नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशों से आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर 200% तक टैरिफ लगाने की योजना का ऐलान किया है। इस फैसले का मकसद अमेरिका की विदेशी दवाओं पर निर्भरता कम करना और दवा कंपनियों को अमेरिका में ही मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि, भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए फिलहाल राहत की खबर यह है कि प्रस्तावित टैरिफ व्यवस्था में पहले दो वर्षों तक किसी तरह का शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे कंपनियों को अपनी रणनीति बदलने और अमेरिकी बाजार में भविष्य की तैयारी करने का समय मिल जाएगा।
क्या है ट्रंप का नया टैरिफ प्लान?
ट्रंप प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लागू करने के लिए तीन चरणों वाला रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत 1 अगस्त 2026 से अगले दो वर्षों तक अमेरिका आने वाली जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इसके बाद एक वर्ष तक इन दवाओं पर 100% आयात शुल्क लगाया जाएगा और चौथे वर्ष से यह बढ़कर 200% हो जाएगा। सरकार का कहना है कि इस चरणबद्ध व्यवस्था का उद्देश्य कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन शुरू करने का पर्याप्त समय देना है।
भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए क्यों अहम है अमेरिकी बाजार?
भारत दुनिया के सबसे बड़े जेनेरिक दवा निर्यातकों में शामिल है और अमेरिका उसका सबसे बड़ा बाजार है। सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला, ल्यूपिन, अरबिंदो फार्मा और जाइडस लाइफसाइंसेज जैसी भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में मजबूत मौजूदगी है। अमेरिका में बिकने वाली लगभग 40% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति भारत से होती है, जबकि वहां लिखी जाने वाली 90% से अधिक प्रिस्क्रिप्शन दवाएं जेनेरिक होती हैं। यही वजह है कि अमेरिकी बाजार भारतीय दवा कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारतीय कंपनियों पर क्या होगा असर?
फिलहाल भारतीय कंपनियों को इस फैसले से तत्काल नुकसान होने की संभावना नहीं है। अगस्त 2028 तक जीरो टैरिफ रहने के कारण कंपनियों के पास अपनी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन रणनीति में बदलाव करने का समय होगा। इस दौरान वे अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी कर सकती हैं। हालांकि, राहत की यह अवधि खत्म होने के बाद 100% और फिर 200% टैरिफ लागू होने पर भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली जेनेरिक दवाओं की लागत काफी बढ़ सकती है। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होने की आशंका है।
200% टैरिफ से बचने के लिए क्या करना होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय फार्मा कंपनियों के सामने दो प्रमुख विकल्प होंगे। पहला, अमेरिका में अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करना और दूसरा, वहां की स्थानीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ साझेदारी करना या उनका अधिग्रहण करना। यदि कंपनियां समय रहते स्थानीय उत्पादन शुरू कर देती हैं तो वे भविष्य में भारी आयात शुल्क से बच सकती हैं।
ब्रांडेड दवाओं से कैसे अलग है यह फैसला?
यह प्रस्ताव पहले की उन नीतियों से अलग है जो मुख्य रूप से ब्रांडेड दवाओं पर केंद्रित थीं। इस बार ट्रंप प्रशासन का फोकस जेनेरिक दवाओं पर है, जो अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। सरकार का मानना है कि चरणबद्ध टैरिफ कंपनियों को अमेरिका में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।
क्या अमेरिका में दवाएं महंगी हो जाएंगी?
अगर 2028 के बाद भारत जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर 100% या 200% टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका में आवश्यक दवाओं की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर मरीजों, स्वास्थ्य बीमा कंपनियों और पूरे हेल्थकेयर सिस्टम पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस प्रस्ताव का अमेरिकी स्वास्थ्य संगठनों और उपभोक्ताओं की ओर से विरोध भी देखने को मिल सकता है।
क्या भारतीय कंपनियों को अभी चिंता करने की जरूरत है?
फिलहाल भारतीय दवा कंपनियों के लिए स्थिति चिंताजनक नहीं मानी जा रही है। दो वर्षों की जीरो-टैरिफ अवधि उन्हें अपनी रणनीति मजबूत करने और अमेरिका में निवेश बढ़ाने का अवसर देती है। लेकिन यदि इस दौरान कंपनियां स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम नहीं उठाती हैं तो 2028 के बाद बढ़ने वाले आयात शुल्क का असर उनके निर्यात और अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी पर पड़ सकता है।
भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए फिलहाल यह राहत की खबर
ट्रंप का प्रस्तावित 200% टैरिफ प्लान अमेरिकी दवा उद्योग को घरेलू उत्पादन की ओर ले जाने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए फिलहाल यह राहत की खबर है क्योंकि उन्हें तैयारी के लिए दो वर्षों का समय मिलेगा। लेकिन लंबे समय में अमेरिकी बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए उन्हें निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन से जुड़ी रणनीतियों में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।