि भारत मानचित्रों में क्षेत्रफल के अधिक सटीक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत का समर्थन करता है, लेकिन इसे राष्ट्रीय सीमाओं या संप्रभुता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।भारत ने दोहराया है कि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर रुख स्पष्ट, निरंतर और गैर-परक्राम्य है।

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