डेस्क। रोबोटिक्स की दुनिया में ऐसा कारनामा हुआ है जिसने मेडिकल साइंस को नई दिशा दे दी है। पहली बार एक ह्यूमनॉइड रोबोट ने ऑपरेशन थिएटर में सर्जन की भूमिका निभाते हुए गॉलब्लैडर निकालने की सफल सर्जरी की। यह उपलब्धि अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो (UC San Diego) के वैज्ञानिकों और सर्जनों ने मिलकर हासिल की है।
‘सरजी’ की एंट्री… और डॉक्टर बन गए सिर्फ सहायक!
इस अनोखे प्रयोग में ‘सरजी’ (Surgie) नाम के ह्यूमनॉइड रोबोट ने पहली सर्जरी इंसानी डॉक्टर के साथ मिलकर की। हैरानी की बात यह रही कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर मुख्य सर्जन नहीं, बल्कि सिर्फ असिस्टेंट की भूमिका में थे। इसके बाद हुए दूसरे लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशन में तो दो ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने मिलकर बिना किसी सीधी मानवीय मदद के पूरी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर दी।
जिस पल ने बदल दिया मेडिकल इतिहास…
यह प्रयोग शुरुआती चरण में ऐसे जानवरों पर किया गया जो इंसानों या बंदरों की प्रजाति से संबंधित नहीं थे। लेकिन इसके नतीजों ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया। रोबोट ने सर्जरी के जटिल चरणों को बेहद सटीक तरीके से पूरा किया और मेडिकल इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।
क्या आने वाले समय में इंसानी सर्जनों की जगह लेंगे रोबोट?
रिसर्च टीम के वरिष्ठ लेखक और इलेक्ट्रिकल व कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर माइकल यिप का कहना है कि यह सिर्फ एक सफल प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य की झलक है। उनके मुताबिक, ह्यूमनॉइड रोबोट आने वाले वर्षों में ऑपरेशन थिएटर का अहम हिस्सा बन सकते हैं और कई तरह की सर्जरी में डॉक्टरों की मदद कर सकते हैं।
जहां डॉक्टर नहीं पहुंचते… वहां पहुंचेगा ‘सरजी’
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा दूर-दराज और संसाधनों की कमी वाले इलाकों में मिलेगा। रिमोट कंट्रोल और ऑटोमेटेड सिस्टम की मदद से ये रोबोट ऐसे अस्पतालों में भी सर्जरी कर सकेंगे जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इससे दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर हो सकती है।
सिर्फ 5 फीट का यह रोबोट कर सकता है बड़े-बड़े काम
‘सरजी’ की ऊंचाई करीब 5 फीट और वजन लगभग 60 पाउंड है। आकार में छोटा होने के कारण इसे आसानी से एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाया जा सकता है। सिर्फ सर्जरी ही नहीं, यह ऑपरेशन के दौरान उपकरण पकड़ाने, मेडिकल टीम की सहायता करने और प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफाई जैसे कई काम भी कर सकता है।
लेकिन अभी बाकी है असली परीक्षा…
हालांकि यह तकनीक अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुई है। रिसर्च टीम के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान रोबोट को कई बार दोबारा कैलिब्रेट करना पड़ा, जिससे सर्जरी में अतिरिक्त समय लगा।
इसके अलावा, इंसान के कमांड देने और रोबोट के प्रतिक्रिया देने के बीच होने वाली लेटेंसी को भी कम करने पर काम किया जा रहा है। यही चुनौती भविष्य में इस तकनीक को व्यापक स्तर पर अपनाने की राह तय करेगी।
क्या यह मेडिकल दुनिया की नई शुरुआत है?
ह्यूमनॉइड रोबोट ‘सरजी’ ने यह साबित कर दिया है कि भविष्य में ऑपरेशन थिएटर की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। अगर तकनीक में बाकी कमियां भी दूर हो जाती हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब डॉक्टरों के साथ-साथ रोबोट भी मरीजों की जान बचाते नजर आएंगे।