Home » हेल्थ » क्या देश में फिर लौटने वाला है लॉकडाउन का वो खौफनाक दौर ? बेकाबू हो रहा है कोरोना, महज 17 दिनों में मिले 339 केस, आंध्र प्रदेश में 4 की मौत से हड़कंप!

क्या देश में फिर लौटने वाला है लॉकडाउन का वो खौफनाक दौर ? बेकाबू हो रहा है कोरोना, महज 17 दिनों में मिले 339 केस, आंध्र प्रदेश में 4 की मौत से हड़कंप!

नई दिल्ली। देश के लिए क्या यह एक बार फिर से बड़ी खतरे की घंटी है? कोरोना वायरस ने एक बार फिर देश में पांव पसारना शुरू कर दिया है, जिससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। आंकड़ों पर. . .

नई दिल्ली। देश के लिए क्या यह एक बार फिर से बड़ी खतरे की घंटी है? कोरोना वायरस ने एक बार फिर देश में पांव पसारना शुरू कर दिया है, जिससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल जुलाई के शुरुआती 17 दिनों के भीतर ही देशभर में 339 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस छोटी सी अवधि में 4 मरीजों की मौत भी दर्ज की जा चुकी है।

क्या हम एक बार फिर किसी बड़ी लहर की तरफ बढ़ रहे हैं? राज्यवार आंकड़े इस डर को और पुख्ता कर रहे हैं:

  • केरल: सबसे ज्यादा प्रभावित, जहां अब तक 115 केस सामने आ चुके हैं।
  • कर्नाटक: संक्रमण के मामले में दूसरे नंबर पर, यहाँ 64 केस मिले हैं।
  • महाराष्ट्र: 43 नए मरीजों के साथ संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
  • तमिलनाडु: 39 लोग वायरस की चपेट में आ चुके हैं।
  • दिल्ली और अंडमान निकोबार: दोनों ही जगहों पर 18-18 मामले दर्ज किए गए हैं।
  • राजस्थान और आंध्र प्रदेश: दोनों राज्यों में 12-12 केस मिल चुके हैं।

कडप्पा जिला ही क्यों बना आफत का ‘एपिसेंटर’?

क्या यहीं से फैला वायरस का नया जाल? स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आंध्र प्रदेश का कडप्पा जिला ही इस बार सबसे पहले संक्रमण की चपेट में क्यों आया? आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोना का सबसे पहला मामला इसी राज्य में 26 जून को रिपोर्ट हुआ था। इसके बाद 1 जुलाई से 17 जुलाई के बीच अचानक से 12 नए मामले सामने आ गए। हैरानी की बात यह है कि 26 जून से 17 जुलाई के बीच पूरे प्रदेश में महज 67 लोगों की कोरोना जांच की गई, जिनमें से 12 लोग पॉजिटिव पाए गए। यानी जांच की तुलना में संक्रमण की दर बेहद डरावनी है।

दम तोड़ने वाले चारों मरीजों का क्या है सच?

आंध्र प्रदेश में मिले 12 कोरोना मरीजों में से 4 संक्रमितों की मौत हो चुकी है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। हालांकि, डॉक्टरों के सामने अब यह सवाल है कि क्या मौत की असली वजह सिर्फ कोरोना था या कुछ और?

बताया जा रहा है कि दम तोड़ने से पहले ये चारों मरीज पहले से ही कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। इन्हें हाई ब्लड प्रेशर, शुगर (डायबिटीज) और किडनी जैसी गंभीर बीमारियां थीं। मृतकों में से 3 मरीज अकेले कडप्पा जिले के थे, जबकि 1 मरीज काकीनाडा का रहने वाला था।

क्या स्वास्थ्य विभाग के पास है खतरे से निपटने का पुख्ता प्लान?

वर्तमान में कुल संक्रमितों की स्थिति को देखें तो इलाज और तैयारियों पर कई सवाल खड़े होते हैं। आंध्र प्रदेश के 12 मरीजों में से:

  • 3 मरीज फिलहाल होम आइसोलेशन में वक्त काट रहे हैं।
  • 2 मरीजों की हालत गंभीर होने के चलते उन्हें अस्पताल के विशेष कोरोना वार्ड में भर्ती कराया गया है।
  • 3 मरीज खुशकिस्मती से पूरी तरह ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं।
  • 12वां मामला तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (CMC) में सामने आया है, जिससे साफ है कि मरीज इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं।

फिलहाल स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए कडप्पा के RIMS अस्पताल में आनन-फानन में एक विशेष कोविड वार्ड तैयार किया गया है। लेकिन सवाल वही है कि क्या हमारा सिस्टम इस बार बिना किसी बड़े नुकसान के इस वायरस को रोकने में कामयाब हो पाएगा?

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