नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी का एक विशाल तेल टैंकर “HUGE” अमेरिकी नौसैनिक निगरानी को चकमा देकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र तक पहुंच गया। ट्रैकिंग एजेंसी TankerTrackers.com के अनुसार, यह Very Large Crude Carrier (VLCC) करीब 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा था, जिसकी कीमत लगभग 220 मिलियन डॉलर बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह जहाज आखिरी बार श्रीलंका के पास देखा गया था और अब इंडोनेशिया के लोम्बोक जलडमरूमध्य से होते हुए रियाउ द्वीपसमूह की ओर बढ़ रहा है।
52 जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को पार कर चुके हैं
खास बात यह है कि इस जहाज ने 20 मार्च के बाद से अपना Automatic Identification System ( AIS) बंद कर दिया था, जिससे इसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो गई। ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि अब तक 52 जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को पार कर चुके हैं। हालांकि Al Jazeera के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नाकेबंदी प्रभावी है और इससे ईरान को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है।अमेरिकी सेना के US Central Command ने भी पुष्टि की है कि उनका युद्धपोत USS New Orleans (LPD-18) अरब सागर में तैनात है और पिछले 20 दिनों में 48 जहाजों को मोड़कर नाकेबंदी लागू कराई गई है।
नाकेबंदी सिर्फ ईरान के बंदरगाहों पर लागू है
अमेरिका ने साफ किया है कि यह नाकेबंदी सिर्फ ईरान के बंदरगाहों पर लागू है, न कि Strait of Hormuz पर। लेकिन इसी जलडमरूमध्य में सबसे ज्यादा तनाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति यहीं से गुजरती है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह ईरान के नए प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने संदेह जताया कि कोई समझौता जल्द संभव होगा। रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने पाकिस्तान के जरिए 14 बिंदुओं का प्रस्ताव भेजा है।अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने ईरान को पैसे देकर सुरक्षित रास्ता लिया, तो उन पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे चाहे भुगतान नकद हो या डिजिटल माध्यम से।