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तेल संकट के बीच केंद्र का बड़ा फैसला, 1 जून से पेट्रोल-डीजल के निर्यात शुल्क में कटौती

नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और होर्मुज संकट के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने 1 जून से पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाले निर्यात. . .

नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और होर्मुज संकट के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने 1 जून से पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाले निर्यात शुल्क (एक्सपोर्ट ड्यूटी) में कटौती करने का ऐलान किया है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम जरूरी है।

1 जून से लागू होंगी नई दरें

सरकार के अनुसार 1 जून से पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर होगा। वहीं डीजल पर यह शुल्क 13.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर 9.5 रुपये प्रति लीटर निर्यात शुल्क लगाया जाएगा।

आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होगा। देश में आम उपभोक्ताओं को मिलने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर इस फैसले का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

हर 15 दिन में होती है समीक्षा

पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर लगने वाले निर्यात शुल्क की समीक्षा हर पखवाड़े की जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की औसत कीमतों के आधार पर सरकार शुल्क में संशोधन करती है।

मार्च में पहली बार लगाया गया था शुल्क

पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) के रूप में निर्यात शुल्क पहली बार 27 मार्च 2026 को लागू किया गया था। उस समय सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना था, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहे थे।

क्या है एक्सपोर्ट ड्यूटी?

निर्यात शुल्क एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) होता है, जिसे सरकार उन वस्तुओं पर लगाती है जो देश से बाहर भेजी जाती हैं। इसका मकसद घरेलू बाजार में आपूर्ति संतुलित रखना और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना होता है।

अगली समीक्षा तक लागू रहेंगी नई दरें

सरकार ने कहा है कि 1 जून से लागू होने वाली नई दरें अगले पखवाड़े तक प्रभावी रहेंगी। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए फिर से समीक्षा की जाएगी।

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