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शुभेंदु अधिकारी बनेंगे सीएम या बीजेपी किसी और चेहरे पर खेलेगी दांव?, जाने अमित शाह की क्राइटेरिया में सबसे फिट कौन बैठ रहा

डेस्क। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि राज्य में बीजेपी मुख्यमंत्री के तौर पर किस चेहरे को तरजीह दे सकती है। पार्टी को 207 सीटें मिली हैं, जो. . .

डेस्क। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि राज्य में बीजेपी मुख्यमंत्री के तौर पर किस चेहरे को तरजीह दे सकती है। पार्टी को 207 सीटें मिली हैं, जो कि दो तिहाई बहुमत से अधिक है, जबकि टीएमसी 80 सीटों पर आ गई है। बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया है।
कुछ राज्यों में भी बीजेपी ने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था, जैसे कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में और वहां आश्चर्यजनक तरीक़े से एक नए चेहरे को सीएम बना दिया गया।

बंगाल में 15 साल के बाद सत्ता परिवर्तन

पश्चिम बंगाल में 15 साल के बाद सत्ता परिवर्तन हो गया है और बीजेपी सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख भी फाइनल हो गई है। सूबे के सियासी इतिहास में पहली बार बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनने जा रही है। ऐसे में सभी की मन में एक ही सवाल है कि बीजेपी किसे मुख्यमंत्री बनाकर सत्ता की कमान सौंपी जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद बंगाल के पर्यवेक्षक के तौर पर गुरुवार शाम कोलकाता पहुंच रहे हैं। इस दौरान वो बीजेपी विधायकों के साथ बातचीत कर मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करेंगे। मुख्यमंत्री की रेस में कई नेताओं के नाम चल रहे हैं, जिसमें ममता बनर्जी को मात देने वाले शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे है। बंगाल में सीएम की रेस में शुभेंदु अधिकारी ही नहीं बल्कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य से लेकर दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉलऔर सुकांत मजूमदार जैसे आधा दर्जन नेताओं के नाम शामिल है। ऐसे में सवाल उठता है कि अमित शाह के सियासी क्राइटेरिया में कौन नेता फिट बैठेगा?

बंगाल सीएम के लिए शाह की क्राइटेरिया?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले फेज की वोटिंग के बाद ही अमित शाह ने संकेत दे दिए थे कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा? कोलकाता में प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान अमित शाह से पूछा गया था कि बीजेपी सत्ता में आती है तो बंगाल में कौन मुख्यमंत्री होगा। इसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा था कि जो भी होगा बंगाल की धरती का बेटा है, बंगाल में पढ़ा-लिखा है, बंगाली बोलता है और बीजेपी का कार्यकर्ता है, वही मुख्यमंत्री होगा?
अमित शाह ने कहा था कि मैं बंगाल के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि अगला मुख्यमंत्री कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो बंगाल में पैदा हुआ और पढ़ा-लिखा हो, और बंगाली अच्छी तरह बोलता हो। इस तरह से अमित शाह ने बीजेपी के सीएम बनाने की क्राइटेरिया बता दी थी। अब बीजेपी सत्ता में आई है तो उस लिहाज से नए मुख्यमंत्री का चयन होगा, जिसे अमलीजामा पहनाने के लिए खुद पर्यवेक्षक के तौर पर कोलकाता जा रहे हैं, जहां विधायकों से बातचीत करके नए सीएम के नाम का ऐलान करेंगे?

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शुभेंदु अधिकारी बनेंगे अमित शाह की पसंद

अमित शाह के क्राइटेरिया में शुभेंदु अधिकारी सबसे फिट बैठते हैं। भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को हराकर शुभेंदु अधिकारी ने अपनी ताकत साबित की है। बंगाल से दिल्ली तक के सियासी कॉरिडोर में सबसे ज्यादा चर्चा शुभेंदु की हो रही है। सुवेंदु अधिकारी ने 2021 में नंदीग्राम में ममता को हराया था और विपक्ष के नेता बने थे और इस बार उन्होंने नंदीग्राम से जीतने के साथ-साथ भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को 15,000 से ज्यादा वोटों से मात दी है। ऐसे में सुवेंदु अधिकारी के नाम को नजरअंदाज करना मुश्किल है।
शुभेंदु अधिकारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के क्राइटेरिया में भी फिट बैठ रहे हैं। बंगाल में जन्म लिए हैं और बंगाल में पढ़े लिखे हैं। यही नहीं बीजेपी में आए हुए भी उन्हें छह साल हो गए हैं। अमित शाह को ऐसे नेता पसंद आते हैं, जो ‘आक्रामक’ होनेके साथ प्रशासन पर मजबूत पकड़ रखता हो। शुभेंदु के पास मंत्री रहने का भी अनुभव है और वे राज्य के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं.’हिंदुत्व’ और ‘विकास’ के समन्वय के लिए वे शाह की पहली पसंद हो सकते हैं।

समिक भट्टाचार्य कहीं छुपे रुस्तम न साबित हों?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी जहां नैचुरल दावेदार हैं तो वहीं उनके बाद समिक भट्टाचार्य का नाम है। समिक भट्टाचार्य एक ऐसा नाम हैं,जिन्हें बीजेपी का ‘बौद्धिक चेहरा’माना जाता है। चुनाव नतीजों के बाद जब अमित शाह कोलकाता में मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन कर रहे हैं, तो समिक भट्टाचार्य का नाम ‘डार्क हॉर्स’ (छुपा-रुस्तम) के रूप में तेजी से उभरा है. संघ और बीजेपी दोनों की पसंद माने जाते हैं।
समिक भट्टाचार्य के पास बंगाली-शिक्षिक मिडिल-क्लास और सभी ग्रुप्स के बीच कोऑर्डिनेशन बनाए रखने की क्षमता है। भट्टाचार्य पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से एक अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने शाह और सुनील बंसल मार्गदर्शन में पार्टी के पुराने नेताओं को एक साथ रखकर कमल खिलाने में कामयाब रहे.समिक में बंगालियों और बंगाली कल्चर को रिप्रेजेंट करने की काबिलियत है। अमित शाह ये भी जानते हैं कि बंगाल की सत्ता चलाने के लिए केवल आक्रामकता काफी नहीं है,बल्कि बंगाल के प्रबुद्ध समाज (इंटेलिजेंटिया) को साथ लेना भी जरूरी है।

दिलीप घोष बीजेपी के’जमीनी योद्धा’ और कैडर की पसंद

बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष का नाम भी सीएम की रेस में है। बंगाल में बीजेपी को शून्य से शिखर तक पहुंचाने में दिलीप घोष का अहम रोल रहा है। वे ‘खालिस बंगाली’ अंदाज में बात करते हैं और कार्यकर्ताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।। अमित शाह को ऐसा व्यक्ति पसंद है जो मुश्किल वक्त में पार्टी के साथ खड़ा रहा हो. हालांकि, दिलीप घोष की बेबाक बयानबाजी कभी-कभी अनुशासन के आड़े आती है, लेकिन उनकी ‘फाइटिंग स्पिरिट’ उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।

सुकांत मजूमदार ‘संगठन’और ‘शालीनता’ का मेल

पश्चिम बंगाल में सीएम की रेस में अमित शाह किसी ऐसे चेहरे की तलाश में हैं, जो विवादों से दूर रहे और संगठन के साथ तालमेल बिठा सके, तो सुकांत मजूमदार रेस में आगे हैं। वे पढ़े-लिखे हैं (प्रोफेसर रहे हैं) और पश्चिम बंगाल के भद्रलोक समाज में उनकी अच्छी छवि है। सुकांत एक ‘लो-प्रोफाइल’ लेकिन मेहनती नेता हैं, जो संघ (RSS) और पार्टी के बीच सेतु का काम कर सकते हैं. बीजेपी अपने फैसले से अक्सर चौंकाती रही है।

अग्निमित्रा पॉल ‘महिला शक्ति’ और नया प्रयोग

बीजेपी पश्चिम बंगाल में ‘महिला मुख्यमंत्री’ का कार्ड खेलते हैं, तो अग्निमित्रा पॉल बड़ी दावेदार होंगी। दूसरी बार बीजेपी के टिकट पर विधायक बनी है। बंगाल में उन्होंने महिला सुरक्षा और ‘आरजी कर’ जैसे मुद्दों पर ममता सरकार को पुरजोर तरीके से घेरा है। बंगाल में ‘नारी शक्ति’ ने बीजेपी को वोट दिया है। ममता बनर्जी के जवाब में एक महिला मुख्यमंत्री देना शाह की ‘मास्टरस्ट्रोक’ वाली राजनीति का हिस्सा हो सकता है।

उत्पल महाराज को बंगाल का योगी कहा जाता है?

पश्चिम बंगाल में एक नाम और भी चर्चा में है, जो उत्पल महाराज है। उन्हें बंगाल का योगी कहा जाता है। वे बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच इतना जाने-माने नहीं है, लेकिन आरएसएस और भगवा इकोसिस्टम में बहुत पॉपुलर। वह धार्मिक संस्था में अपने पद से इस्तीफा दे दिया और कालियागंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़े हैं और बड़े अंतर से जीते हैं। बंगाल में हिंदू वोटों को एक साथ लाने में अहम रोल अदा किया है।

अमित शाह पश्चिम बंगाल में भी क्या चौंकाएंगे?

अमित शाह के क्राइटेरिया में शुभेंदु अधिकारी सबसे मजबूत हैं, क्योंकि उनके पास ‘विजयी सेनापति’ का तमगा है। लेकिन, शाह का इतिहास रहा है कि वे अक्सर ऐसा चेहरा सामने लाते हैं जिसकी चर्चा मीडिया में सबसे कम होती है। बीजेपी कई राज्यों में सीएम के नाम का ऐलान कर चौंकाया है, क्या उसी तरह से बंगाल में भी किसी नए नेता के नाम का ऐलान करेंगे।
हालांकि, अमित शाह का स्पष्ट नजरिया है कि जो प्रशासन को चुस्त रखे और बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ पर लगाम लगाए। बंगाल को ‘सोनार बांग्ला’ बनाने केविजन को लागू कर सके. इस राज से पर्दा 8 मई को उठेगा, जब अमित शाह बीजेपी विधायक दल की बैठक करके नेता के नाम का फाइनल चयन करेंगे?

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