काठमांडू। काठमांडो में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के करीब 10 से 11 दिन बीत जाने के बाद राहत और बचाव अभियान में चमत्कारी सफलताएं सामने आई हैं। भारी तबाही और बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच सुरक्षा बलों ने दो अलग-अलग स्थानों से दो लोगों को मलबे से जिंदा बाहर निकाला है।
बेट्रावती में ढहे मकान से बुजुर्ग महिला का सुरक्षित रेस्क्यू
बेट्रावती क्षेत्र में मलबे के नीचे दबे एक मकान से नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने 60 वर्षीय महिला को जीवित बाहर निकाला। 10 दिनों से अधिक समय तक भोजन-पानी के बिना मलबे में दबे रहने के बावजूद महिला सुरक्षित हैं। जवानों ने अत्यधिक संकरे और जोखिम भरे हालात में मलबे को हटाकर इस रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट से चीनी नागरिक भी सुरक्षित बाहर
एक अन्य बड़ी कामयाबी अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना के प्रभावित इलाके में मिली, जहां सर्च ऑपरेशन के दौरान मलबे में फंसे एक चीनी नागरिक को 10-11 दिन बाद जीवित खोज निकाला गया। बचाव दल ने तुरंत प्राथमिक उपचार मुहैया कराते हुए उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
मलबे में फंसी अन्य जिंदगियों के लिए जगी उम्मीद
सामान्यतः आपदाओं में इतने दिनों बाद जीवित बचने की संभावनाएं काफी क्षीण मानी जाती हैं। हालांकि, इन दोनों मामलों ने राहत और बचाव दलों के भीतर नई ऊर्जा भर दी है:
- निरंतर खोज अभियान: जमीन पर तैनात बचाव दल अब केवल मलबा हटाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर संभावित खाली जगह और मलबे की दरारों में जीवित बचे लोगों की सक्रिय तलाश कर रहे हैं।
- परिजनों को सहारा: लापता लोगों के परिजनों में अपनों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद एक बार फिर कायम हुई है।
जोखिम भरे हालात में सुरक्षा बलों का साहस
भूस्खलन और अस्थिर मलबे के भारी खतरे के बावजूद नेपाल के सशस्त्र बल और राहत टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। प्रतिकूल मौसम और विषम भौगोलिक परिस्थितियों में भी अपनी जान जोखिम में डालकर जिंदगियां बचाने वाले सुरक्षा कर्मियों के समर्पण और साहस की चारों तरफ सराहना हो रही है। रेस्क्यू टीमों का स्पष्ट संदेश है कि जब तक अभियान पूरा नहीं होता, उम्मीद नहीं छोड़ी जाएगी।