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बकरीद से पहले कलकत्ता HC ने कहा- गाय कुर्बानी का हिस्सा नहीं, क्या अब बंगाल में भैंस की कुर्बानी भी नहीं हो पाएगी?

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की पहली बार बनी सरकार नए-नए फैसले ले रही है। कुछ फैसलों पर विवाद भी हो रहे हैं. बकरीद (ईद-उल अजहा) पर जानवरों की कुर्बानी पर पाबंदियों से जुड़ा मामला तूल पकड़ रहा. . .

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की पहली बार बनी सरकार नए-नए फैसले ले रही है। कुछ फैसलों पर विवाद भी हो रहे हैं. बकरीद (ईद-उल अजहा) पर जानवरों की कुर्बानी पर पाबंदियों से जुड़ा मामला तूल पकड़ रहा है। 21 मई को इस मुद्दे पर कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई तो हुई लेकिन सरकार के विरोधी पक्षकारों को कोई राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने पाबंदियों से जुड़ी अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साथ ही कोर्ट ने साफ कह दिया कि गाय की कुर्बानी इस्लाम का हिस्सा नहीं है। लेकिन विवाद इससे आगे चला गया है। मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि बंगाल में जो नियम लागू किए गए हैं उनके हिसाब से भैंस की कुर्बानी भी मुश्किल हो जाएगी।
शुभेंदु अधिकारी सरकार ने 13 मई को पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रित अधिनियम, 1950 को सख्ती से लागू करने का आदेश जारी किया था। सरकारी की अधिसूचना के मुताबिक-पशु वध से पहले सर्टिफिकेट को अनिवार्य किया गया। इसके अलावा ये भी कहा गया कि ये सर्टिफिकेट सिर्फ उन्हीं जानवरों के लिए जारी किए जाएंगे जिनकी उम्र 14 वर्ष से ज्यादा की हो या फिर किसी बीमारी के कारण, चोट के कारण या अन्य किसी वजह से वे जानवर अक्षम हो गए हों। इसका मतलब ये हुआ, अगर बकरीद पर कोई कुर्बानी करना चाहे तो सिर्फ उन्हीं जानवरों के लिए सर्टिफिकेट मिल सकता है जो या तो बूढ़े हो गए हों या किसी इस्तेमाल के न बचे हों।

धार्मिक मान्यता: स्वस्थ जानवर की कुर्बानी

एक तरफ बंगाल सरकार की तरफ से कहा गया है कि बीमार या अक्षम जानवरों की कुर्बानी के लिए ही सर्टिफिकेट मिल पाएगा, दूसरी तरफ अगर इस्लाम धर्म से जुड़ी कुर्बानी की मान्यताओं को देखा जाए तो ये उससे बहुत विपरीत है। कुर्बानी के लिए ये कहा जाता है कि एकदम स्वस्थ जानवर को ईद पर कुर्बानी के लिए खरीदना चाहिए। अगर किसी जानवर को चोट लगी हो या उसके अंदर किसी भी तरह की कमी हो तो उस जानवर की कुर्बानी नहीं की जाती है। कलकत्ता हाई कोर्ट में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की तरफ से पेश हुए वकील ने भी कोर्ट में इसी तरह की दलील रखी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस्लाम में कुर्बानी के लिए स्वस्थ पशुओं की कुर्बानी देना अनिवार्य है, न कि बूढ़े या अक्षम पशुओं की।

अब क्या होगा?

बंगाल सरकार ने जो नियम जारी किए हैं, वो बकरीद से पहले जरूर आए हैं लेकिन ये सिर्फ बकरीद तक सीमित नहीं हैं। ये नियम आगे भी लागू रहेंगे। यानी बकरीद के बाद भी इन्हीं शर्तों के साथ पशु वध की मंजूरी मिल सकेगी। हाई कोर्ट ने इसपर रोक भी नहीं लगाई है। ऐसे में सवाल है कि क्या बंगाल में बकरीद पर हर साल की सामान्य तरीके से कुर्बानी नहीं हो पाएगी? कलकत्ता हाई कोर्ट में भी ये सवाल उठा और मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से मांग रखी गई कि पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 की धारा 12 के तहत बकरीद पर कुर्बानी की छूट दी जाए।

क्या है ये धारा:

अधिनियम की धारा 12 में राज्य सरकार को ये अधिकार है कि अगर वो चाहे तो धार्मिक आयोजनों के हिसाब से पशु वध के नियमों में छूट दे सकती है। याचिकाकर्ताओं की मांग पर हाई कोर्ट ने भी सहमति जताई. मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शुभेंदु सरकार को इस बारे में फैसला लेने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा, ”हम यह निर्देश देते हैं कि राज्य कुछ याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई छूट के संबंध में 1950 के अधिनियम की धारा 12 के अनुसार निर्णय ले।”

CM शुभेंदु अब क्या करेंगे?

कोर्ट ने निर्देश दे दिया है, अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को फैसला लेना है कि क्या वो बकरीद पर कुर्बानी के लिए कुछ छूट देते हैं या नहीं। कोर्ट के आदेश के अनुसार, सरकार को 24 घंटे के अंदर इस पर फैसला लेना है, यानी आदेश कल 21 मई को आया था, जिस हिसाब से आज संभावना है कि शुभेंदु सरकार इस पर कोई निर्णय ले। बकरीद अगले हफ्ते 28 मई को मनाई जाएगी।

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