Home » बिजनेस » शेयर बाजार में मचा हड़कंप: सेंसेक्स 788 अंक टूटा, निफ्टी 269 अंक फिसला; कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता

शेयर बाजार में मचा हड़कंप: सेंसेक्स 788 अंक टूटा, निफ्टी 269 अंक फिसला; कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार सुबह भारी बिकवाली देखने को मिली। मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़ों के बावजूद पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया।. . .

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार सुबह भारी बिकवाली देखने को मिली। मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़ों के बावजूद पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। वैश्विक बाजारों में बने ‘रिस्क ऑफ’ माहौल का असर घरेलू बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 788.52 अंक गिरकर 76,155.76 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 269 अंक फिसलकर 23,786.80 पर आ गया। दूसरी ओर, शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2 पैसे कमजोर होकर 94.97 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

क्यों आई बाजार में इतनी बड़ी गिरावट?

बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के मुताबिक, वैश्विक निवेशकों के बीच इस समय ‘रिस्क ऑफ’ की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम एशिया में, खासकर अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को अचानक ऊपर धकेल दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत में रातों-रात करीब 5 प्रतिशत का उछाल आया और यह 96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। तेल की कीमतों में इस तरह की तेजी से दुनियाभर में महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका बढ़ गई है। इसका असर बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ रहा है। साथ ही, यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) और बैंक ऑफ जापान (BOJ) की ओर से इसी महीने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं ने वैश्विक निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।

घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत, लेकिन वैश्विक संकट भारी

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार इस समय दो विपरीत ताकतों के बीच फंसा हुआ है। एक ओर देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े कई संकेत उत्साहजनक हैं। पहली तिमाही के मजबूत जीडीपी आंकड़े, बेहतर जीएसटी संग्रह, मजबूत बैंक क्रेडिट ग्रोथ और ऑटोमोबाइल बिक्री जैसे आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। लेकिन दूसरी ओर अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जैसे वैश्विक जोखिम इन सकारात्मक संकेतों पर भारी पड़ रहे हैं। यही वजह है कि मजबूत जीडीपी आंकड़ों के बावजूद बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोर नजर आई।

क्या कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भारत के लिए बड़ा खतरा है?

ब्रेंट क्रूड के करीब 95.33 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड के 90.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भारत के लिए चिंता जरूर बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञ फिलहाल इसे अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट नहीं मान रहे हैं। वीके विजयकुमार के मुताबिक, तेल की कीमतों में तेजी बाजार के सेंटिमेंट के लिए नकारात्मक है, लेकिन भारत की मौजूदा व्यापक आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत है। भारत का चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के करीब 0.5 प्रतिशत पर है, जबकि देश के पास लगभग 730 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। यह मजबूत रिजर्व वैश्विक स्तर पर किसी बड़े बाहरी झटके से निपटने में महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

सोने में भी गिरावट, एशियाई बाजारों पर दबाव

वैश्विक बाजारों में जारी उथल-पुथल के बीच सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में भी कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 0.86 प्रतिशत गिरकर 4,291.35 डॉलर प्रति औंस रह गई। अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर एशियाई शेयर बाजारों पर भी पड़ा। जापान का निक्केई 2.81 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.44 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसेंग 1.17 प्रतिशत टूट गया।

अब बाजार के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?

बाजार विशेषज्ञों की नजर अब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर टिकी है। खासतौर पर अमेरिका की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में होने वाली बढ़ोतरी वैश्विक शेयर बाजारों के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है। जानकारों का मानना है कि यदि अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंचती है, तो दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में तेज करेक्शन देखने को मिल सकता है। ऊंची बॉन्ड यील्ड निवेशकों को शेयरों की तुलना में अपेक्षाकृत सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर आकर्षित कर सकती है।

आगे बाजार की दिशा किससे तय होगी?

आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा दो प्रमुख कारकों के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी। एक तरफ मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़े और दूसरी तरफ पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव, महंगा कच्चा तेल और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर चिंता। यदि भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर टिकती हैं, तो बाजार पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं, तनाव कम होने और घरेलू आर्थिक मजबूती के संकेतों के हावी होने पर भारतीय बाजार में दोबारा भरोसा लौट सकता है।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम