नई दिल्ली/ कोलकाता । भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के टोल प्लाजा पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देशव्यापी कार्रवाई शुरू की है। कोलकाता, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में फैले इस नेटवर्क पर ED की टीमों ने 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी इस गिरोह से जुड़े डिजिटल सबूत, मनी ट्रेल और मुख्य लाभार्थियों का पता लगाने में जुटी है।
देशभर के 14 ठिकानों पर एक साथ दबिश
मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) की धारा 17 के तहत की जा रही इस कार्रवाई का दायरा 7 प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक फैला है:
- छापेमारी वाले राज्य: उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल (कोलकाता), राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर।
- कार्रवाई का उद्देश्य: अनधिकृत सॉफ्टवेयर के डिजिटल साक्ष्य जुटाना, फर्जी वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज जब्त करना और इस अवैध कमाई के अंतिम लाभार्थियों की पहचान करना।
फर्जी सॉफ्टवेयर और रसीदों का खेल: कैसे हुआ घोटाला?
फॉरेंसिक जांच और NHAI के आंतरिक रिकॉर्ड्स में टोल प्लाजा पर अवैध सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है:
- समानांतर सिस्टम: आरोपियों ने टोल बूथों पर अनधिकृत (Unauthorised) सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर रखा था, जिसके जरिए वाहनों को फर्जी रसीदें थमाई जाती थीं।
- अकाउंटिंग बायपास: टोल से वसूला गया भारी कैश NHAI के आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम में दर्ज ही नहीं होता था, बल्कि उसे सीधे निजी खातों और शेल कंपनियों में डायवर्ट कर दिया जाता था।
27 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी और फर्जी ITC का सिंडिकेट
जांच में टोल हेरफेर के साथ-साथ एक बड़े संगठित टैक्स चोरी रैकेट की कड़ियां भी जुड़ी पाई गई हैं:
- फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल: आरोपी कंपनियों और उनके निदेशकों ने बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के जाली इनवॉइस और फर्जी ई-वे बिल तैयार किए।
- 10.28 करोड़ का बोगस ITC: जाली ट्रांसपोर्ट रसीदों और शेल कंपनियों के नेटवर्क के सहारे 10.28 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम किया गया और आगे ट्रांसफर किया गया।
- खजाने को 27.02 करोड़ का नुकसान: इस सुनियोजित धोखाधड़ी से सरकारी खजाने को कुल 27.02 करोड़ रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान पहुंचा।
- कैश लेयरिंग मॉडल: लाभार्थी कंपनियों से आने वाली रकम को उसी दिन कई शेल फर्मों के खातों में घुमाया जाता था और अंत में बैंक नेटवर्क से नकदी के रूप में बाहर निकाल लिया जाता था।