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बंगाल में अब बिना परमिट नहीं होगा पशु वध, गोवंश की हत्या पर सुवेंदु सरकार सख्त, ये नियम नहीं माने तो जाना होगा जेल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले शुभेन्दु सरकार ने बड़ा आदेश जारी किया है। सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा कि पशु वध को लेकर अब अनुमति की आवश्यकता होगा। बीजेपी सरकार ने 1950 के बंगाल कानून और. . .

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले शुभेन्दु सरकार ने बड़ा आदेश जारी किया है। सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा कि पशु वध को लेकर अब अनुमति की आवश्यकता होगा। बीजेपी सरकार ने 1950 के बंगाल कानून और 2018 के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बिना अनिवार्य फिटनेस सर्टिफिकेट के किसी भी गाय, बैल या भैंस के वध पर पूरी तरह रोक लगाने का नोटिस जारी किया है।

कब जारी किया जाएगा फिटनेस सर्टिफिकेट

सरकारी आदेश के अनुसार, फिटनेस सर्टिफिकेट तभी जारी किया जाएगा जब संबंधित नगरपालिका के चेयरपर्सन या पंचायत समिति के अध्यक्ष और सरकारी पशु चिकित्सक संयुक्त रूप से लिखित सहमति दें। इसमें पशु की उम्र 14 वर्ष से अधिक हो चुकी है और वह काम या प्रजनन के योग्य नहीं है। इसके अलावा यदि पशु बुढ़ापे, चोट, विकृति या किसी असाध्य बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया है, तभी उसे वध की अनुमति मिल सकेगी।
सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पर भी रोक लगा दी गई है। अब केवल नगर निगम के अधिकृत बूचड़खानों या स्थानीय प्रशासन द्वारा तय किए गए स्थानों पर ही पशुओं का वध किया जा सकेगा।

सजा का होगा प्रावधान

वहीं नियमों का उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट, 1950 का उल्लंघन करने पर छह महीने तक की जेल, 1000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है।
यदि किसी व्यक्ति को फिटनेस सर्टिफिकेट देने से मना किया जाता है, तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास अपील कर सकता है।

1950 कानून और 2018 हाईकोर्ट आदेश का हवाला

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में अब सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध करना न केवल धार्मिक या सामाजिक वर्जना है, बल्कि कानूनन एक ‘संगीन अपराध’ की श्रेणी में आएगा। कलकत्ता हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद, राज्य की नई भाजपा सरकार ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ को सख्ती से लागू करने के लिए नई अधिसूचना जारी कर दी है।

अदालत के आदेश का अनुपालन

इस फैसले के साथ ही राज्य में खुले में पशु बलि या वध की परंपराओं और अवैध बूचड़खानों पर लगाम कसने की तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्य सरकार द्वारा जारी आठ सूत्रीय अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम हाई कोर्ट के 2018 के ऐतिहासिक फैसले और 2022 के सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ‘जीरो टालरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी।

दोहरे सत्यापन की अनिवार्य शर्त

नगर पालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के अध्यक्ष के साथ एक सरकारी पशु चिकित्सक संयुक्त रूप से यह प्रमाण पत्र देंगे। वध की अनुमति तभी मिलेगी जब पशु 14 वर्ष से अधिक आयु का हो, काम करने या प्रजनन के लायक न हो, या गंभीर चोट/बीमारी के कारण स्थायी रूप से अक्षम हो गया हो।

केवल निर्धारित वधशालाओं का उपयोग

जिन पशुओं को वध के लिए प्रमाणित किया गया है, उन्हें केवल सरकार द्वारा चिह्नित नगर पालिका बूचड़खानों या प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर ही वध किया जा सकेगा।

सार्वजनिक स्थलों पर पूर्ण प्रतिबंध

खुले स्थानों, सड़कों या जन समागम वाले क्षेत्रों में किसी भी पशु का वध करना अब कठोरता से प्रतिबंधित है। निरीक्षण में बाधा डालना अपराध: यदि कोई सरकारी अधिकारी या पशु चिकित्सक बूचड़खानों के निरीक्षण के लिए आता है, तो उसे रोकना कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

सजा का प्रावधान: 6 महीने की जेल और जुर्माना

प्रशासन ने इस अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए दंडात्मक प्रावधानों को भी रेखांकित किया है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसे:

  1. अधिकतम छह महीने का कारावास।
  2. 1,000 रुपये तक का जुर्माना।
  3. या जेल और जुर्माना दोनों भुगतने पड़ सकते हैं।

बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी नई सरकार की यह अधिसूचना पशु क्रूरता निवारण और सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेष रूप से घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने और अदालती आदेशों के सम्मान के लिए इसे प्रशासन का बड़ा कदम माना जा रहा है।

बीजेपी ने दर्ज की शानदार जीत

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी ने शानादर जीत दर्ज की है। 294 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत हासिल की है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को 77 सीटे मिली थी।
इस चुनाव में टीएमसी के कई बड़े नेताओं को भी हार का सामना करना पड़ा। भवानीपुर से शुभेन्दु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया है। यह पहली बार नहीं है जब शुभेन्दु ने ममता को हराया है, उससे पहले 2021 विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से हराया था।

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