कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने न्यूटाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित विधायकों के विशेष प्रशिक्षण शिविर में राज्य की पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी व्यवस्था बना दी गई थी, जहां विधायकों और सांसदों को सम्मान नहीं मिलता था और प्रशासन भी उनकी अनदेखी करता था। साथ ही उन्होंने नए शासन में सभी जनप्रतिनिधियों को समान महत्व देने का दावा किया।
‘विधायकों की कोई इज्जत नहीं थी’
मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि पहले राज्य में ऐसी राजनीतिक संस्कृति विकसित हो गई थी, जिसमें विधायकों और सांसदों की कोई अहमियत नहीं थी। उन्होंने कहा, “एक समय ऐसा था जब बीडीओ और थाने के अधिकारी तक विधायकों का फोन नहीं उठाते थे। सरकारी कार्यक्रमों में विपक्षी विधायकों को बुलाया तक नहीं जाता था। राजनीतिक पहचान के आधार पर भेदभाव किया जाता था, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।”
विपक्ष के नेता रहते हुए किया गया उत्पीड़न: शुभेंदु
अपने राजनीतिक अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह विधानसभा में विपक्ष के नेता थे, तब उन्हें कई प्रशासनिक बैठकों में नहीं बुलाया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार विधानसभा से निलंबित भी किया गया।
’34 साल वाम और 15 साल तृणमूल ने व्यवस्था को कमजोर किया’
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि लंबे समय तक वाम शासन और उसके बाद तृणमूल सरकार के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका कमजोर हुई। उन्होंने कहा, “34 वर्षों तक राज्य का संचालन पार्टी कार्यालयों से होता रहा। उसके बाद पिछले 15 वर्षों में क्या हुआ, यह बताने की जरूरत नहीं है। विधानसभा की भूमिका लगातार कमजोर होती गई।”
श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को किया याद
अपने संबोधन की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि अविभाजित बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखने में विधानसभा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की ऐतिहासिक भूमिका रही। उनके योगदान के बिना आज लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी संभव नहीं होती।
‘नई सरकार में सभी विधायकों को मिल रहा समान सम्मान’
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि नई सरकार बनने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ महीने में उन्होंने पांच प्रशासनिक समीक्षा बैठकें कीं, जिनमें सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्षी विधायकों को भी आमंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के बजट में विपक्षी विधायकों के विकास कार्यों के लिए भी धन का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा, “बंगाल के विकास के लिए सभी दलों को साथ लेकर चलना होगा। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा, जब हर जनप्रतिनिधि को बराबर सम्मान मिलेगा।”
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने की विधायकों की जिम्मेदारी पर चर्चा
कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नव-निर्वाचित विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल देश के लिए प्रेरणा का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि जनता ने बड़ी उम्मीदों के साथ अपने प्रतिनिधियों को चुना है। इसलिए हर विधायक का दायित्व है कि वह अपने क्षेत्र के साथ-साथ पूरे राज्य के विकास के लिए कार्य करे। उन्होंने यह भी कहा कि 121 नए विधायकों का एक साथ चुना जाना ऐतिहासिक उपलब्धि है और सभी को संसदीय परंपराओं एवं लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।
राज्यसभा के उपसभापति ने की मुख्यमंत्री की सराहना
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि कम समय में उन्होंने कई महत्वपूर्ण और स्पष्ट निर्णय लिए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को फिर से हासिल करेगा और विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।
दो से तीन महीने में पूरी तरह डिजिटल होगी विधानसभा
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कार्यक्रम में घोषणा की कि अगले दो से तीन महीनों के भीतर पश्चिम बंगाल विधानसभा को पूरी तरह डिजिटल बना दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ‘वन नेशन, वन एप्लिकेशन’ योजना के तहत देश की सभी विधानसभाओं को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है, जिससे विधायी कार्य और अधिक पारदर्शी एवं आधुनिक बन सकेंगे।