डेस्क। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की ज़िंदगी पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फिल्म, जो तीन साल से सेंसर बोर्ड की बंदिशों में फंसी थी, आखिरकार ZEE5 पर चुपके से रिलीज़ हो गई है। फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब 95’ था, जिसे अब ‘सतलज’ नाम से उतारा गया है। सबसे बड़ी जीत यह है कि जिस फिल्म में सेंसर बोर्ड ने 127 कट्स लगाने को कहा था, वह अब बिना किसी कट के दर्शकों के सामने है। फिल्म के आते ही सोशल मीडिया (X) पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। दर्शक भावुक हैं और फिल्म को ‘मस्ट वॉच’ (ज़रूर देखने लायक) बता रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छाए आंसू : “दिलजीत पाजी ने फिर दिल जीत लिया”
‘सतलज’ देखने के बाद दर्शकों की आँखों से आंसू छलक आए। X पर एक यूज़र ने अपना दर्द और गर्व बयां करते हुए लिखा, “अभी ‘सतलज’ फिल्म देखी और देखकर रोना आ गया। दिलजीत पाजी ने तो सच में दिल जीत लिया। उनका फैन होने पर गर्व है। उन्होंने शहीद जसवंत सिंह खालरा के किरदार को पर्दे पर दोबारा ज़िंदा कर दिया है।”
सुधीर मिश्रा ने की तारीफ, डायरेक्टर को दिया ‘स्टैंडिंग ओवेशन’
मशहूर फिल्ममेकर सुधीर मिश्रा भी इस फिल्म को देखकर खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने X पर लिखा:
- डायरेक्टर की हिम्मत: “ZEE5 पर हनी त्रेहान की फिल्म ‘सतलज’ ज़रूर देखें। हनी ने इसे बनाने की जो हिम्मत दिखाई है, उसके लिए उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन मिलना चाहिए।”
- दिलजीत की एक्टिंग: “दिलजीत का काम एकदम सटीक और शानदार है। वह कभी भी कहानी के आड़े नहीं आते, बल्कि हमें उस इंसान के दर्द और सच्चाई को महसूस कराते हैं जो सच को दबाने के खिलाफ लड़ा।”
एक्टिंग के अनसुने सितारे: कंवलजीत सिंह ने चौंकाया
फिल्म में सिर्फ दिलजीत ही नहीं, बल्कि बाकी कलाकारों ने भी अपनी एक्टिंग से रोंगटे खड़े कर दिए हैं:
- सुविंदर विक्की: उन्होंने एक ऐसे पुलिसवाले का किरदार निभाया है जो हत्या के आदेशों का पालन तो करता है, लेकिन अंदर ही अंदर उस पाप के बोझ तले दबा जा रहा है।
- कंवलजीत सिंह (सबसे बड़ा सरप्राइज): दर्शकों के मुताबिक, कंवलजीत सिंह ने अपने करियर की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है। वे बिना किसी दिखावे के हर सीन में अपने किरदार में पूरी तरह डूबे नज़र आए।
क्या है ‘सतलज’ की असली कहानी? कौन थे जसवंत सिंह खालरा?
यह फिल्म 90 के दशक के पंजाब की उस खौफनाक हकीकत को दिखाती है जब खालिस्तानी आंदोलन और आतंकवाद चरम पर था।
- 25 हजार लापता सिखों की लड़ाई: ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा ने उस दौर में अवैध तरीके से गायब किए गए 25,000 सिख युवकों के लिए आवाज़ उठाई थी।
- फेक एनकाउंटर का पर्दाफाश: उन्होंने सबूतों के साथ खुलासा किया था कि पुलिस युवाओं को उठाकर उनका फेक एनकाउंटर कर रही है और लाशों को लावारिस बताकर उनका अंतिम संस्कार कर रही है।
- सच्चाई की कीमत: इस कड़वे सच को सामने लाने की कीमत जसवंत सिंह खालरा को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। पुलिस ने उन्हें उठाया, बेरहमी से टॉर्चर किया और एनकाउंटर के बाद उनकी लाश को एक नहर में फेंक दिया था।
कहाँ देखें: ‘सतलज’ अब बिना किसी कट के ZEE5 पर स्ट्रीम हो रही है।