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रोनाल्ड रीगन की 39 साल पुरानी वो लाइन, PM मोदी ने ट्रंप के आगे क्यों सुनाई? पुतिन भी मुस्कुरा रहे होंगे

नई दिल्ली। फ्रांस के एवियन में आयोजित G-7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की काफी चर्चा हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह उनका अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का मशहूर वाक्य दोहराना है। डोनाल्ड ट्रंप. . .

नई दिल्ली। फ्रांस के एवियन में आयोजित G-7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की काफी चर्चा हो रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह उनका अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का मशहूर वाक्य दोहराना है। डोनाल्ड ट्रंप के ठीक बगल में बैठे PM मोदी ने कहा, ‘Trust but Verify’ यानी ‘विश्वास करो, लेकिन जांच भी करो’। यह सिर्फ एक बयान नहीं था, बल्कि दुनिया के मौजूदा हालात पर भारत का बड़ा कूटनीतिक संदेश भी माना जा रहा है, क्योंकि ट्रंप रीगन के समर्थक हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप कई बार भारत के हितों के खिलाफ जा चुके हैं, जिसमें टैरिफ और H-1B वीजा जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा वेनेजुएला और ईरान पर हमला कर चुके ट्रंप के सामने इस बयान से ग्लोबल साउथ का भी नेतृत्व दिखा। वहीं दूसरी तरफ अगर रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने उनका बयान सुना होगा, तो जरूर मुस्कुराने लगे होंगे. क्योंकि पीएम मोदी का बयान रूस से भी जुड़ा है।

क्या बोले पीएम मोदी?

G-7 के एक शेसन को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि विश्वास की कमी से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य की साझेदारी तभी मजबूत होगी, जब देशों के बीच भरोसा दोबारा बनाया जाएगा। इसी दौरान उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने कहा था- ट्रस्ट बट वेरीफाई. यह बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें भरोसेमंद और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था बनानी होगी। ’

रोनाल्ड रीगन ने यह बात कब कही थी?

‘Trust but Verify’ रोनाल्ड रीगन का सबसे मशहूर वाक्य माना जाता है। हालांकि असल में यह उनकी बनाई लाइन नहीं थी। यह एक पुरानी रूसी कहावत का अनुवाद है, जिसका अर्थ है, ‘विश्वास करो, लेकिन जांच भी करो.’ रीगन को यह कहावत रूस विशेषज्ञ सुजैन मैसी ने सिखाई थी। उन्होंने सलाह दी थी कि सोवियत नेताओं से बातचीत के दौरान रूसी कहावतों का इस्तेमाल करने से माहौल बेहतर बनेगा। रीगन को यह कहावत इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसे अपनी कूटनीतिक पहचान बना लिया।

रोनाल्ड रीगन ने ये बयान कब दिया था?

8 दिसंबर 1987 को अमेरिका और सोवियत संघ के बीच इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्स (INF) ट्रीटी पर साइन हो रहा था। यह कोल्ड वॉर के दौर का सबसे बड़ा परमाणु हथियार कंट्रोल समझौता था। उसी मंच से रीगन ने कहा था, ‘ट्रस्ट बट वेरीफाई। ’ इस पर सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव मुस्कुराते हुए बोले थे, ‘आप हर बैठक में यही बात दोहराते हैं.’ जवाब में रीगन ने हंसते हुए कहा था, ‘मुझे यह बहुत पसंद है। ’

रोनाल्ड रीगन को कहने की जरूरत क्यों पड़ी?

1980 का दशक शीत युद्ध का सबसे तनावपूर्ण दौर था। अमेरिका और सोवियत संघ के पास हजारों परमाणु हथियार थे। दोनों एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते थे, लेकिन हथियारों की दौड़ रोकना भी जरूरी था। रीगन का संदेश साफ था कि समझौते किए जा सकते हैं, लेकिन आंख बंद करके भरोसा नहीं किया जा सकता। इसलिए INF संधि में इतिहास की सबसे सख्त जांच व्यवस्था बनाई गई थी, ताकि दोनों देश एक-दूसरे के परमाणु हथियारों की जांच कर सकें।

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