कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत जांच आगे बढ़ाते हुए कोलकाता में मौजूद पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा होने की बात सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी के वित्तीय प्रबंधन, चुनावी फंड और कथित लेन-देन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
बंगाल पुलिस के बाद ED की एंट्री, आखिर क्यों फ्रीज हुए खाते?
मामले की शुरुआत स्थानीय पुलिस की कार्रवाई से हुई थी। पुलिस ने बागी विधायकों के एक गुट की शिकायत के बाद टीएमसी के तीन प्रमुख बैंक खातों पर ‘डेबिट फ्रीज’ लगा दिया था। इसका मतलब था कि इन खातों से कोई भी निकासी या लेन-देन नहीं किया जा सकता था। शिकायतकर्ता गुट का नेतृत्व विधायक ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। आरोप लगाया गया कि पार्टी के वित्तीय प्रबंधन और फंड के इस्तेमाल में अनियमितताएं हुई हैं। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मामले को अपने हाथ में लेते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया और इसे मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से खंगालना शुरू किया।
ED की जांच के केंद्र में तीन बड़े सवाल
एविएशन और ट्रैवल कंपनियों के जरिए फंड ट्रांसफर का शक
ED की शुरुआती जांच में कुछ ऐसे लेन-देन सामने आए हैं, जिनमें एविएशन और ट्रैवल कंपनियों के जरिए बड़ी रकम के ट्रांसफर का संदेह जताया गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या 150 करोड़ रुपये से अधिक की संदिग्ध राशि किसी गलत तरीके से पार्टी फंड में पहुंचाई गई थी।
कोलकाता में कई ठिकानों पर छापेमारी
मामले की जांच के दौरान ED की टीमों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की सुरक्षा के साथ कोलकाता में कई जगहों पर छापेमारी की। जांच के दायरे में एक निजी चार्टर फर्म ‘केयरवेल एविएशन’, उसके निदेशक और कथित इलेक्टोरल ट्रस्ट से जुड़े कुछ परिसर भी शामिल हैं।
अवैध कमाई को वैध दिखाने की जांच
ED यह भी जांच कर रही है कि कहीं इन बैंक खातों का इस्तेमाल भ्रष्टाचार, जबरन वसूली या अवैध गतिविधियों से जुड़े पैसों को सफेद करने के लिए तो नहीं किया गया। एजेंसी संदिग्ध लेन-देन, फंड के स्रोत और लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर रही है।
ममता बनर्जी गुट ने खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा
ED की कार्रवाई के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के मुख्य गुट ने कानूनी रास्ता अपनाया है। पार्टी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बैंक खातों पर लगी रोक को चुनौती दी है। TMC का कहना है कि खातों के फ्रीज होने से पार्टी की राजनीतिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और चुनावी कामकाज में परेशानी आ रही है। मामले पर अदालत में सुनवाई जारी है।
चुनावी झटके के बाद TMC में बढ़ा अंदरूनी संघर्ष
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पार्टी के भीतर पहले से ही मतभेदों की खबरें सामने आ रही थीं। हालिया चुनावी नुकसान के बाद पार्टी के फंड, संपत्तियों और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर अंदरूनी खींचतान तेज हुई। इसी बीच बागी विधायकों के गुट ने पार्टी के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
विवाद की पूरी टाइमलाइन: शिकायत से ED की कार्रवाई तक
- बागी विधायकों के गुट ने टीएमसी के वित्तीय प्रबंधन को लेकर शिकायत दर्ज कराई।
- पुलिस ने पार्टी के तीन प्रमुख बैंक खातों पर डेबिट फ्रीज लगाया।
- ED ने PMLA के तहत जांच शुरू की।
- कोलकाता में कई ठिकानों पर छापेमारी की गई।
- करीब ₹440 करोड़ वाले बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया।
अब आगे क्या? ED जांच से खुलेंगे वित्तीय राज के पन्ने
फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, कंपनियों के लेन-देन और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह मामला केवल वित्तीय विवाद है या इसके पीछे बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग का नेटवर्क सक्रिय था। इस कार्रवाई ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले समय में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर अहम रहने वाला है।