नई दिल्ली: हनीमून के दौरान अपने ही पति की हत्या करवाने की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने मामले की सुनवाई करते हुए सोनम को निचली अदालत से मिली जमानत याचिका को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने आरोपी महिला को अगले तीन सप्ताह (21 दिन) के भीतर पुलिस या संबंधित अदालत के समक्ष हर हाल में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का सख्त निर्देश जारी किया है।
छुट्टियाँ मनाने गए थे मेघालय, खाई में मिला था पति का शव
मामला मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से जुड़ा हुआ है।
- रहस्यमयी गुमशुदगी: इंदौर निवासी सोनम और उनके व्यवसायी पति राजा रघुवंशी पिछले साल 23 मई (2025) को छुट्टियाँ बिताने (हनीमून पर) मेघालय के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोहरा (चेरापूंजी) गए थे। वहाँ पहुँचने के कुछ ही दिनों बाद यह जोड़ा संदिग्ध परिस्थितियों में अचानक लापता हो गया।
- शव की बरामदगी: परिजनों और पुलिस द्वारा तलाश शुरू किए जाने के बाद, 2 जून 2025 को राजा रघुवंशी का शव सोहरा इलाके की एक बेहद गहरी खाई से बरामद किया गया था।
किराए के हत्यारों के साथ रची गई थी हत्या की साजिश
मेघालय पुलिस द्वारा की गई गहन छानबीन और फॉरेंसिक जाँच में चौकाने वाले खुलासे हुए। जाँच एजेंसी का आरोप है कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दी गई हत्या थी। पुलिस के अनुसार, सोनम ने अपने पति से छुटकारा पाने के लिए भाड़े के पेशेवर हत्यारों (सुपारी किलर्स) का सहारा लिया और साजिश रचकर मेघालय की सुनसान पहाड़ियों में अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या करवा दी। साक्ष्य जुटाने के बाद जून 2025 में पुलिस ने सोनम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का कानूनी घटनाक्रम
इस मामले में जमानत को लेकर निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबा कानूनी घटनाक्रम चला:
- ट्रायल कोर्ट (27 अप्रैल 2026): मेघालय की संबंधित ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी थी।
- हाईकोर्ट का रुख (29 जून 2026): पुलिस और राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए जमानत रद्द कराने के लिए मेघालय हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि, 29 जून 2026 को हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की इस याचिका को खारिज कर दिया और जमानत बरकरार रखी।
- सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर मेघालय सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता, साक्ष्यों और जाँच पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया और सोनम की जमानत तुरंत प्रभाव से रद्द करने का फैसला सुनाया।
तीन हफ्तों के भीतर आत्मसमर्पण का आदेश
सर्वोच्च अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब सोनम रघुवंशी को अगले तीन हफ्तों के भीतर पुलिस या संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सरेंडर करना होगा। यदि वह तय समयसीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करती हैं, तो पुलिस उन्हें दोबारा हिरासत में लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी।