नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड-ऑफ-32 में एक ऐसा ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है जिसने फुटबॉल जगत को हिलाकर रख दिया है। चार बार की चैंपियन और फीफा रैंकिंग में 10वें नंबर पर काबिज जर्मनी को 41वें नंबर की टीम पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया है। हालांकि, इस समय पराग्वे की जीत से ज्यादा चर्चा एक विवादास्पद VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) फैसले की हो रही है, जिसे लेकर जर्मन खेमे में भारी आक्रोश है।
एक्स्ट्रा टाइम का वो ‘विवादास्पद’ ड्रामा
मैच में रोमांच की सारी हदें पार हो गईं जब निर्धारित समय तक स्कोर 1-1 की बराबरी पर रहा। इसके बाद मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंचा:
- 101वां मिनट: जर्मनी के जोनाथन टाह ने कॉर्नर किक पर एक शानदार हेडर के जरिए गेंद को गोलपोस्ट में डाल दिया। जर्मनी जीत के जश्न में डूब चुका था।
- VAR का दखल: मोरक्को के ऑन-फील्ड रेफरी जलाल जायद को VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) रूम से रिव्यू का इशारा मिला।
- फैसला: रिप्ले में देखा गया कि गोल के दौरान जर्मन डिफेंडर वाल्डेमार एंटन का पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल से संपर्क (कॉन्टैक्ट) हुआ था। काफी देर तक स्क्रीन देखने के बाद रेफरी ने गोल को खारिज कर दिया, जिससे जर्मन खिलाड़ी और फैंस सन्न रह गए।
“यह दिनदहाड़े डकैती है”— थॉमस मुलर का फूटा गुस्सा
जर्मनी के दिग्गज खिलाड़ी थॉमस मुलर ने मैच के बाद अपनी भड़ास निकालते हुए इस फैसले को पूरी तरह गलत बताया। मुलर ने कहा:
“ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं पता कि VAR अब क्या देख रहा है! जोनाथन टाह का वह गोल पूरी तरह जायज था। आज हम जर्मन ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। यह फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर दिनदहाड़े डकैती है। पूरे टूर्नामेंट में इससे कहीं ज्यादा आक्रामक खेल को हरी झंडी दी गई, तो फिर इसे फाउल क्यों माना गया? ऐसा लगता है कि आज हमें तकनीक ने बचाया नहीं, बल्कि सजा दी है।”
जर्मनी के नाम दर्ज हुआ 50 साल पुराना शर्मनाक रिकॉर्ड
यह हार जर्मनी के फुटबॉल इतिहास के सबसे काले पन्नों में दर्ज हो गई है। इस मैच के साथ कुछ बड़े आंकड़े सामने आए हैं:
- रैंकिंग का बड़ा फासला: फीफा रैंकिंग में 31 स्थानों के अंतर के बावजूद पराग्वे ने जर्मनी को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
- 50 साल बाद शूटआउट में हार: बड़े इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स (वर्ल्ड कप और यूरो) के इतिहास में जर्मनी की यह केवल दूसरी पेनल्टी शूटआउट हार है। इससे पहले जर्मनी को 50 साल पहले, यानी 1976 के यूरो कप फाइनल में चेकोस्लोवाकिया के खिलाफ शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा था।