नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे ने भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी है। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला न्यूजीलैंड दौरा दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए और अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया। संयुक्त बयान के अनुसार, भारत और न्यूजीलैंड ने ‘रोडमैप 2030’ तैयार किया है, जिसके तहत अगले चार वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू की जाएगी। दोनों देशों ने अपने रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस साल रिकॉर्ड 9 महीने में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हुआ है। न्यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत में ₹1.72 लाख करोड़ (20 अरब डॉलर) निवेश करेगा। साथ ही ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में भी मदद करेगा। पीएम मोदी आज ऑकलैंड में 40 हजार भारतीयों को संबोधित करेंगे। मोदी 6 से 11 जुलाई तक अपनी तीन देशों की यात्रा के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंचे हैं। वे आज ही नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। यह 40 साल बाद किसी भारतीय पीएम की न्यूजीलैंड यात्रा है। इससे पहले 1986 में राजीव गांधी न्यूजीलैंड गए थे।
- रोडमैप 2030 के तहत रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत
दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, कृषि, पर्यटन, संस्कृति, खेल, तकनीक, शिक्षा, लोगों के बीच संपर्क और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए एक साझा एक्शन प्लान पर काम किया जाएगा।
- 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार होगा दोगुना
भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 7 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इससे दोनों देशों के उद्योगों, निवेश और निर्यात को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
- हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा पर बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए नया सहयोगी ढांचा तैयार करने पर सहमति जताई है। इसके तहत समुद्री निगरानी, सूचना साझा करना, संयुक्त गतिविधियां और समन्वय को बढ़ावा दिया जाएगा।
- हाइड्रोग्राफी और नौवहन तकनीक में साझेदारी
भारत और न्यूजीलैंड समुद्री मानचित्रण (Hydrography) और नॉटिकल कार्टोग्राफी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाएंगे। इसमें नेविगेशन, डेटा शेयरिंग, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- सेनाओं के बीच लॉजिस्टिक सहयोग को मिली मंजूरी
दोनों देशों की सेनाओं के बीच लॉजिस्टिकल सपोर्ट से जुड़ा महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इससे रक्षा सहयोग और संयुक्त सैन्य गतिविधियों को नई मजबूती मिलेगी।
- आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त वर्किंग ग्रुप बनेगा
भारत और न्यूजीलैंड ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला किया है। इसके माध्यम से दोनों देश खुफिया जानकारी साझा करेंगे और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे।
- आपदा प्रबंधन में बढ़ेगा सहयोग
भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और न्यूजीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी के बीच सहयोग का समझौता हुआ है। दोनों देश भूकंप, सुनामी, तटीय आपदाओं और राहत एवं बचाव कार्यों में अनुभव और तकनीक साझा करेंगे।
- उच्च स्तरीय राजनीतिक और राजनयिक संवाद होगा तेज
दोनों देशों ने नेताओं, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के नियमित दौरे बढ़ाने पर सहमति जताई है। साथ ही हर वर्ष विदेश मंत्रियों के स्तर पर वार्ता आयोजित की जाएगी, जिससे रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे।
- संसदीय सहयोग को मिलेगा बढ़ावा
भारत और न्यूजीलैंड के सांसद नियमित रूप से एक-दूसरे के देशों का दौरा करेंगे। इसका उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना और लोकतांत्रिक अनुभवों का आदान-प्रदान करना है।
- कृषि, डेयरी और पशुपालन में नई साझेदारी
भारत के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा न्यूजीलैंड के संबंधित मंत्रालय के बीच कृषि और डेयरी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इससे आधुनिक कृषि तकनीकों और उत्पादकता में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
- पर्यटन और नवाचार को मिलेगा प्रोत्साहन
पर्यटन, व्यापार, नवाचार और रोजगार से जुड़े मंत्रालयों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे पर्यटन उद्योग को गति मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत होंगे।
- खेल विज्ञान और खिलाड़ियों के विकास पर होगा संयुक्त काम
दोनों देशों ने हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स, स्पोर्ट्स साइंस, स्पोर्ट्स मेडिसिन और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण एवं विकास के क्षेत्र में मिलकर काम करने का निर्णय लिया है।
- सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
भारत और न्यूजीलैंड के संस्कृति मंत्रालयों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति बनी है। इससे कला, विरासत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच जुड़ाव और मजबूत होगा।
- ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस में शामिल होगा न्यूजीलैंड
न्यूजीलैंड ने भारत की पहल पर बने ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस में शामिल होने का फैसला किया है। इससे स्वच्छ ऊर्जा, हरित ईंधन और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलेगी।
- भारत में विकसित होंगे किवी फ्रूट एक्सीलेंस सेंटर
नगालैंड और उत्तराखंड में कीवी फ्रूट एक्शन प्लान शुरू किया गया है। इसके साथ ही भारत में कीवी फ्रूट एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण खेती का लाभ मिलेगा।
- ध्रुवीय और समुद्री अनुसंधान में बढ़ेगा सहयोग
भारत के राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR), गोवा और न्यूजीलैंड के संबंधित अनुसंधान संस्थान के बीच सहयोग समझौता हुआ है। इसके तहत ध्रुवीय विज्ञान, महासागर अनुसंधान और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर संयुक्त शोध को बढ़ावा दिया जाएगा।
भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी का क्या होगा फायदा?
इन समझौतों से दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृषि, पर्यटन, खेल, संस्कृति, ऊर्जा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होगा। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, आर्थिक विकास और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।