मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एक बेहद अहम रणनीतिक समझौते पर सहमति बन गई है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को पीएम मोदी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत को यूरेनियम निर्यात करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने का औपचारिक ऐलान किया।
1. परमाणु सहयोग समझौता (2015) और सुरक्षा मानक
यह समझौता दोनों देशों के बीच हुए ‘ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौते (2015)’ के दायरे में आता है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- शांतिपूर्ण उद्देश्य: यूरेनियम का उपयोग पूरी तरह से शांतिपूर्ण और नागरिक कार्यों के लिए किया जाएगा।
- IAEA के सुरक्षा उपाय: यह पूरी सप्लाई इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा मानकों और नियमों के तहत होगी।
- प्रशासनिक मंजूरी: निर्यात को सुचारू रूप से शुरू करने के लिए सभी जरूरी प्रशासनिक इंतजामों को अंतिम रूप दे दिया गया है।
- NSG सदस्यता का समर्थन: ऑस्ट्रेलिया ने ‘न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप’ (NSG) में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना मजबूत समर्थन एक बार फिर दोहराया है।
2. ऑस्ट्रेलिया का विशाल यूरेनियम भंडार और भारत की जरूरत
भारत के लिए यह डील ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद गेम-चेंजर साबित होने वाली है:
- दुनिया का सबसे बड़ा भंडार: ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के कुल यूरेनियम भंडार का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा है।
- ओलंपिक डैम खदान: ऑस्ट्रेलिया का सबसे विशाल और प्रमुख यूरेनियम भंडार ‘साउथ ओलंपिक डैम खदान’ में स्थित है।
- भारत की आवश्यकताएं: भारत को अपनी तेजी से बढ़ती आबादी के लिए बिजली उत्पादन, मेडिकल रिसर्च और अन्य शांतिपूर्ण नागरिक क्षेत्रों के लिए बड़े पैमाने पर यूरेनियम की जरूरत है।
3. ऑस्ट्रेलिया के लिए ऐतिहासिक व्यापारिक अवसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए एक बड़ा अवसर बताया है:
“ऑस्ट्रेलिया के पास भारत के न्यूक्लियर एनर्जी बदलाव (Nuclear Energy Transition) को आगे बढ़ाने के लिए यूरेनियम सप्लाई करने का एक ऐतिहासिक मौका है। ऑस्ट्रेलिया का यह विशाल भंडार सीधे तौर पर भारत की न्यूक्लियर यात्रा से जुड़ा हुआ है।”
विगत वर्षों में कई कानूनी अड़चनों और राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम एक्सपोर्ट करने में रुकावटें आ रही थीं, जिन्हें इस दौरे पर दूर कर लिया गया है।
4. भारत की बढ़ती परमाणु क्षमता: इस साल की दूसरी बड़ी यूरेनियम डील
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भारत की यह इस साल की दूसरी बड़ी कामयाबी है:
| समझौता क्रम | सहयोगी देश | समझौते की मुख्य बातें |
| पहली डील | कनाडा | कनाडा की कंपनी ‘कैमेको’ अगले दशक में भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) को लगभग 22 मिलियन पाउंड $U_3O_8$ (यूरेनियम अयस्क) की आपूर्ति करेगी। |
| दूसरी डील | ऑस्ट्रेलिया | दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार (28%) से भारत को शांतिपूर्ण और बिजली उत्पादन कार्यों के लिए सीधा निर्यात शुरू होगा। |
भारत सरकार ने देश में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए अपने न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन (परमाणु ऊर्जा उत्पादन) को कई गुना बढ़ाने की योजना बनाई है, जिसमें ये दोनों समझौते मील का पत्थर साबित होंगे।