नई दिल्ली, 5 सितंबर। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से मुलाकात कर उनसे संवाद किया। प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में देशभर से आए पुरस्कार विजेता शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर शिक्षकों के अनुभव और सुझाव जाने तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज शिक्षा को केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है, बल्कि शिक्षकों को बच्चों के जीवन से जुड़कर उनकी समस्याओं और व्यवहार में होने वाले बदलावों को समझना होगा।
‘बचपन मरने नहीं देना चाहिए’
प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजिटल उपकरणों पर निर्भरता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज स्क्रीन टाइम एक तरह के एडिक्शन का रूप ले रहा है। इससे बच्चों को बाहर निकालने के लिए उन्हें खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और अन्य सकारात्मक कार्यों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों को वीडियो गेम के बजाय मैदान में जाकर खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उनकी रचनात्मकता को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों को उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि उन्हें बच्चों के व्यवहार और गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। यदि किसी बच्चे में अचानक बदलाव दिखाई दे तो उसके कारण को समझने का प्रयास किया जाना चाहिए।
नशे के खिलाफ जागरूकता में शिक्षकों की अहम भूमिका
प्रधानमंत्री ने युवाओं में नशे की बढ़ती समस्या को लेकर भी शिक्षकों से जागरूकता फैलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चों के जीवन में आने वाली चुनौतियों को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को पहचान सकते हैं। ऐसे में उनकी भूमिका केवल कक्षा में पढ़ाने वाले व्यक्ति की नहीं, बल्कि बच्चों के मार्गदर्शक की भी है।
‘हमें किताबों और सिलेबस से बाहर निकलना होगा’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शिक्षा जगत को पहले की तुलना में अब बच्चों के जीवन से और अधिक जुड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जीवन से जुड़े अनुभव और गतिविधियों से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं है। बच्चों के व्यक्तित्व, रचनात्मकता और सोचने की क्षमता का विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पीएम मोदी ने शिक्षिका से मांगी पब्लिक स्पीकिंग की सलाह
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक शिक्षिका से अपनी पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मांगा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर वे उस शिक्षिका के विद्यार्थी होते और एक कुशल वक्ता बनना चाहते, तो उन्हें क्या करना चाहिए। शिक्षिका ने जवाब दिया कि अच्छे वक्ता बनने के लिए सबसे पहले आत्मविश्वास जरूरी है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास लगातार अभ्यास से आता है। शिक्षिका ने यह भी स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री के सामने बात करते हुए वह स्वयं भी थोड़ी घबरा गई थीं।
काशी में ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का किया जिक्र
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में चलाए गए ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि अब महिलाएं स्वयं आगे आकर जांच कराने के लिए तैयार हो रही हैं। प्रधानमंत्री ने बड़े स्तर पर लोगों की स्क्रीनिंग किए जाने के अनुभव का भी जिक्र किया और बताया कि एक ही दिन में बड़ी संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग का रिकॉर्ड भी बना।
शिक्षकों को दी बधाई
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के भीतर मौजूद बचपन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ‘बचपन मरने नहीं देना चाहिए’ और बच्चों के भीतर जिज्ञासा, रचनात्मकता तथा सीखने की भावना को जीवित रखना शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा के साथ संवेदनशीलता और रचनात्मकता को भी प्राथमिकता दें।