नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र के द्वीप राष्ट्र सेशेल्स ने अपनी स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान “गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन” से सम्मानित किया है। यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और ग्रीन विजन को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए दिया गया।
सेशेल्स सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
तीन दिवसीय दौरे पर सेशेल्स पहुंचे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी इस समय सेशेल्स के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। स्टेट हाउस पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उनका स्वागत सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने किया। यह यात्रा 27 जून से 29 जून तक चलेगी और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है।
सम्मान स्वीकार करते हुए पीएम मोदी का बयान
सम्मान स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 140 करोड़ भारतीयों और भारत-सेशेल्स की 50 वर्षों की मित्रता को समर्पित बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के बीच मजबूत और भरोसेमंद रिश्तों का प्रतीक है।
पर्यावरण और विकास पर भारत की वैश्विक भूमिका
सेशेल्स सरकार के अनुसार, यह सम्मान भारत के उस दृष्टिकोण को वैश्विक मान्यता देता है जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की नीति शामिल है। भारत की “महासागर विजन” और “नेबरहुड फर्स्ट” नीति को भी इस यात्रा के दौरान और मजबूती मिलने की बात कही गई है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती पहचान
यह पहला अवसर नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला हो। हाल के वर्षों में उन्हें कई प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कारों से नवाजा गया है। मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था FAO ने उन्हें “एग्रीकोला मेडल” प्रदान किया था, जो खाद्य सुरक्षा, आधुनिक कृषि तकनीक और सतत कृषि विकास में योगदान के लिए दिया गया। वहीं 2018 में उन्हें “सियोल पीस प्राइज” और संयुक्त राष्ट्र द्वारा “चैंपियंस ऑफ द अर्थ” जैसे सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं।
भारत-सेशेल्स संबंधों में नया अध्याय
सेशेल्स का यह सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक प्रभाव का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौरा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा और दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ेगा।